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Lucknow News: सरकारी ब्लड बैंकों में ए और एबी पॉजिटिव ब्लड का संकट
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
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लखनऊ। केजीएमयू समेत तीन सरकारी ब्लड बैंकों में इन दिनों कई ब्लड ग्रुप का संकट बना हुआ है। ऐसे में तीमारदार खून के लिए एक से दूसरे अस्पताल दौड़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ए और एबी पॉजिटिव ग्रुप की मांग अधिक है, जबकि डोनेशन में यह ग्रुप कम मिल रहा है। इससे इस ग्रुप के ब्लड का संकट है।
केजीएमयू ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. तुलिका चंद्रा के मुताबिक, ए पॉजिटिव ब्लड बैंक की खपत अधिक है। हर दिन करीब 100 यूनिट की मांग आ रही है, जबकि डोनेशन में महज 50 यूनिट मिल पा रहा है। कमी देखते हुए बेहद जरूरतमंद मरीजों को ही इस ग्रुप का खून मुहैया कराया जा रहा है। बलरामपुर व सिविल अस्पताल के ब्लड बैंकों में भी यही स्थिति है। सिविल के सीएमएस डॉ. देवेश चंद्र पांडेय ने बताया कि ए पॉजिटिव का तीन यूनिट और एबी पॉजिटिव का नौ यूनिट ही बैंक में बचा है।
मिशनरी अस्पताल में भर्ती महिला रजनी देवी का सिजेरियन ऑपरेशन होना था। हीमोग्लोबिन कम होने पर डॉक्टर ने दो यूनिट एबी पॉजिटिव ब्लड की मांग की। तीमारदार सिविल अस्पताल गए, मगर वहां से वापस लौटा दिया गया। बलरामपुर अस्पताल में रिजर्व में रखा एक यूनिट खून दिया गया। बलरामपुर की निदेशक डॉ. कविता आर्या के मुताबिक, ए पॉजिटिव ग्रुप का चार और एबी पॉजिटिव का एक यूनिट खून रिजर्व में है। डोनेशन की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है ताकि सभी ग्रुप की उपलब्धता बनी रहे।
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ए पॉजिटिव रक्तदाताओं को बुलाएंगे
बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के डोनर की सूची अस्पताल के पास है। उन डोनरों को बुलाकर रक्तदान कराया जाएगा जिससे किसी भी ब्लड ग्रुप की कमी न रहे।
निजी में बिक रहा पांच से सात हजार रुपये यूनिट
निजी ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप का खून पांच से सात हजार रुपये में बेच रहे हैं। आरोप है यह खून बिना डोनर मुहैया कराया जा रहा है। इसके बाद भी एफएसडीए की टीम निजी ब्लड बैंकों की मनमानी पर रोक नहीं लगा पा रही है।
इस ग्रुप के होते हैं इतने प्रतिशत लोग
ओ पॉजिटिव - 35 से 48 प्रतिशत
बी पॉजिटिव - 30 प्रतिशत
ए पॉजिटिव - 15 प्रतिशत
एबी निगेटिव - 0.8 प्रतिशत
केजीएमयू ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. तुलिका चंद्रा के मुताबिक, ए पॉजिटिव ब्लड बैंक की खपत अधिक है। हर दिन करीब 100 यूनिट की मांग आ रही है, जबकि डोनेशन में महज 50 यूनिट मिल पा रहा है। कमी देखते हुए बेहद जरूरतमंद मरीजों को ही इस ग्रुप का खून मुहैया कराया जा रहा है। बलरामपुर व सिविल अस्पताल के ब्लड बैंकों में भी यही स्थिति है। सिविल के सीएमएस डॉ. देवेश चंद्र पांडेय ने बताया कि ए पॉजिटिव का तीन यूनिट और एबी पॉजिटिव का नौ यूनिट ही बैंक में बचा है।
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मिशनरी अस्पताल में भर्ती महिला रजनी देवी का सिजेरियन ऑपरेशन होना था। हीमोग्लोबिन कम होने पर डॉक्टर ने दो यूनिट एबी पॉजिटिव ब्लड की मांग की। तीमारदार सिविल अस्पताल गए, मगर वहां से वापस लौटा दिया गया। बलरामपुर अस्पताल में रिजर्व में रखा एक यूनिट खून दिया गया। बलरामपुर की निदेशक डॉ. कविता आर्या के मुताबिक, ए पॉजिटिव ग्रुप का चार और एबी पॉजिटिव का एक यूनिट खून रिजर्व में है। डोनेशन की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है ताकि सभी ग्रुप की उपलब्धता बनी रहे।
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ए पॉजिटिव रक्तदाताओं को बुलाएंगे
बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप के डोनर की सूची अस्पताल के पास है। उन डोनरों को बुलाकर रक्तदान कराया जाएगा जिससे किसी भी ब्लड ग्रुप की कमी न रहे।
निजी में बिक रहा पांच से सात हजार रुपये यूनिट
निजी ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप का खून पांच से सात हजार रुपये में बेच रहे हैं। आरोप है यह खून बिना डोनर मुहैया कराया जा रहा है। इसके बाद भी एफएसडीए की टीम निजी ब्लड बैंकों की मनमानी पर रोक नहीं लगा पा रही है।
इस ग्रुप के होते हैं इतने प्रतिशत लोग
ओ पॉजिटिव - 35 से 48 प्रतिशत
बी पॉजिटिव - 30 प्रतिशत
ए पॉजिटिव - 15 प्रतिशत
एबी निगेटिव - 0.8 प्रतिशत