{"_id":"6a39a2bc0e5de55a20059958","slug":"a-death-audit-will-now-be-conducted-for-every-death-caused-by-tb-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1795953-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: टीबी से होने वाली हर मौत का अब होगा डेथ ऑडिट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: टीबी से होने वाली हर मौत का अब होगा डेथ ऑडिट
विज्ञापन
टीबी से होने वाली हर मौत का अब होगा डेथ ऑडिट
लखनऊ। प्रदेश में टीबी उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने के लिए अब टीबी से होने वाली हर मौत की व्यवस्थित जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया को टीबी डेथ ऑडिट नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद उन कमियों को पहचानना है, जो समय पर इलाज में रुकावट बनती हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके सिंघल ने बताया कि यह प्रक्रिया मरीज को जांच, इलाज या रेफरल प्राप्त करने में आई परिस्थितियों को समझने में मदद करेगी। प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। नई व्यवस्था में इलाज शुरू होने से पहले या बाद में मौतों की समीक्षा होगी। इसमें सरकारी या निजी स्वास्थ्य संस्थान से जुड़े मामले शामिल हैं। घर, अस्पताल या रास्ते में हुई मौतें भी इसके दायरे में आएंगी।
डॉ. सिंघल ने बताया कि जानकारी दो स्तरों पर जुटाई जाएगी। परिवार और समुदाय से बातचीत करने के साथ अस्पतालों की सेवाओं का मूल्यांकन होगा। मृत्यु की सूचना मिलने के 24 घंटे में मामला निक्षय पोर्टल पर दर्ज होगा। जांच 21 दिन में पूरी की जाएगी।
विज्ञापन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह के अनुसार, टीबी डेथ ऑडिट से जांच, इलाज और रेफरल प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि निष्कर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, जिससे मरीजों की मृत्यु दर में कमी आए। जिला स्तर पर हर माह समीक्षा बैठक होगी। इसमें जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और विशेषज्ञ चिकित्सक भाग लेंगे।
विज्ञापन
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके सिंघल ने बताया कि यह प्रक्रिया मरीज को जांच, इलाज या रेफरल प्राप्त करने में आई परिस्थितियों को समझने में मदद करेगी। प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। नई व्यवस्था में इलाज शुरू होने से पहले या बाद में मौतों की समीक्षा होगी। इसमें सरकारी या निजी स्वास्थ्य संस्थान से जुड़े मामले शामिल हैं। घर, अस्पताल या रास्ते में हुई मौतें भी इसके दायरे में आएंगी।
विज्ञापन
डॉ. सिंघल ने बताया कि जानकारी दो स्तरों पर जुटाई जाएगी। परिवार और समुदाय से बातचीत करने के साथ अस्पतालों की सेवाओं का मूल्यांकन होगा। मृत्यु की सूचना मिलने के 24 घंटे में मामला निक्षय पोर्टल पर दर्ज होगा। जांच 21 दिन में पूरी की जाएगी।
विज्ञापन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह के अनुसार, टीबी डेथ ऑडिट से जांच, इलाज और रेफरल प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि निष्कर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, जिससे मरीजों की मृत्यु दर में कमी आए। जिला स्तर पर हर माह समीक्षा बैठक होगी। इसमें जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और विशेषज्ञ चिकित्सक भाग लेंगे।