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Lucknow News: मुरादाबाद में 14 मई को ट्रेन के आगे कूदी थी युवती, 16 दिन से जीआरपी में सड़ रहे सिर के अवशेष
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मुरादाबाद में 14 मई को ट्रेन के आगे कूदी थी युवती, 16 दिन से जीआरपी में सड़ रहे सिर के अवशेष
लखनऊ। मुरादाबाद की अंशू (28) के आत्महत्या के 16 दिन बाद भी उसके सिर के अवशेष डीएनए जांच की प्रतीक्षा में जीआरपी कार्यालय में सड़ रहे हैं। वहीं, युवती के सिर के अवशेष पाने के लिए माता-पिता धक्के खा रहे हैं। युवती ने 13 मई की रात नई दिल्ली से लखनऊ आ रही एक्सप्रेस ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी। हादसे में सिर धड़ से अलग हो गया था, जो ट्रेन के इंजन में फंसकर मुरादाबाद से लखनऊ पहुंच गया था।
लखनऊ यार्ड में ट्रेन की सफाई के दौरान कर्मचारियों को इंजन में फंसा सिर का हिस्सा और बाल दिखाई दिए थे। इसकी सूचना जीआरपी को दी गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह सिर मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र की काशीराम नगर निवासी अंशू का हो सकता है, जिसकी गुमशुदगी पहले से दर्ज थी। अंशू के धड़ का अंतिम संस्कार मुरादाबाद में कर दिया गया था, पर सिर की पहचान और सौंपने के लिए डीएनए जांच आवश्यक थी।
जीआरपी दरोगा 30 मई को युवती के पिता को लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे, वहां कई घंटे इंतजार के बाद बलरामपुर अस्पताल में सैंपल देने की अनुमति मिली। अस्पताल की इमरजेंसी में पिता का डीएनए सैंपल लिया गया। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह रहा कि 16 दिन तक डीएनए जांच शुरू नहीं हो सकी। इस दौरान सिर के अवशेष डिब्बे में बंद रहने के कारण सड़ गए और उनमें से दुर्गंध आने लगी।इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह ने बताया कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद युवती के सिर के अवशेष उसके माता-पिता को सौंपे जाएंगे।
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लखनऊ यार्ड में ट्रेन की सफाई के दौरान कर्मचारियों को इंजन में फंसा सिर का हिस्सा और बाल दिखाई दिए थे। इसकी सूचना जीआरपी को दी गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह सिर मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र की काशीराम नगर निवासी अंशू का हो सकता है, जिसकी गुमशुदगी पहले से दर्ज थी। अंशू के धड़ का अंतिम संस्कार मुरादाबाद में कर दिया गया था, पर सिर की पहचान और सौंपने के लिए डीएनए जांच आवश्यक थी।
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जीआरपी दरोगा 30 मई को युवती के पिता को लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे, वहां कई घंटे इंतजार के बाद बलरामपुर अस्पताल में सैंपल देने की अनुमति मिली। अस्पताल की इमरजेंसी में पिता का डीएनए सैंपल लिया गया। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह रहा कि 16 दिन तक डीएनए जांच शुरू नहीं हो सकी। इस दौरान सिर के अवशेष डिब्बे में बंद रहने के कारण सड़ गए और उनमें से दुर्गंध आने लगी।इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह ने बताया कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद युवती के सिर के अवशेष उसके माता-पिता को सौंपे जाएंगे।
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