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कड़ाके की ठंड ने ली युवक की जान
Updated Tue, 09 Jan 2018 09:49 PM IST
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बहराइच। तराई में कड़ाके की ठंड परेशानी का सबब बन गई है। ठंड से मंगलवार सुबह एक युवक की मौत हो गई। पारा लुढ़क कर फिर 2.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी से तराई में गलन बढ़ गई है। शीतलहर ने जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया है।
मंगलवार को पूरे दिन धुंध और कोहरे छाया रहा। दोपहर में कुछ देर के लिए सूरज निकला, लेकिन ठंड से निजात नहीं मिली। घर से निकले लोग गर्म कपड़ों में लिपटे दिखे। जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। कड़ाके की ठंड में नानपारा तहसील अंतर्गत बेचईपुरवा निवासी राजकुमार (40) पुत्र रामफेरन सोनकर की मौत हो गई।
परिवार के लोगों ने बताया कि भोर में पांच बजे प्रतिदिन की तरह राजकुमार बिस्तर से उठे, फिर अचानक कांपने लगे। जब तक परिवार के लोग समझ पाते, वह जमीन पर गिर गए। आननफानन में उन्हें निजी चिकित्सक के यहां पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मंगलवार दोपहर में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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मौसम परिवर्तन का सिलसिला तराई में बदस्तूर जारी है। सोमवार रात से शहर, कस्बे व ग्रामीण अंचल घने कोहरे की चपेट में रहे। सुबह भी कोहरा बरकरार रहा। रेल गाड़ियां निर्धारित समय से एक से डेढ़ घंटे विलंब से गंतव्य को रवाना हुईं। परिवहन सेवाएं भी चरमराई रहीं। सुबह वाहन रेंगते दिखे।
कोहरा खत्म होने के बाद लगा कि मौसम साफ होगा, लेकिन कुछ देर के लिए मामूली धूप निकली। दिन भर धुंध छायी रही। पश्चिमोत्तर दिशा में हवाएं 11 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलीं, जिससे लोग कांपने को मजबूर रहे। घर से निकले नौकरी पेशा और मजदूर वर्ग के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोग गर्म कपड़ों में लिपटे दिखे। ठिठुरन और गलन ने लोगों की परेशानी और भी बढ़ा दी है।
पहाड़ों की बर्फबारी से बदल रहा मौसम
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर चल रहा है। पछुवा हवा बर्फबारी के कारण तराई में शीतलहरी का सबब बनी हुई है, जिससे मौसम निरंतर बदल रहा है। अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 2.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है। उन्होंने कहा कि दो दिन बाद बदली की भी संभावना है।
गेहूं और आलू के किसान रहें सजग
फसल अनुसंधान केंद्र प्रभारी डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि बदली, कोहरा और धुंध के कारण सबसे अधिक असर गेहूं, आलू और सरसों की फसल पर पड़ेगा। गेहूं में जहां गेरुआ लगने की आशंका बढ़ गई है। आलू झुलसा रोग की चपेट में आ सकता है।
सरसों में माहू लगने से फसल की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसान खेतों की निरंतर निगरानी कर विशेषज्ञों के संपर्क में रहें, जिससे फसल को नुकसान न हो। उन्होंने बताया कि सप्ताह भर तक मौसम में तब्दीली के आसार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में लोगों को कड़ाके की ठंड से बचने का हर संभव उपाय करना चाहिए।
बिना पोस्टमार्टम के नहीं मिल सकता मुआवजा
ठंड से मौत की पुष्टि पोस्टमार्टम से ही हो सकती है। जिस ग्रामीण की मौत का मामला सामने आया है, परिवार के लोगों ने उसका पोस्टमार्टम नहीं करवाया है। ऐसे में बिना पोस्टमार्टम के मुआवजा नहीं मिल सकता। फिर भी जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे।
-गौरांग राठी, उप जिलाधिकारी
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मंगलवार को पूरे दिन धुंध और कोहरे छाया रहा। दोपहर में कुछ देर के लिए सूरज निकला, लेकिन ठंड से निजात नहीं मिली। घर से निकले लोग गर्म कपड़ों में लिपटे दिखे। जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। कड़ाके की ठंड में नानपारा तहसील अंतर्गत बेचईपुरवा निवासी राजकुमार (40) पुत्र रामफेरन सोनकर की मौत हो गई।
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परिवार के लोगों ने बताया कि भोर में पांच बजे प्रतिदिन की तरह राजकुमार बिस्तर से उठे, फिर अचानक कांपने लगे। जब तक परिवार के लोग समझ पाते, वह जमीन पर गिर गए। आननफानन में उन्हें निजी चिकित्सक के यहां पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मंगलवार दोपहर में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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मौसम परिवर्तन का सिलसिला तराई में बदस्तूर जारी है। सोमवार रात से शहर, कस्बे व ग्रामीण अंचल घने कोहरे की चपेट में रहे। सुबह भी कोहरा बरकरार रहा। रेल गाड़ियां निर्धारित समय से एक से डेढ़ घंटे विलंब से गंतव्य को रवाना हुईं। परिवहन सेवाएं भी चरमराई रहीं। सुबह वाहन रेंगते दिखे।
कोहरा खत्म होने के बाद लगा कि मौसम साफ होगा, लेकिन कुछ देर के लिए मामूली धूप निकली। दिन भर धुंध छायी रही। पश्चिमोत्तर दिशा में हवाएं 11 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलीं, जिससे लोग कांपने को मजबूर रहे। घर से निकले नौकरी पेशा और मजदूर वर्ग के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोग गर्म कपड़ों में लिपटे दिखे। ठिठुरन और गलन ने लोगों की परेशानी और भी बढ़ा दी है।
पहाड़ों की बर्फबारी से बदल रहा मौसम
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर चल रहा है। पछुवा हवा बर्फबारी के कारण तराई में शीतलहरी का सबब बनी हुई है, जिससे मौसम निरंतर बदल रहा है। अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 2.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है। उन्होंने कहा कि दो दिन बाद बदली की भी संभावना है।
गेहूं और आलू के किसान रहें सजग
फसल अनुसंधान केंद्र प्रभारी डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि बदली, कोहरा और धुंध के कारण सबसे अधिक असर गेहूं, आलू और सरसों की फसल पर पड़ेगा। गेहूं में जहां गेरुआ लगने की आशंका बढ़ गई है। आलू झुलसा रोग की चपेट में आ सकता है।
सरसों में माहू लगने से फसल की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसान खेतों की निरंतर निगरानी कर विशेषज्ञों के संपर्क में रहें, जिससे फसल को नुकसान न हो। उन्होंने बताया कि सप्ताह भर तक मौसम में तब्दीली के आसार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में लोगों को कड़ाके की ठंड से बचने का हर संभव उपाय करना चाहिए।
बिना पोस्टमार्टम के नहीं मिल सकता मुआवजा
ठंड से मौत की पुष्टि पोस्टमार्टम से ही हो सकती है। जिस ग्रामीण की मौत का मामला सामने आया है, परिवार के लोगों ने उसका पोस्टमार्टम नहीं करवाया है। ऐसे में बिना पोस्टमार्टम के मुआवजा नहीं मिल सकता। फिर भी जांच करवाकर कार्रवाई करेंगे।
-गौरांग राठी, उप जिलाधिकारी