चंद मिनटों में दहल गया था यूपी, 15 की हुई थी मौत
लखनऊ के साथ दो प्रमुख धार्मिक नगरों फैजाबाद और वाराणसी में 23 नवंबर 2007 को 25 मिनट के अंतराल में सीरियल ब्लास्ट से यूपी दहल गया था। इन विस्फोटों से तीनों जगह पर कुल 15 लोगों की मौत हुई थी जबकि 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
एसटीएफ और अंत में एटीएस ने जांच की इस मामले में जांच एजेंसियों ने कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया। जिन्हें इस मामले दबोचा गया, उन सभी को इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) व हूजी का सदस्य बताया गया था। गिरफ्तार होने वालों में तारिक कासमी, खालिद मुजाहिद, सज्जादुर्रहमान और तारिक कश्मीरी थे।
एसटीएफ ने इस मामले में आजमगढ़ के संजरपुर निवासी यूनानी डाक्टर तारिक कासमी और जौनपुर निवासी मदरसे के अध्यापक खालिद मुजाहिद को मुख्य आरोपी बताया। सज्जादुर्रहमान को सबसे पहले छोड़ दिया गया था।
पहला विस्फोट वाराणसी कचहरी में
दोपहर 1.05 बजे से 1.07 बजे तक ताबड़तोड़ दो विस्फोट हुए। कचहरी में खचाखच भीड़ थी। रोजाना की तरह वकील, वादी और स्टांप वेंङर अपने-अपने कार्यों में व्यस्त थे। दोनों विस्फोटों में 11 लोगों की मौत हुई थी जबकि 42 से अधिक घायल हो गए थे।
फैजाबाद कचहरी ब्लास्ट
दोपहर 1.12 बजे से 1.15 बजे के विस्फोट हुए। यहां चार की मौत हुई थी जबकि 15 से अधिक घायल हुए थे। फैजाबाद ब्लास्ट वाराणसी विस्फोटों से कम तीव्रता वाले बताए गए थे। लेकिन विस्फोट में धमाका और धुआं जबर्दस्त हुआ था।
टिफिन बम से लखनऊ कचहरी में हुआ धमाका
लखनऊ कचहरी में एक बजकर 32 मिनट पर धमाका हुआ। यहां साइकिल स्टैंड पर लावारिस खड़ी एक साइकिल के स्टैंड से लटके थैले में रखा गया एक टिफिन बम भी बरामद हुआ था। इसे फोरेंसिक विशेषज्ञों के हवाले कर दिया गया था।
विस्फोट से पांच मिनट पहले मेल कर ली थी जिम्मेदारी
आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) ने इन विस्फोटों से पांच मिनट पहले ही कुछ समाचार चैनलों को मेल भेज कर विस्फोट कराने की जिम्मेदारी ली थी।
आईएम ने अपने मेल में इस कार्रवाई को अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही कार्रवाई, बाबरी मस्जिद के विध्वंस व गुजरात दंगों के खिलाफ संगठन का जवाब बताया था।