हकीकत बना भेड़ चाल का मुहावरा, 143 भेड़ों की हुई मौत
भेड़ चाल... का मुहावरा यहां हकीकत में बदल गया। भेड़ चरा कर घर लौट रहा एक बुजुर्ग चरवाहा बुधवार की देर रात नहर के किनारे 15 फीट गहरी खाईं में गिर गया, तो उसके पीछे पीछे चल रहा लगभग 600 भेड़ों का झुंड भी गिरता चला गया।
किसी तरह बुजुर्ग चरवाहे ने साथियों की मदद से 457 भेड़ों को बचा लिया लेकिन उसकी 143 भेड़ों की मौत हो गई। मया के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विमल कुमार ने मृत भेड़ों का गुरुवार को पोस्टमार्टम किया है, इसके बाद जेसीबी से गड्ढा खोद सभी को दफन कर दिया गया है।
महराजगंज थाना क्षेत्र के तेलियाकुआं निवासी कन्हई पाल (62) अपने तीन अन्य साथियों के साथ बुधवार सुबह 600 भेड़ लेकर चराने गया था। वह देर रात्रि शारदा सहायक नहर की पटरी से लौट रहा था, कि लाला का पुरवा गांव के सामने नहर की तरफ गहरी खाईं में गिर पड़ा।
अपने मालिका का अनुसरण करते हुए पीछे आ रहा भेड़ों का झुंड भी उसी खाईं में गिरता चला गया। वृद्ध चरवाहे ने अन्य साथियों की मदद से लगभग 457 भेड़ों को बाहर निकाल लिया लेकिन उसकी 143 भेड़ें मर गईं।
पोस्टमार्टम के बाद पता चला सही नंबर
थानाध्यक्ष महराजगंज बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि पहले सूचना 250 भेड़ों के मर जाने की दी गई थी, लेकिन पोस्टमार्टम के दौरान गिनती कराई गई तो 143 भेड़ें ही मरी मिली हैं।
तेलियाकुआं निवासी कन्हई पाल ने बताया कि शारदा सहायक नहर के लाला का पुरवा गांव के सामने नहर की पटरी पर एक तरफ गहरी खाईं है। हम बुधवार रात लौट रहे थे, तभी पैर फिसल गया और खाईं में गिर गए।
इसके बाद पीछे-पीछे चल रहीं भेड़ें भी झुंड की झुंड मेरे उपर गिरती गईं। गनीमत रही कि हम एक किनारे सट गए और भेंड़े सामने ही एक पर एक गिरती गईं। हमारी कुल 600 भेड़ें थीं, अब 457 बचीं हैं। इसमें भी कई चोटिल हैं। प्रशासन से मुआवजा की भी मांग की है।
मया के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विमल कुमार बताया कि कन्हई पाल की 143 भेड़ों का पोस्टमार्टम किया गया है। भेड़ें हमेशा आगे चलने वाले का पैर देखकर चलती रहती हैं, ऐसे में आगे वाला जहां जाता है, पूरा झुंड उसी के अनुरूप जाता है।