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Lucknow News: विधान भवन सचिवालय के संपादक को फर्जी दस्तावेज के सहारे गारंटर बना लिया लोन
Thu, 06 Aug 2026 02:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 06 Aug 2026 02:18 AM IST
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लखनऊ। विधान भवन सचिवालय के संपादक प्रदीप कुमार पांडेय ने पड़ोसी सुशील कुमार शुक्ला पर फर्जी दस्तावेज के जरिये उन्हें लोन में गारंटर बनाने का आरोप लगाया। पुलिस आयुक्त के आदेश पर हजरतगंज पुलिस ने दो अगस्त को आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। सुशील कुमार एसडीएम कार्यालय सिधौली में स्टेनो हैं।
प्रदीप ने बताया कि पड़ोसी होने के नाते सुशील उनके घर आता-जाता था। इसका फायदा उठाकर सुशील ने उनके दस्तावेज चुराए और फर्जी आधार कार्ड बनाया। उसने हजरतगंज स्थित एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड कंपनी से 10 लाख रुपये का लोन लिया। प्रदीप का आरोप है कि आरोपी ने कूटरचित आधार कार्ड व फर्जी हस्ताक्षर से उन्हें लोन में गारंटर बनाया। उन्हें 30 सितंबर 2025 को कंपनी से नोटिस मिलने पर धोखाधड़ी की जानकारी हुई। उन्होंने 25 नवंबर 2025 को कंपनी पहुंचकर गारंटी से इन्कार किया। उनका कहना है कि कंपनी ने उन्हें उनके नाम पर कुछ दस्तावेज दिखाए, जो फर्जी निकले। गारंटी में लगे आधार कार्ड में उनकी जन्मतिथि भी गलत थी।
एक दिसंबर 2025 को कंपनी से एक और नोटिस मिला, जिसमें मैनेजर ऑपरेशन ने नाम गारंटर से हटाने के लिए कहा। पर जुलाई 2026 तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सुशील से बात की तो वह धमकाने लगा। इसके बाद उन्होंने पुलिस आयुक्त तरुण गाबा से शिकायत की। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला सही मिला है। पुलिस ने पीड़ित से साक्ष्य मांगे हैं। कंपनी को नोटिस जारी कर पूछताछ की जाएगी।
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प्रदीप ने बताया कि पड़ोसी होने के नाते सुशील उनके घर आता-जाता था। इसका फायदा उठाकर सुशील ने उनके दस्तावेज चुराए और फर्जी आधार कार्ड बनाया। उसने हजरतगंज स्थित एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड कंपनी से 10 लाख रुपये का लोन लिया। प्रदीप का आरोप है कि आरोपी ने कूटरचित आधार कार्ड व फर्जी हस्ताक्षर से उन्हें लोन में गारंटर बनाया। उन्हें 30 सितंबर 2025 को कंपनी से नोटिस मिलने पर धोखाधड़ी की जानकारी हुई। उन्होंने 25 नवंबर 2025 को कंपनी पहुंचकर गारंटी से इन्कार किया। उनका कहना है कि कंपनी ने उन्हें उनके नाम पर कुछ दस्तावेज दिखाए, जो फर्जी निकले। गारंटी में लगे आधार कार्ड में उनकी जन्मतिथि भी गलत थी।
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एक दिसंबर 2025 को कंपनी से एक और नोटिस मिला, जिसमें मैनेजर ऑपरेशन ने नाम गारंटर से हटाने के लिए कहा। पर जुलाई 2026 तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सुशील से बात की तो वह धमकाने लगा। इसके बाद उन्होंने पुलिस आयुक्त तरुण गाबा से शिकायत की। इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला सही मिला है। पुलिस ने पीड़ित से साक्ष्य मांगे हैं। कंपनी को नोटिस जारी कर पूछताछ की जाएगी।
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