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Lucknow News: पुराने वाहनों पर कहर, केंद्र की नीति से नाराजी
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। सरकार का यह निर्णय बहुत घातक है कि पंद्रह वर्ष पुराने पेट्रोल वाले एवं दस साल पुराने डीजल वाहनों को अब सड़कों पर नहीं चलने दिया जाएगा। दिल्ली में ऐसे वाहनों की धरपकड़ की जा रही है। अन्यत्र भी यह नीति लागू होगी।
उक्त विचार बुद्घिजीवियों ने विचार मंच की ओर से रविवार को वीरसावरकर नगर में ‘पंद्रह और दस साल पुराने वाहनों को रद्द किया जाना’ विषयक संगोष्ठी में व्यक्त किए। मुख्य वक्ता पत्रकार राजेश राय ने कहाकि पुराने वाहनों से कार्बन-उत्सर्जन अधिक होता है, जिससे प्रदूषण फैलता है। यह तर्क सही नहीं है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पत्रकार श्याम कुमार ने कहाकि वाहनों की फिटनेस पंद्रह वर्ष एवं दस वर्ष की अवधि के आधार पर जांचना बिलकुल अनुचित है। कम इस्तेमाल वाहन के अच्छे रखरखाव से प्रदूषण कम होता है तथा नए वाहन के अधिक इस्तेमाल व खराब रखरखाव से प्रदूषण बढ़ता है। पत्रकार डॉ. हरिराम त्रिपाठी ने कहाकि सरकार के इस निर्णय से 62 लाख वाहन बेकार हो जाएंगे। स्वाभाविक है कि जिन्हें वाहन रखने की अनिवार्य आवश्यकता है, उन्हें नया वाहन खरीदना पड़ेगा, जिसका उन पर नाहक आर्थिक भार पड़ेगा। समाजसेवी राजीव माथुर ने कहाकि सरकार ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हवा के शुद्धीकरण हेतु बड़े-बड़े टावर लगाने की घोषणा की थी। वह योजना धूल फांक रही है। पत्रकार शेखर पंडित ने कहाकि इस फैसले से वाहन-निर्माताओं को आर्थिक लाभ मिलेगा। समीक्षक आशीष मिश्र ने कहाकि वाहन की फिटनेस जांचने के लिए प्रदूषण-प्रमाणपत्र की अनिवार्यता है। यदि प्रदूषण की जांच में वाहन की स्थिति सही मिलती है तो उसे ही मान्य माना जाना चाहिए।
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