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Lucknow News: परमिट की आड़ में हरियाली पर खूब चल रहा आरा

Tue, 10 Dec 2024 01:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Tue, 10 Dec 2024 01:12 AM IST
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A lot of sawing is going on on greenery under the cover of permit
रायबरेली। जिले को हरा भरा बनाने का दंभ तो हर साल भरा जाता है, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। परमिट की आड़ में हरियाली पर खूब आरा चल रहा है। वन क्षेत्राधिकारियों की तैनाती के बाद भी ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं। विभागीय जानकार बताते हैं कि वन क्षेत्राधिकारियों की निगरानी में ढिलाई इसकी मुख्य वजह है। पेड़ों की कटान से तैयार की गई लकड़ी भट्ठी संचालकों को उपलब्ध कराई जाती हैं। भट्टी संचालक इससे लकड़ी का कोयला तैयार करते हैं।
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वन विभाग के रिकाॅर्ड के मुताबिक साल 2024 के नवंबर माह तक पेड़ों की कटान के लिए 135 परमिट जारी किए गए। इन 135 परमिट की आड़ में तकरीबन 500 पेड़ काटे जा चुके हैं। हरे पेड़ों की कटान डलमऊ के गंगा कटरी क्षेत्र के अलावा सरेनी, सलोन, डीह, छतोह, लालगंज, जगतपुर, ऊंचाहार, गदागंज क्षेत्रों में सबसे ज्यादा होती है।
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ऐेसे में न सिर्फ जिले को हरा भरा बनाने का मकसद अधूरा रहता है, बल्कि पेड़ों की कटान से प्रदूषण बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। कोयला भट्ठियों के संचालित होने से आबोहवा भी दूषित हो रही है। विभागीय लोगों के अनुसार एक पेड़ कटान के लिए परमिट जारी करने पर 1200 रुपये शुल्क जमा करना पड़ता है।
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बावजूद इसके एक परमिट देने के नाम पर लोगों से पांच से छह हजार रुपये लिए जाते हैं। उधर, कार्यवाहक डीएफओ मयंक अग्रवाल का कहना है कि जहां पर भी पेड़ों के कटान सूचना मिलती है, टीम भेजकर कार्रवाई कराई जाती है। सूखे पेड़ों का ही परमिट जारी किया जाता है।


एक होमगार्ड के इशारे पर होती कटान

जिले के वन क्षेत्र की बात की जाए तो सलोन ऐसा इलाका है, जहां मौजूदा समय में सबसे ज्यादा वन क्षेत्र है। इस क्षेत्र में पेड़ों की संख्या अधिक है। एक होमगार्ड के इशारे पर इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा हरे पेड़ों की कटान होती है। पेड़ों की कटान इस होमगार्ड के बिना कोई नहीं करा सकता। कई बार होमगार्ड का हरे पेड़ों की कटान में नाम आया, लेकिन हर बार उसने अफसरों की सेटिंग से खुद को बचा लिया।


हरे पेड़ों को रोगग्रस्त दिखाकर लेते हैं परमिट
नियम है कि हरे पेड़ों की न कटान हो। न ही कटान के लिए परमिट जारी किया जाए। बावजूद इसके हरे पेड़ों को रोगग्रस्त दिखाकर परमिट जारी कर दिया जाता है। एक पेड़ के बजाय ठेकेदार अधिक पेड़ों की कटान कर लेते हैं। यह सब वन विभाग और पुलिस कर्मियों की मिलीभगत से होता है। नियम है कि सूखे पेड़ का ही परमिट जारी किया जाए।



जिले में किसी कीमत पर हरे पेड़ों की कटान नहीं होने पाएगी। इस संबंध में सभी थाना प्रभारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। जहां पर हरे पेड़ों की कटान की सूूचना आती है, वहां पर पुलिस टीम भेजकर कार्रवाई कराई जाती है।

डॉ. यशवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक
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