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Lucknow News: शिशु तक ऑक्सीजन पहुंचने में बाधा डालता है गर्भवती का बढ़ा हुआ बीपी

Sun, 14 Jun 2026 02:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 02:00 AM IST
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A pregnant woman's elevated blood pressure hinders the supply of oxygen to the fetus.
प्रतीकात्मक तस्वीर।
लखनऊ। गर्भवतियों में हाई ब्लड प्रेशर (प्री-इक्लेम्पसिया) जेस्टेशनल डायबिटीज, थायरॉइड या दिल की बीमारी शिशु के विकास को प्रभावित करती है। ये बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया भी प्रभावित करता है। ऐसे गर्भवतियों के बच्चों को जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में परेशानी होती है, जो शारीरिक और मानसिक दिव्यांगता की वजह भी बन सकती है।
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केजीएमयू के बाल रोग विभाग की डॉ. शालिनी त्रिपाठी बताती हैं कि गंभीर स्थितियों में ऐसे बच्चों में मौत का खतरा 70 प्रतिशत से अधिक सकता है। वहीं, केजीएमयू के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल बताती हैं कि हाई ब्लड प्रेशर व अन्य मामलों में हर महीने 70 प्रतिशत मामले हाई रिस्क डिलीवरी के देखने को मिल रहे हैं। इन मामलों में करीब दस फीसदी नवजातों में सांस लेने में समस्या देखने को मिलती है।
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पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने से बढ़ता है दिव्यांगता का खतरा
डॉ. शालिनी त्रिपाठी बताती हैं कि गर्भ में या जन्म के ठीक बाद जब बच्चे के फेफड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो उसका खून में प्रवाह रुक जाता है। इससे हाइपोक्सिक इस्केमिक एन्सेफैलोपैथी का खतरा होता है। इससे कई अंग भी प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही, बच्चा उम्र भर के लिए मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग हो सकता है। ऐसे में इन्हें तुरंत ऑक्सीजन, वेंटिलेटर या सीपीआर दिया जाता है।
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ऐसे की जा सकती है नवजातों के जीवन की रक्षा

डॉ. अंजू अग्रवाल बताती हैं कि गर्भवतियों को यदि गर्भावस्था के आखिरी हफ्तों में बच्चे की हलचल कम महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान डॉक्टरों की देखरेख में रहना चाहिए, ताकि हाई-रिस्क के लक्षणों का समय पर पता चल सके। साथ ही, गर्भावस्था के आखिरी महीनों में नियमित कलर डॉप्लर टेस्ट कराते रहना चाहिए, ताकि बच्चे को सही मात्रा में खून और ऑक्सीजन मिल रही है या नहीं, इसका पता लगाया जा सके।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

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