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UP News: डिफेंस कॉरिडोर में 30 हजार करोड़ के 170 एमओयू हुए, 50 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना
Fri, 09 May 2025 10:52 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Fri, 09 May 2025 10:52 PM IST
सार
पाकिस्तान के साथ मौजूदा संबंधों को देखते हुए भारत अपनी हर आवश्यक रक्षा जरूरतों को पूरा कर रहा है। निकट भविष्य में भारत की इन सभी जरूरतों को पूरा करने में उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। यूपी में डिफेंस कॉरिडोर में 30 हजार करोड़ के 170 एमओयू किए गए हैं।
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सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश में सीएम योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर न सिर्फ रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, बल्कि प्रदेश में रोजगार सृजन का भी मजबूत आधार तैयार कर रहा है। इस कॉरिडोर के तहत अब तक 170 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के माध्यम से करीब 30 हजार करोड़ रुपये का अनुमानित निवेश आकर्षित किया गया है। इससे लगभग 50 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
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यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत अब तक 57 निवेशकों को भूमि पट्टे पर आवंटित की गई है, जो अपनी उत्पादन इकाइयों को स्थापित करने के विभिन्न चरणों में हैं। इन इकाइयों के माध्यम से 9462.8 करोड़ रुपए का निवेश जमीनी स्तर पर साकार हो चुका है, जिससे 13,736 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। उल्लेखनीय है कि पहला पट्टा जून 2021 में निष्पादित किया गया था और मात्र चार वर्षों से कम समय में 57 उद्योग इस कॉरिडोर में अपनी सुविधाएं विकसित कर रहे हैं।
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आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार बन रहा डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहा है, बल्कि भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। कॉरिडोर में स्थापित होने वाली इकाइयां भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक उपकरण और हथियारों का निर्माण करेंगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।योगी सरकार का लक्ष्य कॉरिडोर के सभी नोड्स में निवेश और रोजगार के अवसरों को और विस्तार देना है। इसके अलावा, आगरा और चित्रकूट नोड्स में भी जल्द ही भूमि आवंटन और उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज की जाएगी। यह कॉरिडोर न केवल प्रदेश को औद्योगिक हब के रूप में स्थापित कर रहा है, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोल रहा है। यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में भी एक ठोस कदम है।
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