अगले ही दिन काफूर हो गई इटावा लॉयन सफारी से मिली 'खुशी'
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के मेगा ड्रीम प्रोजेक्ट लॉयन सफारी में शनिवार को दो शावकों के जन्म से मिली खुशी अगले ही दिन काफूर हो गई। शेरनी हीर से जन्में दो शावकों में से एक ने दम तोड़ दिया। शावक की मौत पर फिलहाल आला अफसरों ने चुप्पी साधे रखी है। सूत्रों की मानें दूसरे शावक की भी स्थिति गंभीर है।
अधिकारियों की ओर से रविवार देर रात तक शावकों की मौत की पुष्टि नहीं की गई। अधिकारियों ने पूरे मामले से प्रदेश के जंतु उद्यान राज्यमंत्री को भी अंधेरे में रखा। उन्हें भी सही स्थिति के बारे में जानकारी नहीं दी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि शावक की मौत पैदा होने के बाद हुई या वह मृत ही पैदा हुआ था।
हीर और उसके दोनों शावकों पर जन्म के बाद से ही सीसीटीवी से नजर रखी जा रही थी। इनमें से एक में पैदा होने के बाद मूवमेंट दिखाई पड़ रहा था, जबकि दूसरे में हकरत नहीं हो रही थी। फ्रेंडली कीपर के अलावा किसी और को पास जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। उससे जुड़े सूत्र ने बताया कि जन्म के बाद से ही एक शावक की मौत हो चुकी है। शेरनी हीर को अप्रैल 2013 में लखनऊ में जू लाया गया था।
अफसरों ने नहीं उठाए फोन
शावक की मौत की खबर सफारी के बाहर फैलते ही सफारी चिकित्सक, निदेशक डॉ. केके सिंह, पीसीसीएफ डॉ. रूपक डे समेत तमाम ने मीडियाकर्मियों के फोन उठाने बंद कर दिए।
पिछले वर्ष विष्णु-लक्ष्मी ने भी तोड़ दिया था दम
लॉयन सफारी में हैदराबाद से लाए गए शेर विष्णु और शेरनी लक्ष्मी नाम के जोड़े ने पिछले साल बीमारी के चलते दम तोड़ दिया। लक्ष्मी की मौत 30 सितंबर 2014 को लाइलाज लकवाग्रस्त बीमारी से हुई तो ठीक 17 दिन बाद विष्णु की भी मौत हो गई।
जांच के लिए लखनऊ से पहुंचे अफसर
पूरे मामले की जांच के लिए लखनऊ चिड़िया घर के उपनिदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला सहायक चिकित्सक डॉ. विकास सिंह व कानपुर चिड़िया घर के डॉ. आरके सिंह वहां पहुंच चुके हैं।
वहीं,सफारी के डायरेक्टर केके सिंह से मोबाइल पर संपर्क किया तो उन्होंने हॉस्पिटल में होने का हवाला दिया। डीएफओ चंबल डॉ. अनिल पटेल भी मौन साधे रहे। मौजूदा समय में सूबे में 10 बब्बर शेर हैं। इनमें से 6 इटावा लॉयन सफारी में और चार लखनऊ प्राणि उद्यान में हैं।