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Lucknow News: बलरामपुर अस्पताल में महिला के पेट से निकाला 20 किलो का ट्यूमर
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बलरामपुर अस्पताल।
लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों ने एक महिला के पेट से 20 किलोग्राम वजन का ट्यूमर निकालने में सफलता हासिल की है। ट्यूमर की वजह से महिला की खाने की नली छोटी और बड़ी आंत के साथ ही अन्य दूसरे अंग बुरी तरह से दब रहे थे। ऑपरेशन के बाद अब महिला स्वस्थ है। दावा है कि अस्पताल में पहली बार इतना बड़ा ट्यूमर निकाला गया है।
डॉ. एसके सक्सेना ने बताया कि अयोध्या निवासी रामधीरज की पत्नी शैलेश कुमारी (45) को पेट में सूजन और दर्द के साथ ही भूख न लगने और कमजोरी की शिकायत थी। उन्होंने अयोध्या के साथ ही लखनऊ के कई अस्पतालों में दिखाया था। इसके बाद वे बलरामपुर अस्पताल आई थीं। महिला की सर्जरी जरूरी थी, लेकिन खून की कमी होने से सबसे पहले उसे खून चढ़ाया गया। इसके बाद मंगलवार को ऑपरेशन किया गया। करीब ढाई घंटे तक यह ऑपरेशन चला। ऑपरेशन में जेआर डॉ. श्रीनाथ के साथ ही नर्सिंग ऑफिसर उर्मिला और अंजना शामिल रहीं। ऑपरेशन पर बलरामपुर की निदेशक डॉ. कविता आर्या, सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी और एमएस डॉ. देवाशीष शुक्ला ने बधाई दी है।
टुकड़ों में निकालना पड़ा ट्यूमर
डॉ. सक्सेना ने बताया कि ट्यूमर का वजन काफी ज्यादा था। इसलिए कई टुकड़े करके उसे बाहर निकालना पड़ा। ट्यूटर द्रव्य और ठोस दोनों से बना था। इससे खाने की नली, छोटी व बड़ी आंत, शौच का रास्ता, पेशाब की थैली दबी हुई थी। इन सभी अंगों को बचाते हुए सावधानी से ट्यूमर बाहर निकाला गया।
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डॉ. एसके सक्सेना ने बताया कि अयोध्या निवासी रामधीरज की पत्नी शैलेश कुमारी (45) को पेट में सूजन और दर्द के साथ ही भूख न लगने और कमजोरी की शिकायत थी। उन्होंने अयोध्या के साथ ही लखनऊ के कई अस्पतालों में दिखाया था। इसके बाद वे बलरामपुर अस्पताल आई थीं। महिला की सर्जरी जरूरी थी, लेकिन खून की कमी होने से सबसे पहले उसे खून चढ़ाया गया। इसके बाद मंगलवार को ऑपरेशन किया गया। करीब ढाई घंटे तक यह ऑपरेशन चला। ऑपरेशन में जेआर डॉ. श्रीनाथ के साथ ही नर्सिंग ऑफिसर उर्मिला और अंजना शामिल रहीं। ऑपरेशन पर बलरामपुर की निदेशक डॉ. कविता आर्या, सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी और एमएस डॉ. देवाशीष शुक्ला ने बधाई दी है।
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टुकड़ों में निकालना पड़ा ट्यूमर
डॉ. सक्सेना ने बताया कि ट्यूमर का वजन काफी ज्यादा था। इसलिए कई टुकड़े करके उसे बाहर निकालना पड़ा। ट्यूटर द्रव्य और ठोस दोनों से बना था। इससे खाने की नली, छोटी व बड़ी आंत, शौच का रास्ता, पेशाब की थैली दबी हुई थी। इन सभी अंगों को बचाते हुए सावधानी से ट्यूमर बाहर निकाला गया।
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