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Lucknow News: हर साल खर्च हाेते 15 करोड़, फिर भी जलभराव
Sat, 15 Jul 2023 11:00 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sat, 15 Jul 2023 11:00 PM IST
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रायबरेली। शहर की ढाई लाख आबादी को बारिश में जलभराव से राहत दिलाने के लिए हर साल पानी की तरह करीब 15 करोड़ से ज्यादा रुपये बहा दिए जाते हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी है। इस धनराशि से नाली-नाला निर्माण और इनकी साफ-सफाई का कार्य कराया जाता है। यदि इन कार्यों को मानक के तहत कराया जाए तो नागरिकों को जलभराव से राहत मिल सकती है, लेकिन ऐसा नहीं होता।
नगर पालिका परिषद क्षेत्र में 34 वार्ड लगते हैं। इन वार्डों में रहने वाले नागरिकों को जलभराव से राहत दिलाने की जिम्मेदारी पालिकाध्यक्ष और ईओ की होती है। इसके लिए बारिश से पहले नालों की साफ-सफाई कराई जाती है। साल में करोड़ों रुपये नाली-नालों के निर्माण पर भी खर्च किया जाता है। इस साल छोटे-बड़े 99 नालों की सफाई पर करीब 10 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि नाला-नालियों के निर्माण को लेकर टेंडर प्रक्रिया चल रही है। नाली-नाला निर्माण पर मानक का ध्यान नहीं दिया जाता। जैसे नाला-नाली निर्माण लेबल पर होना चाहिए। उसकी गुणवत्ता ठीक होनी चाहिए। किस ओर से नाला-नाली का निर्माण हो, जिससे बारिश के पानी की निकासी आसानी से हो सके। अधिकारी और ठेकेदार यह सब नहीं देखते और कमीशनबाजी के चक्कर में मानक के विपरीत नालों-नालियों का निर्माण करा देते हैं। नालों की साफ-सफाई ठीक तरीके से नहीं होती। ऐसे में जलभराव की समस्या हर साल होती है और शहर के वाशिंदों को परेशानी झेलनी पड़़ती है।
मौजूदा समय की बात करें शहर क्षेत्र में करीब 176 तालाब आंकड़ों में दर्ज हैं। इसमें से आधे से ज्यादा तालाब पाट दिए गए हैं। उन पर कब्जा कर लिया गया है। जो शेष बचे हैं, उनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। वजह लोग तालाब पाटकर उस पर कब्जा कर लिया है। बारिश का पानी तालाबों में भर जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। नतीजतन पूरा शहर जलभराव की चपेट में है।
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शहर में जलभराव के लिए नगर पालिका के अधिकारी कम जिम्मेदार नहीं हैं। हकीकत ये है कि नालों की साफ-सफाई की देखरेख की जिम्मेदारी योग्य कर्मचारियों को दी जाए, लेकिन ऐसा नहीं है। यहां पर नियमित सफाई कर्मियों और आउट सोर्सिंग कर्मचारियों को नालों साफ-सफाई कराने की जिम्मेदारी दे दी गई है। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि जलभराव की समस्या को लेकर कितनी गंभीरता दिखाई जा रही है।
अब तक नगर पालिका के जलकल विभाग को ही जलभराव, सीवर की समस्या दूर कराने की जिम्मेदारी दी जाती रही है। इस बार यह काम स्वास्थ्य विभाग को दे दिया गया है। कहा जा रहा है कि नियमित यह काम जलकल विभाग के अधिकारियों को ही करना चाहिए। ऐसे में तालमेल की कमी न होना भी जलभराव की वजह बन रही है।
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नगर पालिका परिषद क्षेत्र में 34 वार्ड लगते हैं। इन वार्डों में रहने वाले नागरिकों को जलभराव से राहत दिलाने की जिम्मेदारी पालिकाध्यक्ष और ईओ की होती है। इसके लिए बारिश से पहले नालों की साफ-सफाई कराई जाती है। साल में करोड़ों रुपये नाली-नालों के निर्माण पर भी खर्च किया जाता है। इस साल छोटे-बड़े 99 नालों की सफाई पर करीब 10 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि नाला-नालियों के निर्माण को लेकर टेंडर प्रक्रिया चल रही है। नाली-नाला निर्माण पर मानक का ध्यान नहीं दिया जाता। जैसे नाला-नाली निर्माण लेबल पर होना चाहिए। उसकी गुणवत्ता ठीक होनी चाहिए। किस ओर से नाला-नाली का निर्माण हो, जिससे बारिश के पानी की निकासी आसानी से हो सके। अधिकारी और ठेकेदार यह सब नहीं देखते और कमीशनबाजी के चक्कर में मानक के विपरीत नालों-नालियों का निर्माण करा देते हैं। नालों की साफ-सफाई ठीक तरीके से नहीं होती। ऐसे में जलभराव की समस्या हर साल होती है और शहर के वाशिंदों को परेशानी झेलनी पड़़ती है।
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मौजूदा समय की बात करें शहर क्षेत्र में करीब 176 तालाब आंकड़ों में दर्ज हैं। इसमें से आधे से ज्यादा तालाब पाट दिए गए हैं। उन पर कब्जा कर लिया गया है। जो शेष बचे हैं, उनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। वजह लोग तालाब पाटकर उस पर कब्जा कर लिया है। बारिश का पानी तालाबों में भर जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। नतीजतन पूरा शहर जलभराव की चपेट में है।
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शहर में जलभराव के लिए नगर पालिका के अधिकारी कम जिम्मेदार नहीं हैं। हकीकत ये है कि नालों की साफ-सफाई की देखरेख की जिम्मेदारी योग्य कर्मचारियों को दी जाए, लेकिन ऐसा नहीं है। यहां पर नियमित सफाई कर्मियों और आउट सोर्सिंग कर्मचारियों को नालों साफ-सफाई कराने की जिम्मेदारी दे दी गई है। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि जलभराव की समस्या को लेकर कितनी गंभीरता दिखाई जा रही है।
अब तक नगर पालिका के जलकल विभाग को ही जलभराव, सीवर की समस्या दूर कराने की जिम्मेदारी दी जाती रही है। इस बार यह काम स्वास्थ्य विभाग को दे दिया गया है। कहा जा रहा है कि नियमित यह काम जलकल विभाग के अधिकारियों को ही करना चाहिए। ऐसे में तालमेल की कमी न होना भी जलभराव की वजह बन रही है।