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..मैं यदि सहिष्णु न होता तो तंबू में राम नहीं होते
Updated Thu, 24 May 2018 11:16 PM IST
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गोंडा। नेशनल एसोसिएशन ऑफ यूथ के तत्वावधान में आयोजित अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में बुधवार देर शाम राष्ट्रवाद की झलक दिखी। ओज कवि अमित शर्मा ने जैसे ही यह रचना पढ़ी- मैं यदि सहिष्णु न होता तो हिंदू बदनाम नहीं होते, मैं यदि सहिष्णु न होता तो तंबू में राम नहीं होते।
रामलीला मैदान में आयोजित कवि सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष भावेश पांडेय, वरिष्ठ अधिवक्ता रवि प्रकाश पांडेय तथा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रबंधक अरुण कुमार शुक्ला ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद वरिष्ठ कवि देश शिवाकांत मिश्रा विद्रोही ने पढ़ा-देशद्रोही की अंतड़िया टांग कर संगीन में, भेट करते महाकाली को उन्हें मेरा नमन। श्याम त्रिवेदी पंकज ने अपनी रचना पढ़ते हुए पढ़ा-सेना के पौरुष को ललकारा है मोफ्लारबाजो ने। अंतरराष्ट्रीय कवि अपनी कविता में देश की पीड़ा जीवंत करने वाले कवि अमित शर्मा ने हिंदुओं की सहिष्णुता का बखान करते हुए पढ़ा-ताकत के बल पर हमने किसे सताया यह बोलो। तलवारों की धार दिखाकर तिलक लगाया यह बोलो। जेहादी जो मैल था, उसको हमने साफ किया था जी। सत्रह बार मोहम्मद गौरी को हमने माफ किया था जी। इसी तरह अन्य कवियों ने रचनाएं सुनाईं। कवि सम्मेलन के पूर्व सामाजिक कार्य के लिए महेंद्र सिंह, सांस्कृतिक क्षेत्र में उर्मिला पांडेय, शिक्षा के लिए प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, हनुमंत लाल पांडेय, डॉक्टर अशोक त्रिपाठी व साहित्य के लिए सरिता तिवारी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए छात्रा वैष्णवी पाठक हरीश मिश्रा अभिषेक सिंह सूरजभान दुबे रवि प्रकाश पांडे व युवा गौरव सम्मान से उमेश छात्रसंघ अध्यक्ष उमेश शुक्ला दिनेश त्रिपाठी उपेंद्र वर्मा शिवम तिवारी अभिषेक वर्मा को सम्मानित किया गया।
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रामलीला मैदान में आयोजित कवि सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष भावेश पांडेय, वरिष्ठ अधिवक्ता रवि प्रकाश पांडेय तथा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रबंधक अरुण कुमार शुक्ला ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद वरिष्ठ कवि देश शिवाकांत मिश्रा विद्रोही ने पढ़ा-देशद्रोही की अंतड़िया टांग कर संगीन में, भेट करते महाकाली को उन्हें मेरा नमन। श्याम त्रिवेदी पंकज ने अपनी रचना पढ़ते हुए पढ़ा-सेना के पौरुष को ललकारा है मोफ्लारबाजो ने। अंतरराष्ट्रीय कवि अपनी कविता में देश की पीड़ा जीवंत करने वाले कवि अमित शर्मा ने हिंदुओं की सहिष्णुता का बखान करते हुए पढ़ा-ताकत के बल पर हमने किसे सताया यह बोलो। तलवारों की धार दिखाकर तिलक लगाया यह बोलो। जेहादी जो मैल था, उसको हमने साफ किया था जी। सत्रह बार मोहम्मद गौरी को हमने माफ किया था जी। इसी तरह अन्य कवियों ने रचनाएं सुनाईं। कवि सम्मेलन के पूर्व सामाजिक कार्य के लिए महेंद्र सिंह, सांस्कृतिक क्षेत्र में उर्मिला पांडेय, शिक्षा के लिए प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, हनुमंत लाल पांडेय, डॉक्टर अशोक त्रिपाठी व साहित्य के लिए सरिता तिवारी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए छात्रा वैष्णवी पाठक हरीश मिश्रा अभिषेक सिंह सूरजभान दुबे रवि प्रकाश पांडे व युवा गौरव सम्मान से उमेश छात्रसंघ अध्यक्ष उमेश शुक्ला दिनेश त्रिपाठी उपेंद्र वर्मा शिवम तिवारी अभिषेक वर्मा को सम्मानित किया गया।
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