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Lucknow News: अनंत नगर योजना से 80 साल पुराना पीपल और 50 साल पुराना रबर का पेड़ शिफ्ट
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उर्मिला उपवन में क्रेन से पेड़ लगाया गया।
लखनऊ। एलडीए ने अनंत नगर योजना में लगा करीब 80 साल पुराने पीपल और करीब 50 साल पुराने रबर के पेड़ को काटने की जगह पेपर मिल कॉलोनी में उर्मिला वन में शिफ्ट कर दिया है।
एलडीए के वीसी प्रथमेश कुमार ने कहा ने बताया कि ग्रामीणों की पेड़ों के प्रति धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पेड़ों को शिफ्ट कराया गया। यह दोबारा मजबूती पकड़ सकें, इसके लिए एलडीए ने पूरी वैज्ञानिक पद्धति का पालन किया। विशेषज्ञों की देखरेख में मिट्टी के उपचार से लेकर जड़ों को सुरक्षित तरीके से रोपने तक की प्रक्रिया पूरी की गई, ताकि पेड़ नए माहौल में आसानी से पनप सकें। वीसी ने बताया कि पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना कठिन था। अनंत नगर से उर्मिला वन तक की दूरी करीब 28 किलोमीटर है। एलडीए की टीम ने इसके लिए कई बड़ी और अत्याधुनिक क्रेनों की मदद ली।
तीन महीने चली शिफ्टिंग की प्रक्रिया
पेड़ को शिफ्ट करने वाली टीम की अगुवाई करने वाले एलडीए के उद्यान अधीक्षक करन ने बताया कि पेड़ को शिफ्ट करने की पूरी प्रकिया में तीन महीने लगे। सबसे पहले पेड़ की छंटाई की गई। छंटाई वाली डालों में दीमक न लगे, इसके लिए विशेष लेप लगाए गए। उसके बाद पेड़ के दो मीटर के दायरे में एक-एक मीटर गहराई में खोदाई जड़ों की छंटाई के लिए की गई। यह प्रक्रिया तीन बार की गई। जब जड़ों को काटा जाता था तो वहां दीमक से बचाव के लिए विशेप लेप लगाया जाता और पत्तियों से ढंका जाता था। पूरी प्रकिया के बाद 50-50 टन वजन उठने वाले दो क्रेन मंगाई गई। इनके जरिये पेड़ों को बड़े ट्रेलर पर रखकर उर्मिल वन तक ले जाया गया। इसके बाद यहां शुक्रवार को पेड़ को लगाया गया। पेड़ करीब 100 फीट ऊंचाई के थे।
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एलडीए के वीसी प्रथमेश कुमार ने कहा ने बताया कि ग्रामीणों की पेड़ों के प्रति धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पेड़ों को शिफ्ट कराया गया। यह दोबारा मजबूती पकड़ सकें, इसके लिए एलडीए ने पूरी वैज्ञानिक पद्धति का पालन किया। विशेषज्ञों की देखरेख में मिट्टी के उपचार से लेकर जड़ों को सुरक्षित तरीके से रोपने तक की प्रक्रिया पूरी की गई, ताकि पेड़ नए माहौल में आसानी से पनप सकें। वीसी ने बताया कि पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना कठिन था। अनंत नगर से उर्मिला वन तक की दूरी करीब 28 किलोमीटर है। एलडीए की टीम ने इसके लिए कई बड़ी और अत्याधुनिक क्रेनों की मदद ली।
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तीन महीने चली शिफ्टिंग की प्रक्रिया
पेड़ को शिफ्ट करने वाली टीम की अगुवाई करने वाले एलडीए के उद्यान अधीक्षक करन ने बताया कि पेड़ को शिफ्ट करने की पूरी प्रकिया में तीन महीने लगे। सबसे पहले पेड़ की छंटाई की गई। छंटाई वाली डालों में दीमक न लगे, इसके लिए विशेष लेप लगाए गए। उसके बाद पेड़ के दो मीटर के दायरे में एक-एक मीटर गहराई में खोदाई जड़ों की छंटाई के लिए की गई। यह प्रक्रिया तीन बार की गई। जब जड़ों को काटा जाता था तो वहां दीमक से बचाव के लिए विशेप लेप लगाया जाता और पत्तियों से ढंका जाता था। पूरी प्रकिया के बाद 50-50 टन वजन उठने वाले दो क्रेन मंगाई गई। इनके जरिये पेड़ों को बड़े ट्रेलर पर रखकर उर्मिल वन तक ले जाया गया। इसके बाद यहां शुक्रवार को पेड़ को लगाया गया। पेड़ करीब 100 फीट ऊंचाई के थे।
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