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Lucknow News: केजीएमयू में एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर 16 लाख ठगे
Sun, 31 Dec 2023 12:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 31 Dec 2023 12:27 AM IST
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लखनऊ। एमबीबीएस में बेटी का दाखिला कराने के नाम पर जालसाजों ने हरियाणा के एक व्यक्ति को 16 लाख रुपये का चूना लगा दिया। आरोपियों ने केजीएमयू के ही न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के भीतर एक कर्मचारी को काउंसिलिंग कमेटी का हेड बनाकर पीड़ित से मिलवाया। फिर रकम लेकर सीट अलॉटमेंट का फर्जी लेटर थमा दिया। एसीपी के आदेश पर चौक कोतवाली में दो नामजद व कुछ अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
हरियाणा के झज्जर निवासी रामवेद ने बताया कि बेटी भूमिका ने इस वर्ष नीट दिया था। काउंसिलिंग के तीसरे राउंड तक बेटी का नाम नहीं आया। इसके बाद 14 सितंबर को एक अनजान व्यक्ति ने फोन कर खुद को काउंसिलिंग सेंटर का कर्मचारी राजबीर बताया। उसने केजीएमयू में भूमिका को दाखिला दिलाने की बात कही और गाजियाबाद स्थित अपने ऑफिस बुलाया। रामवेद गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित ऑफिस पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात निशांत कुमार सिंह से हुई। जिसने केजीएमयू में मैनेजमेंट कोटे की सीट से एमबीबीएस में दाखिला कराने की बात कही। रामवेद ने हामी भर दी और कुछ रुपये उसे दे दिए।
25 सितंबर को रामवेद बेटी के साथ केजीएमयू पहुंचे। जहां निशांत ने बताया कि न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट की ओर से डॉ. शैलेश त्रिपाठी को काउंसिलिंग कमेटी के हेड बनाया गया है। वही भूमिका के दाखिले की संस्तुति करेंगे। डॉ. शैलेश से मिलवाने के लिए निशांत पिता-पुत्री को न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के कमरा नंबर दो स्थित ईईजी लैब में ले गया। दोनों का मोबाइल पहले ही जमा करा लिया गया।
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रामवेद बेटी के साथ कमरे में पहुंचे तो एक अधेड़ व्यक्ति बैठा था। उसने खुद को डॉ. शैलेश त्रिपाठी बताया और 11 लाख व भूमिका के मूल कागजात ले लिए। फिर सीट अलॉटमेंट के लेटर पर साइन किए और मुहर लगाकर थमा दिया। कुछ रसीदें भी दीं। निशांत ने कहा कि अब भूमिका का दाखिला एमबीबीएस में हो गया है।
निशांत ने केजीएमयू के नाम से 60-60 हजार रुपये के चार डीडी भी लिए। फिर पांच अक्तूबर से क्लासेज शुरू होने की बात कही। कुछ दिनों बाद निशांत ने फोन करके 14 अक्तूबर से कक्षाएं शुरू होने की सूचना दी।
रामवेद बेटी को लेकर केजीएमयू पहुंचे मगर निशांत नहीं मिला। फोन पर संपर्क किया तो वह टालमटोल करने लगा। इस पर पिता-पुत्री हरियाणा लौट गए। रामवेद कई बार गाजियाबाद गए, निशांत को फोन भी किया मगर बात नहीं हो पाई। आखिरकार पिता-पुत्री केजीएमयू पहुंचे और रजिस्ट्रार से मिले तो फर्जीवाड़े का पता चला।
पड़ताल में पता चला कि खुद को डॉ. शैलेश त्रिपाठी बताने वाले शख्स का नाम रमेश चंद्र पांडेय है और वह न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट की ईईजी लैब का कर्मचारी है। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों ने दाखिले के नाम पर 16 लाख रुपये ठगे हैं। रामदेव की शिकायत पर चौक कोतवाली में राजबीर सिंह, निशांत कुमार और कुछ अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
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हरियाणा के झज्जर निवासी रामवेद ने बताया कि बेटी भूमिका ने इस वर्ष नीट दिया था। काउंसिलिंग के तीसरे राउंड तक बेटी का नाम नहीं आया। इसके बाद 14 सितंबर को एक अनजान व्यक्ति ने फोन कर खुद को काउंसिलिंग सेंटर का कर्मचारी राजबीर बताया। उसने केजीएमयू में भूमिका को दाखिला दिलाने की बात कही और गाजियाबाद स्थित अपने ऑफिस बुलाया। रामवेद गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित ऑफिस पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात निशांत कुमार सिंह से हुई। जिसने केजीएमयू में मैनेजमेंट कोटे की सीट से एमबीबीएस में दाखिला कराने की बात कही। रामवेद ने हामी भर दी और कुछ रुपये उसे दे दिए।
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25 सितंबर को रामवेद बेटी के साथ केजीएमयू पहुंचे। जहां निशांत ने बताया कि न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट की ओर से डॉ. शैलेश त्रिपाठी को काउंसिलिंग कमेटी के हेड बनाया गया है। वही भूमिका के दाखिले की संस्तुति करेंगे। डॉ. शैलेश से मिलवाने के लिए निशांत पिता-पुत्री को न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के कमरा नंबर दो स्थित ईईजी लैब में ले गया। दोनों का मोबाइल पहले ही जमा करा लिया गया।
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रामवेद बेटी के साथ कमरे में पहुंचे तो एक अधेड़ व्यक्ति बैठा था। उसने खुद को डॉ. शैलेश त्रिपाठी बताया और 11 लाख व भूमिका के मूल कागजात ले लिए। फिर सीट अलॉटमेंट के लेटर पर साइन किए और मुहर लगाकर थमा दिया। कुछ रसीदें भी दीं। निशांत ने कहा कि अब भूमिका का दाखिला एमबीबीएस में हो गया है।
निशांत ने केजीएमयू के नाम से 60-60 हजार रुपये के चार डीडी भी लिए। फिर पांच अक्तूबर से क्लासेज शुरू होने की बात कही। कुछ दिनों बाद निशांत ने फोन करके 14 अक्तूबर से कक्षाएं शुरू होने की सूचना दी।
रामवेद बेटी को लेकर केजीएमयू पहुंचे मगर निशांत नहीं मिला। फोन पर संपर्क किया तो वह टालमटोल करने लगा। इस पर पिता-पुत्री हरियाणा लौट गए। रामवेद कई बार गाजियाबाद गए, निशांत को फोन भी किया मगर बात नहीं हो पाई। आखिरकार पिता-पुत्री केजीएमयू पहुंचे और रजिस्ट्रार से मिले तो फर्जीवाड़े का पता चला।
पड़ताल में पता चला कि खुद को डॉ. शैलेश त्रिपाठी बताने वाले शख्स का नाम रमेश चंद्र पांडेय है और वह न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट की ईईजी लैब का कर्मचारी है। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों ने दाखिले के नाम पर 16 लाख रुपये ठगे हैं। रामदेव की शिकायत पर चौक कोतवाली में राजबीर सिंह, निशांत कुमार और कुछ अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।