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Scam: यूपी में 200 करोड़ की जमीन खरीदने में फंसे जीएसटी के 50 अधिकारी, कोरोना काल में किया बड़ा गोलमाल

Sat, 04 Oct 2025 06:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 04 Oct 2025 06:22 AM IST
सार

शुरुआती जांच में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की नामी-बेनामी जमीन खरीदने के दस्तावेज मिले हैं। अधिकांश रकम मोहनलालगंज में एक चर्चित बिल्डर के जरिये खपाई गई है। अभी तक 11 अधिकारियों के नाम करोड़ों की जमीन का खुलासा हो चुका है।

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50 GST officials trapped in UP land purchase worth Rs 200 crore
demo - फोटो : FREEPIK

विस्तार

यूपी में स्टेट जीएसटी के करीब 50 अफसर अरबों की जमीन खरीदने में फंस गए हैं। शुरुआती जांच में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की नामी-बेनामी जमीन खरीदने के दस्तावेज मिले हैं। अधिकांश रकम मोहनलालगंज में एक चर्चित बिल्डर के जरिये खपाई गई है। अभी तक 11 अधिकारियों के नाम करोड़ों की जमीन का खुलासा हो चुका है।

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अवध के एक जिले के बिल्डर के जरिये अधिकारियों द्वारा करोड़ों रुपये की जमीन खरीद का मामला शासन तक पहुंचा था। रकम मोहनलालगंज तहसील की जमीनों में खपाई गई। प्राथमिक जांच में शिकायतें सही मिलने पर रजिस्ट्री आफिस से पंजीकरण प्रपत्रों की कॉपी लेकर जांच के आदेश दिए गए। 
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सचल दल और एसआईबी में रह चुके हैं रकम खपाने वाले अफसर : जांच में पता चला है कि बिल्डर के प्रोजेक्ट में पैसा लगाने वाले अधिकारी सचल दल और एसआईबी (विशेष जांच विंग) में तैनात हैं या पहले रह चुके हैं। इनमें अधिकांश अफसर गाजियाबाद, आगरा, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मुरादाबाद, मेरठ, गौतमबुद्धनगर जैसे जिलों में मलाईदार पदों पर थे। अभी तक जिनके नाम जमीन के कागज मिल चुके हैं, उनकी तैनाती  सहारनपुर, लखनऊ, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, कानपुर सहित 10 जिलों में है। ये अफसर सहायक आयुक्त, उपायुक्त, संयुक्त आयुक्त और अपर आयुक्त स्तर के हैं। 
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कोरोना काल बना कुबेर काल
विभागीय सूत्रों के मुताबिक कोरोना काल विभागीय अफसरों के लिए कुबेर काल साबित हुआ। वर्ष 2020 से पहले से जो अधिकारी जहां तैनात थे, उनका ट्रांसफर तीन वर्ष तक नहीं हुआ। बड़ी संख्या में ऐसे भी अफसर थे जो पांच साल तक एक ही जगह पर रहे। सूत्रों के मुताबिक तीन से पांच वर्ष के इस कार्यकाल में इतना पैसा आया कि उसे खपाना मुश्किल हो गया।

  • यही कारण था कि बिल्डर के जरिये इस रकम को मोहनलाल गंज और सुल्तानपुर रोड में जमीन में निवेश के लिए दिया गया। बताया जा रहा है कि ये बिल्डर विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी का करीबी रिश्तेदार है। उसी अधिकारी के जरिये उसने विभाग में पैठ बनाई और नंबर दो की रकम खपाने का खुला आफर दिया।
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