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संगीत नाटक अकादमी अवार्ड मिलेंगे नवंबर में

Fri, 10 Oct 2014 10:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 10 Oct 2014 10:50 AM IST
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67 artist get music drama award.

लंबे समय से लटके संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों की घोषणा हो गई है। फिलहाल 2003 से 2008 के पुरस्कार घोषित किए गए हैं। पुरस्कार पाने वाले 67 लोगों को नवंबर में होने वाले स्वर्ण जयंती समारोह में अलंकृत किया जाएगा।

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इसके अलावा 12 कलाकारों को रत्न सदस्यता दी गई है जिसमें मुद्राराक्षस, छन्नू लाल मिश्र, हरिप्रसाद चौरसिया, राजन-साजन, अनूप जलोटा सरीखे नाम शामिल हैं।

उल्लेखनीय है, एसएनए में अंतिम बार वर्ष 2002 में इन पुरस्कारों का वितरण हुआ था। गुरुवार को प्रेसवार्ता आयोजित कर अकादमी अध्यक्ष नवेद सिद्दीकी व सचिव वीणा विद्यार्थी ने पुरस्कारों की लिस्ट जारी की।

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लखनऊ के कई बड़े कलाकार होंगे सम्मानित

67 artist get music drama award.

लखनऊ से मालिनी अवस्थी, अभिनेता जुगल किशोर व अनिल रस्तोगी व लेखक अतुल तिवारी सरीखे बड़े नाम शामिल हैं। छह वर्षों के पुरस्कार नवंबर में अकादमी की स्वर्णजयंती पर होने वाले कार्यक्रम में बांटे जाएंगे।

कुल 115 आवेदन आए थे, जिसमें से 67 को पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। इसके अलावा प्रतिवर्ष दो रत्न सदस्य के अनुसार 12 कलाकारों को रत्न सदस्यता दी गई है।

अकादमी पुरस्कार पाने वालों को दस हजार एक रुपये की धनराशि के साथ अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न दिए जाएंगे।

वहीं रत्न सदस्यता पाने वाले कलाकारों को सिर्फ स्मृति चिह्न व अंगवस्त्र मिलेगा। संगीत नाटक उपसमिति, कार्यकारिणी और परिषद में शामिल विद्वानों व सदस्यों ने अपनी सूची में सभी विधाओं के वरिष्ठकलाकारों को सम्मानित करने का प्रयास किया गया है।

अकादमी पुरस्कार में कई नियम हुए दरकिनार

67 artist get music drama award.

अकादमी पुरस्कार के लिए नियम यह है कि कलाकार प्रदेश में जन्मा हो अथवा जिस वर्ष के लिए उसे अवार्ड दिया जा रहा है, उससे दस वर्ष पूर्व तक कला की सेवा की हो।


मसलन, वर्ष 2004 के लिए पुरस्कृत होने वाला कलाकार 1994 तक कला की सेवा करता रहा हो। ऐसे ही नियम है कि प्रतिवर्ष सिर्फ 11 कलाकारों को ही अकादमी अवार्ड दिए जाएंगे, लेकिन वर्ष 2008 के लिए 12 कलाकारों के नामों की घोषणा की गई है।

पुरस्कारों के चयन के दौरान नियमों की अनदेखी की ये सिर्फ बानगी भर ही हैं। ऐसी तमाम खामियां उजागर हुई हैं, जिन्हें लेकर शहर के वरिष्ठ कलाकारों में रोष व्याप्त है।

कथक गुरू पं. अर्जुन मिश्र नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि आगरा की काजल शर्मा को वर्ष 2004 के अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।

लेकिन खास बात यह है कि काजल पिछले करीब 30 वर्षों से अपने पति के साथ लंदन में रह रही हैं। उन्होंने प्रदेश में कथक के लिए कुछ नहीं किया। ऐसे में उन्हे पुरस्कार कैसे मिल रहा है?

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इस सूची से नाखुश हैं कलाकार

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दूसरे, कथक के नाम पर ऐसे कलाकारों को अवार्ड से नवाजा जा रहा है, जिनका काम फील्ड पर नजर ही नहीं आता। मसलन, कथक केंद्र की रेनू श्रीवास्तव, पूनम निगम, कमलाकांत, दिनेश प्रसाद और राजीव शुक्ला।

इतना ही नहीं राजवी शुक्ला को पुरस्कृत किया गया, जबकि उनके गुरू व कथकाचार्य रामेश्वर प्रसाद को नजरअंदाज किया गया।

वहीं शास्त्रीय संगीत की विधा में छह वर्षों में महज दो कलाकारों वाराणसी के चितरंजन ज्योतिषी व कानपुर के अफजाल हुसैन को अवार्ड दिया जा रहा है।

वरिष्ठ पखावज वादक डॉ. राज खुशी राम कहते हैं कि अकादमी पुरस्कार रेवड़ी की तरह कलाकारों में बांटे गए हैं। डिजर्विंग लोगों को हाशिए पर रखा गया है।

बताया कि नियम है कि प्रतिवर्ष सिर्फ 11 कलाकारों को ही अकादमी पुरस्कार से नवाजा जाएगा। लेकिन वर्ष 2008 के लिए 12 कलाकारों का चयन किया गया। सवाल उठाते हैं कि ऐसा किस मजबूरी के कारण किया गया।

हालांकि, अध्यक्ष नवेद सिद्दीकी कहते हैं कि सामान्य परिषद को सदस्यों की संख्या बढ़ाने व घटाने का अधिकार है। चूंकि, चंदौली के मंगल यादव कवि वरिष्ठ कलाकार हैं, इसलिए उनका नाम बढ़ाया गया है।

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