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Pyramid of Assam: पीएम मोदी ने मन की बात में किया 'असम के पिरामिड' का जिक्र, जानें इसका इतिहास
Sun, 28 Jul 2024 01:25 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Sun, 28 Jul 2024 01:25 PM IST
सार
आज 28 जुलाई को प्रसारित मन की बात में पीएम मोदी ने असम में स्थित चराइदेव मोईदम का जिक्र किया है। इस जगह का इतिहास काफी गहरा है। इसे हाल ही में विश्व धरोहर घोषित किया गया है।
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असम का पिरामिड
- फोटो : Instagram
विस्तार
मिस्र के पिरामिड की खूबसूरती विश्व प्रसिद्ध है। अक्सर फिल्मों के दृश्य वहां फिल्माए जाते हैं। खूबसूरती के साथ ही पिरामिड का इतिहास भी काफी रोचक है। पर्यटन स्थलों के तौर पर मशहूर पिरामिड में शाही परिवार की कब्र बनी है। यहां राजाओं के शवों को सुरक्षित दफनाया गया है, जिसे ममी कहते हैं।
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क्या आपको पता है कि मिस्र के पिरामिड जैसी जगह भारत में भी है? भारत के असम में शाही कब्र स्थल है, जिसका नाम मैदाम या मोइदम है। हाल ही में असम के शाही कब्रिस्तान को विश्व धरोहर का दर्जा मिला है। आज 28 जुलाई के दिन पीएम मोदी ने मन की बात में असम की शाही कब्रिस्तान का जिक्र किया है। आइए आपको भी इस ऐतिहासिक स्थल के इतिहास के बारे में बताते हैं, जिसे असम का पिरामिड कहा जाता है।
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भारत में मिस्र जैसे पिरामिड
असम के इतिहास में अहोम राजवंश का विवरण मिलता है। शाही परिवार का कब्रिस्तान माउंड दफन प्रणाली पर आधारित है, जिसे मोइदम्स कहते हैं। असम के चोराइदेव में मोइदम्स स्थित है, जो कि विशाल वास्तुकला के माध्यम से संरक्षित किया गया है। प्राचीन काल के मिस्र के फैरो यानी शाही लोगों को जिस तरह से पिरामिड में दफनाया जाता था, ये कुछ-कुछ वैसा ही है। इसलिए मोइदम्स को असम का पिरामिड भी कहते हैं।
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अहोम समुदाय का इतिहास
पूर्वोत्तर भारत में अहोम वंश के लोग रहते थे, जो 13वीं शताब्दी में यहां पहुंचे थे। उन्होंने चेराइदेव को अपना पहला शहर और शाही नेक्रोपोलिस की साइट के तौर पर स्थापित किया। 600 सालों तक असम पर अहोम वंश का वर्चस्व रहा। अहोम के पहले राजा चाउ-लुंग सिउ-का-फा को चराइदेव में दफनाया गया था। तब से ताई-अहोम के राजा रानियों और राजकुमार व राजकुमारियों को इसी स्थान पर दफनाने का चलन शुरू हो गया।
चराइदेव का मोइदम
ये अहोम समुदाय द्वारा पवित्र स्थान माना जाता है। चराईदेव के हर मोइदम में एक अहोम शासक या गणमान्य को दफनाया गया है। बताया जाता है कि उनके अवशेषों के साथ मूल्यवान कलाकृति और खजाना संरक्षित है।
मोइदम की संरचना
मोइदम के तीर हिस्से होते हैं। पहला वो भूमिगत कमरा या वाॅल्ट जहां मृतक का शरीर रखा जाता है। दूसरा कमरे को ढकने के लिए एक अर्धगोलाकार टीला जिसे गा-मोइदम कहते हैं और तीसरे हिस्से में टीले पर ईंट की संरचना बनाई जाती थी, जिसे डोल कहा जाता है।
चराइदेव में लगभग 90 टीले हैं। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने जब मोइदम 2 की खुदाई की तो कई कलाकृतियां मिलीं। इसमें हाथी दांत और लकड़ी से बनी सजावटी चीजें शामिल थीं।