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अलिखेश ने 22 महीने में किए 900 ट्रांसफर!
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 01 Feb 2014 10:15 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने भले ही आईएएस काडर के अफसरों की एक पद पर दो साल की तैनाती अवधि का प्रावधान कर दिया हो।
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लेकिन यूपी के अफसरों को फिलहाल तबादलों से मुक्ति नहीं मिलती दिख रही है। वहीं सियासी मेहरबानी के चलते कुछ अधिकारी अच्छी पोस्टिंग पाने में भी खूब सफल हो रहे हैं।
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अखिलेश सरकार के 22 महीने के कार्यकाल में आईएएस अफसरों के करीब नौ सौ तबादले किए जा चुके हैं। यानी हर महीने औसतन 40 से ज्यादा तबादले।
कलेक्टरों की औसत तैनाती अवधि महज छह से आठ महीने रह गई है। जबकि देश में तैनाती की औसत अवधि 9 महीने से ज्यादा है। प्रदेश में करीब 350 आईएएस अधिकारी हैं।
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तबादलों का आधार प्रशासनिक हो ऐसी मिसाल यहां खासी दुर्लभ है। राजनीतिक पहुंच और अन्य कारणों से कई अधिकारी अच्छी पोस्टिंग पा जाते हैं तो कुछ खराब।
कुछ अफसरों का तो हफ्तों या चंद दिनों में ही तबादला कर दिया जाता है। इसके पीछे वाजिब कारण नहीं बताया जाता।
आईएएस अफसरों के जल्दी तबादले होने का चलन पिछले पिछले 15-20 सालों में ज्यादा बढ़ा है।
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. ओमप्रकाश कहते हैं, जब से क्षेत्रीय दलों की सरकारें आई हैं, एक पद पर अफसरों की तैनाती अवधि घट गई है। पहले राजनीतिज्ञ ज्यादा परिपक्व होते थे। वे प्रशासनिक कामों में दखल नहीं देते थे।
अफसरों को काम करने का मौका देते थे, अब स्थितियां बदल गई हैं। अब तो सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं, नेताओं की शिकायत पर अफसर हटा दिए जाते हैं।