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नहीं रहे उर्दू के नामचीन शायर पद्मश्री काजी अब्दुल सतार
Updated Tue, 30 Oct 2018 12:19 AM IST
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सीतापुर। जिले के नामचीन शायर पद्मश्री काजी अब्दुल सत्तार नहीं रहे। उन्होंने रविवार रात दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे 85 वर्ष के थे और पिछले डेढ़ महीने से अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे। श्री सत्तार मूलत: जिले के मछरेहटा गांव के निवासी थे। उनका जन्म 8 फरवरी 1933 को मछरेहटा के प्रतिष्ठित जमींदार परिवार में हुआ था।
प्रारंभिक शिक्षा मछरेहटा में ही पूरी करने के बाद वे सीतापुर के राजा रघुवर दयाल इंटर कॉलेज आ गए, जहां से माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और उर्दू विषय में परास्नातक की शिक्षा गोल्ड मेडल के साथ हासिल की।
बाद में वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में तैनात हुए और वे सन् 1991 में विभागाध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त हुए। उनकी गिनती उर्दू के प्रकांड विद्वान होने के साथ ही दुनिया के उन महान विद्वानों में होती थी, जिन्होंने उर्दू में ऐतिहासिक पात्रों पर नॉवेल लिखने का काम किया। इसके अलावा उर्दू साहित्य में आलोचना विधा को उन्होंने एक नया आयाम दिया।
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प्रारंभिक शिक्षा मछरेहटा में ही पूरी करने के बाद वे सीतापुर के राजा रघुवर दयाल इंटर कॉलेज आ गए, जहां से माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और उर्दू विषय में परास्नातक की शिक्षा गोल्ड मेडल के साथ हासिल की।
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बाद में वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में तैनात हुए और वे सन् 1991 में विभागाध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त हुए। उनकी गिनती उर्दू के प्रकांड विद्वान होने के साथ ही दुनिया के उन महान विद्वानों में होती थी, जिन्होंने उर्दू में ऐतिहासिक पात्रों पर नॉवेल लिखने का काम किया। इसके अलावा उर्दू साहित्य में आलोचना विधा को उन्होंने एक नया आयाम दिया।
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