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डिस्चार्ज होने का बड़ा ग्राफ, मिलेगी राहत
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कोरोना का कहर।
- फोटो : ??? ?????
कोरोना की दूसरी लहर के भयावह आंकड़ों के बीच राहत भरी खबर है। रविवार को 5551 मरीज मिले तो 2348 कोरोना को मात देकर घर गए।
मिले मरीजों के मुकाबले 42.29 फीसदी का डिस्चार्ज होना एक उम्मीद जगाता है। चिकित्सा विशेषज्ञ भी इसे राहत की उम्मीद के रूप में ही देख रहे हैं। यानी जंग अभी बड़ी है।
उनका कहना है कि कुल मिलने वाले मरीजों की अपेक्षा डिस्चार्ज होने का ग्राफ 50 फीसदी तक पहुंच गया तो गंभीर मरीजों को अस्पतालों में बेड मिलने लगेंगे। बहरहाल रविवार को 22 मरीजों की मौत हो गई। वहीं एक्टिव केस 44700 हैं। शनिवार को 36 मरीजों की मौत हुई थी।
राजधानी में लगातार बेड़ों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के सामने यह नाकाफी साबित हो रहे हैं।
कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 5000 से अधिक होने के सप्ताह भर बाद डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ भी बढ़ने लगा है।
रविवार को कोरोना से जंग जीतकर घर जाने वालों की संख्या अप्रैल में सबसे ज्यादा है। कुल मिलने वाले मरीजों की अपेक्षा डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ देखा जाए तो 12 अप्रैल को कुल मिले मरीजों की अपेक्षा 24 फीसदी लोग डिस्चार्ज हुए थे। जो 18 अप्रैल को बढ़कर 42.29 तक पहुंच गया है।
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आंकड़े जो उम्मीद जगाते हैं
अप्रैल मरीज ठीक होकर घर गए
12 3892 958
13 5382 1086
14 5433 1118
15 5183 973
16 6598 1675
17 5913 2176
18 5551 2348
...तो गंभीर मरीजों को मिलने लगेंगे बेड
लोहिया संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजीव रतन सिंह कहते हैं कि डिस्चार्ज मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है। सरकार की ओर से बेड बनाने का प्रयास किया जा रहा है और डिस्चार्ज होने वालों का भी ग्राफ बढ़ रहा है। इससे नए मरीजों की भर्ती में सहूलियत होगी। क्योंकि प्रतिदिन वायरस की चपेट में आने वालों में करीब 25 फीसदी गंभीर मरीज होते हैं। ऐसे में डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ बढ़ता रहा तो गंभीर मरीजों को बेड मिलने लगेंगे।
निरंतर डिस्चार्ज का ग्राफ बढ़ने की उम्मीद
केजीएमयू के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि डिस्चार्ज मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होने की उम्मीद है। क्योंकि सप्ताहभर में तेजी से मरीजों की संख्या बढ़ी है। इन्हें अस्पताल में रखकर उपचार किए जाने से हालत में सुधार हुआ है। आमतौर पर देखा गया है कि सप्ताहभर बाद मरीज डिस्चार्ज होने की स्थिति में आ जाते हैं। डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ बढ़ना सकारात्मक संकेत है।
नई गाइडलाइन का भी मिल रहा है फायदा
अभी तक संक्रमितों को 10 से 14 तक अस्पताल में रखा जा रहा था। लेकिन कुछ दिनों से चिकित्सा विशेषज्ञ मरीजों की स्थिति के अनुसार सप्ताहभर बाद ही उन्हें डिस्चार्ज करना शुरू कर दिए थे। अब शासन की ओर से यह गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है कि लक्षण खत्म होते ही संबंधित मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाए। ऐसे में उम्मीद है कि इस सप्ताह डिस्चार्ज होने का ग्राफ और तेज हो जाएगा।
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मिले मरीजों के मुकाबले 42.29 फीसदी का डिस्चार्ज होना एक उम्मीद जगाता है। चिकित्सा विशेषज्ञ भी इसे राहत की उम्मीद के रूप में ही देख रहे हैं। यानी जंग अभी बड़ी है।
उनका कहना है कि कुल मिलने वाले मरीजों की अपेक्षा डिस्चार्ज होने का ग्राफ 50 फीसदी तक पहुंच गया तो गंभीर मरीजों को अस्पतालों में बेड मिलने लगेंगे। बहरहाल रविवार को 22 मरीजों की मौत हो गई। वहीं एक्टिव केस 44700 हैं। शनिवार को 36 मरीजों की मौत हुई थी।
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राजधानी में लगातार बेड़ों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के सामने यह नाकाफी साबित हो रहे हैं।
कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 5000 से अधिक होने के सप्ताह भर बाद डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ भी बढ़ने लगा है।
रविवार को कोरोना से जंग जीतकर घर जाने वालों की संख्या अप्रैल में सबसे ज्यादा है। कुल मिलने वाले मरीजों की अपेक्षा डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ देखा जाए तो 12 अप्रैल को कुल मिले मरीजों की अपेक्षा 24 फीसदी लोग डिस्चार्ज हुए थे। जो 18 अप्रैल को बढ़कर 42.29 तक पहुंच गया है।
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आंकड़े जो उम्मीद जगाते हैं
अप्रैल मरीज ठीक होकर घर गए
12 3892 958
13 5382 1086
14 5433 1118
15 5183 973
16 6598 1675
17 5913 2176
18 5551 2348
...तो गंभीर मरीजों को मिलने लगेंगे बेड
लोहिया संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजीव रतन सिंह कहते हैं कि डिस्चार्ज मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है। सरकार की ओर से बेड बनाने का प्रयास किया जा रहा है और डिस्चार्ज होने वालों का भी ग्राफ बढ़ रहा है। इससे नए मरीजों की भर्ती में सहूलियत होगी। क्योंकि प्रतिदिन वायरस की चपेट में आने वालों में करीब 25 फीसदी गंभीर मरीज होते हैं। ऐसे में डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ बढ़ता रहा तो गंभीर मरीजों को बेड मिलने लगेंगे।
निरंतर डिस्चार्ज का ग्राफ बढ़ने की उम्मीद
केजीएमयू के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि डिस्चार्ज मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होने की उम्मीद है। क्योंकि सप्ताहभर में तेजी से मरीजों की संख्या बढ़ी है। इन्हें अस्पताल में रखकर उपचार किए जाने से हालत में सुधार हुआ है। आमतौर पर देखा गया है कि सप्ताहभर बाद मरीज डिस्चार्ज होने की स्थिति में आ जाते हैं। डिस्चार्ज होने वालों का ग्राफ बढ़ना सकारात्मक संकेत है।
नई गाइडलाइन का भी मिल रहा है फायदा
अभी तक संक्रमितों को 10 से 14 तक अस्पताल में रखा जा रहा था। लेकिन कुछ दिनों से चिकित्सा विशेषज्ञ मरीजों की स्थिति के अनुसार सप्ताहभर बाद ही उन्हें डिस्चार्ज करना शुरू कर दिए थे। अब शासन की ओर से यह गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है कि लक्षण खत्म होते ही संबंधित मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाए। ऐसे में उम्मीद है कि इस सप्ताह डिस्चार्ज होने का ग्राफ और तेज हो जाएगा।