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Lucknow News: लखनऊ के 47 वर्षीय रूप किशोर ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, विश्व योगासन चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण
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लखनऊ। अगर कुछ कर गुजरने की लगन हो तो उम्र महज एक नंबर बनकर रह जाती है। यह कहावत लखनऊ के 47 वर्षीय रूप किशोर ने चरितार्थ कर दिखाई। उन्होंने अहमदाबाद में चल रही पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप की 45-55 आयुवर्ग की स्पर्धा में प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता।
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में हेड कांस्टेबल पद पर तैनात रूप किशोर ने चैंपियनशिप की सुपाइन इंडिविजुअल वर्ग में 38.84 अंक अर्जित करते यह सफलता हासिल की। स्पर्धा में नेपाल के नर्मराज (35.65 अंक) ने रजत और उज्बेकिस्तान के कमोलातदीन रखमानोव (35.69 अंक) ने कांस्य पदक जीता। 37 साल की उम्र में शौकिया तौर पर योग करने वाले रूप किशोर ने कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। वर्ष 2017 में ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में रजत जीतने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा राष्ट्रीय स्तर पर पदकों की झड़ी लगा दी। कोरोना संक्रमण काल के बाद रूप किशोर ने योगासन की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चार स्वर्ण जीतकर विश्व चैंपियनशिप के लिए अपनी दावेदारी मजबूत की। इस कड़ी में उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में दमखम दिखाया और दुनिया के चुनिंदा खिलाड़ियों के बीच स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
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वर्दी को पहनने से मुझे अनुशासन मिला है और योग ने मुझे धैर्य सिखाया है। इन दोनों ने मिलकर ही मुझे आज इस मुकाम पर पहुंचाया है। दस वर्ष पहले मैंने रामदेव से प्रभावित होकर शौकिया तौर पर योग करना शुरू किया। इसके बाद मैंने लखनऊ में योग गुरु मालविका वाजपेयी से योग की विधिवत ट्रेनिंग लेनी शुरू की। विश्व चैंपियनशिप में मिले स्वर्ण पदक में उनका अहम योगदान रहा। अगर योग को बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल मंच (ओलंपिक, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेल) में शामिल किया जाता है तो वहां देश के लिए पदक जीतना मेरा लक्ष्य होगा।
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- रूप किशोर
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सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में हेड कांस्टेबल पद पर तैनात रूप किशोर ने चैंपियनशिप की सुपाइन इंडिविजुअल वर्ग में 38.84 अंक अर्जित करते यह सफलता हासिल की। स्पर्धा में नेपाल के नर्मराज (35.65 अंक) ने रजत और उज्बेकिस्तान के कमोलातदीन रखमानोव (35.69 अंक) ने कांस्य पदक जीता। 37 साल की उम्र में शौकिया तौर पर योग करने वाले रूप किशोर ने कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। वर्ष 2017 में ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में रजत जीतने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा राष्ट्रीय स्तर पर पदकों की झड़ी लगा दी। कोरोना संक्रमण काल के बाद रूप किशोर ने योगासन की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चार स्वर्ण जीतकर विश्व चैंपियनशिप के लिए अपनी दावेदारी मजबूत की। इस कड़ी में उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में दमखम दिखाया और दुनिया के चुनिंदा खिलाड़ियों के बीच स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
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वर्दी को पहनने से मुझे अनुशासन मिला है और योग ने मुझे धैर्य सिखाया है। इन दोनों ने मिलकर ही मुझे आज इस मुकाम पर पहुंचाया है। दस वर्ष पहले मैंने रामदेव से प्रभावित होकर शौकिया तौर पर योग करना शुरू किया। इसके बाद मैंने लखनऊ में योग गुरु मालविका वाजपेयी से योग की विधिवत ट्रेनिंग लेनी शुरू की। विश्व चैंपियनशिप में मिले स्वर्ण पदक में उनका अहम योगदान रहा। अगर योग को बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल मंच (ओलंपिक, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेल) में शामिल किया जाता है तो वहां देश के लिए पदक जीतना मेरा लक्ष्य होगा।
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- रूप किशोर