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कड़ाके की ठंडी रात में ट्रैक पर मरने को छोड़ दी गई एक और बिटिया

Sun, 18 Dec 2016 02:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 18 Dec 2016 02:11 AM IST
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A new born baby found on railway track in Lucknow.
रेलवे ट्रैक के किनारे मिली एक बच्ची - फोटो : amar ujala

बेटियों को बोझ मानने की मानसिक दासता से खुद को मुक्त नहीं कर पा रहे समाज के चंद लोगों का क्रूर चेहरा शुक्रवार की अलसुबह सामने आया। महज एक दिन की बिटिया को उसके पालनहर हाड़कंपा देने वाली सर्द रात में बंदरियाबाग रेलवे ट्रैक पर छोड़ गए।

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भला हो स्थानीय निवासी दंपती बच्चेलाल और उसकी पत्नी राधा का, जिन्होंने बच्ची को देखा और तुरंत अस्पताल ले गए। फिलहाल बच्ची झलकारीबाई अस्पताल के एनआईसीयू में है। उसकी हालत में सुधार आने का इंतजार किया जा रहा है।
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बंदरियाबाग में रहने वाले बच्चेलाल और राधा ने शुक्रवार की सुबह पांच बजे उन्हें किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। लगातार आती आवाज सुन वे खुद को रोक नहीं सके और आवाज की दिशा में बढ़ चले। ट्रैक की तरफ पहुंचे तो वहां एक कंबल के टुकड़े में बच्ची लिपटी मिली। राधा ने बताया कि उसकी नाल भी नहीं हटी थी, उसे क्लिप किया गया था। बच्ची का शरीर ठंडा पड़ चुका था।
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पति-पत्नी उसे तुरंत झलकारीबाई अस्पताल लेकर भागे। यहां डॉ. विभा यादव ने उसका इलाज शुरू किया। साथ ही चाइल्ड लाइन को 1098 पर सूचना दी गई। चाइल्ड लाइन की टीम के बृजेंद्र शर्मा और अनीता अस्पताल पहुंचे और नवजात के विषय में उपलब्ध जानकारियां दर्ज की गईं।

फिलहाल में हालत में सुधार

A new born baby found on railway track in Lucknow.

चाइल्ड लाइन लखनऊ समन्वयक अजीत कुशवाहा ने बताया कि नवजात को ट्रैक पर किसने छोड़ा यह मालूम नहीं चल सका है। उसके मिलने की सूचना बाल कल्याण समिति को दे दी गई है।

वहीं, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलांबर ने बताया कि जब नवजात को अस्पताल लाया गया, उसे हाइपोथर्मिया हो चुका था और सांस लेने में परेशानी हो रही थी।

फिलहाल उसकी हालात में कुछ सुधार आया है, लेकिन अगले कुछ दिन उसे एनआईसीयू में रखना होगा। बच्ची को देखकर लगता है कि उसे जन्म के महज 24 घंटे के भीतर ही छोड़ दिया गया।

एक महीने के भीतर फेंकी जा चुकी हैं चार बेटियां

A new born baby found on railway track in Lucknow.

17 नवंबर : चौक  में कूड़े के ढेर में पॉलिथिन में डालकर कोई बच्ची को फेंक गया। आशंका जताई गई कि बच्ची को जीवित ही फेंका गया था, बाद में गंदगी, सर्दी से उसकी हालत बिगड़ी और मौत हो गई।

- 19 नवंबर : गोमती बैराज पर तीन दिन की लावारिस मिली।  उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आज भी वह भर्ती है। उसकी सूचना भी पुलिस व चाइल्ड लाइन को राहगिरों ने दी थी। फिलहाल बच्ची की हालत में सुधार आ रहा है।

- 25 नवंबर : एक नवजात एसजीपीजीआई क्षेत्र के उतरठिया में लावारिस पाई गई। यहां नागरिकों को किसी नवजात के रोने की आवाज आई थी, तलाश किया तो क्षेत्र के ही एक अस्पताल की बाउंड्री के निकट वह बच्ची लावारिस अवस्था में रोती मिली थी।

...पर दंपती की इंसानियत ने जगाई उम्मीद

A new born baby found on railway track in Lucknow.

कहते हैं कि हर तस्वीर के दो पहलू होते हैं। एक तरफ जहां बेटियों के प्रति क्रूरता लोगों में मरती संवेदना की गवाही दे रही हैं। वहीं दूसरी ओर बच्चेलाल और राधा जैसे लोग भी हैं, जिनके प्रयास उम्मीद जगाते हैं कि मुर्दा होते शहर में अभी इंसान जिंदा है।

बच्चेलाल और राधा ला-मार्टिनियर में सफाईकर्मी हैं। वह सदर में बंदरियाबाग में पुल के नीचे कच्ची बस्ती में रहते हैं।

उन्होंने जब बच्चे के रोने की आवाज सुनी तो कड़ाके की ठंड के बावजूद उन्होंने बिना देर किए बच्ची को अस्पताल पहुंचाया। बच्ची का शहर ठंडा पड़ चुका था, शायद कुछ देर और होती तो उसे बचाना मुश्किल होता।

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