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'नेताओं ने नहीं की थी 'ढांचे' को बचाने की कोशिश'
टीम डिजिटल/रायबरेली
Updated Sun, 01 Dec 2013 08:41 AM IST
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छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुए विवादित ढांचा विध्वंस मामले में शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय स्थित विशेष कोर्ट में सुनवाई हुई।
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अभियोजन पक्ष के 45वें गवाह पत्रकार देवाशीष मुखर्जी की मुख्य परीक्षा पूरी होने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जिरह शुरू की, जो पूरी नहीं हो सकी।
देवाशीष ने बताया कि छह दिसंबर 1992 को घटना स्थल पर मौजूद नेताओं ने ढांचे को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। विशेष मजिस्ट्रेट गोपाल तिवारी ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख सात दिसंबर तय कर दी।
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वीक मैगजीन में करते थे काम
सुनवाई शुरू होने पर अभियोजन पक्ष सीबीआई ने 45वें गवाह के रूप में नई दिल्ली निवासी पत्रकार देवाशीष मुखर्जी को पेश किया। देवाशीष ने अपनी मुख्य परीक्षा (इग्जामिनेशन इन चीफ) में बताया कि वह 1992 में वीक मैगजीन में संवाददाता के रूप में लखनऊ में तैनात थे।
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छह दिसंबर, 1992 की घटना को कवर करने के लिए उन्हें संपादक ने अयोध्या भेजा था। देवाशीष ने बताया कि उनके साथ दिल्ली कार्यालय से एक अन्य पत्रकार आर. प्रसन्नन और फोटोग्राफर पी. मुस्तफा भेजे गए थे।
उनका और प्रसन्नन का लिखा लेख पत्रिका के 20 दिसंबर,1992 के अंक में 'डिमॉलिशन डायरी' शीर्षक से प्रकाशित हुआ था। इसी में उप शीर्षक 'वन फॉर हनुमान' लेख उन्होंने खुद लिखा था।
पूरी हो गई जिरह
देवाशीष ने कहा कि घटना स्थल पर जो भी नेता मौजूद थे, उनमें से किसी ने भी विवादित ढांचे को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। मामले में आरोपी एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, अशोक सिंघल, विष्णुहरि डालमिया, आचार्य गिरिराज किशोर की ओर से अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव ने जिरह शुरू की, जो पूरी हो गई।
गवाह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वह यह नहीं बता सकता कि उस दिन जो लाखों की भीड़ अंदर गई थी, उनकी चेकिंग की गई थी कि नहीं।
मामले में अन्य आरोपियों उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा के अधिवक्ता को जिरह करने के लिए सात दिसंबर की तिथि तय कर दी गई। इस मौके पर सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक पी. चक्रवर्ती, अधिवक्ता एमएम हक मौजूद रहे।