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दो घंटे कांबिंग, नहीं मिले पग चिह्न
Updated Thu, 12 Apr 2018 11:04 PM IST
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बहराइच। गोलागंज मुंशीपुरवा गांव निवासी एक युवक पर बुधवार को तेंदुए के हमले का पता चला था। इस मामले में गुरुवार को वन क्षेत्राधिकारी की अगुवाई में टीम गांव पहुंची। क्षेत्र को खंगाला गया, लेकिन तेंदुए के पद चिह्न नहीं मिले। रेंजर व वन दरोगा के मुताबिक लकड़बग्घा या अन्य वन्यजीव हो सकता है।
बहराइच वन प्रभाग के महसी रेंज अंतर्गत गोलागंज मुंशीपुरवा गांव निवासी 14 वर्षीय अंकित बुधवार शाम को खेत में बरसीम काट रहा था। तभी झाड़ियों से निकलकर एक जीव ने उस पर हमला कर दिया। अंकित के शोर मचाने पर लोग दौड़े। इस पर वन्य जीव पुन: झाड़ियों में घुस गया।
अंकित के मुताबिक तेंदुए ने हमला किया था, जिससे उसे चोटें भी आई हैं। प्रमुखता से खबर प्रकाशन के बाद गुरुवार दोपहर बाद वन क्षेत्राधिकारी एम नदीम खान और वन दरोगा जहीर खान टीम के साथ गांव पहुंचे।
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रेंजर व वन दरोगा ने बताया कि लगभग दो घंटे तक ग्रामीणों के साथ कांबिंग की गई, लेकिन तेंदुए के पद चिह्न नहीं मिले। दोनों अधिकारियों ने कहा कि सियार या लकड़बग्घा होने की संभावना अधिक है। लकड़बग्घा पांच साल बाद पागल हो जाता है। फिलहाल, क्षेत्र में निगरानी की जा रही है।
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बहराइच वन प्रभाग के महसी रेंज अंतर्गत गोलागंज मुंशीपुरवा गांव निवासी 14 वर्षीय अंकित बुधवार शाम को खेत में बरसीम काट रहा था। तभी झाड़ियों से निकलकर एक जीव ने उस पर हमला कर दिया। अंकित के शोर मचाने पर लोग दौड़े। इस पर वन्य जीव पुन: झाड़ियों में घुस गया।
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अंकित के मुताबिक तेंदुए ने हमला किया था, जिससे उसे चोटें भी आई हैं। प्रमुखता से खबर प्रकाशन के बाद गुरुवार दोपहर बाद वन क्षेत्राधिकारी एम नदीम खान और वन दरोगा जहीर खान टीम के साथ गांव पहुंचे।
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रेंजर व वन दरोगा ने बताया कि लगभग दो घंटे तक ग्रामीणों के साथ कांबिंग की गई, लेकिन तेंदुए के पद चिह्न नहीं मिले। दोनों अधिकारियों ने कहा कि सियार या लकड़बग्घा होने की संभावना अधिक है। लकड़बग्घा पांच साल बाद पागल हो जाता है। फिलहाल, क्षेत्र में निगरानी की जा रही है।