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रिश्ते तो प्यार मांगेंगे ही
Tue, 12 Dec 2023 04:42 PM IST
प्रकाश चंद जोशी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रकाश चंद जोशी
Updated Tue, 12 Dec 2023 04:42 PM IST
सार
शादी का फैसला कभी आनन-फानन में नहीं लेना चाहिए। मान लीजिए आप जल्दबाजी में शादी कर भी रहीं हैं, तब भी कोशिश कीजिए कि आप अपने होने वाले साथी से बात करें। संकेत अगर नकारात्मक मिले तो पीछे हटना बेहतर है।
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जब शादी में जल्दबाजी की है तो शादी के बाद थोड़ा वक्त दीजिए।
- फोटो : istock
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विस्तार
प्रज्ञा तिवारी,
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आप पारिवारिक दबाव के कारण ऐसे रिश्ते में तो नहीं बंध गईं, जिसमें प्यार नहीं और चाह कर भी आप उनसे या वह आपसे भावनात्मक जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रहे हैं।
शादी की औसत उम्र पच्चीस वर्ष से बढ़कर तीस वर्ष हो चुकी है। कारण चाहे पारिवारिक जिम्मेदारियों का हो, वित्तीय स्थिरता का हो या कोई और लेकिन शादी का दवाब महिलाओं पर सबसे ज्यादा रहता है और एक उम्र के बाद दवाब इतना ज्यादा हो जाता है कि महिलाएं जल्दबाजी में गलत शादी के बंधन में बंध जाती हैं, जिसमें न प्यार रहता है, न आपसी समझ। ऐसा नहीं है कि गलती हमेशा सामने वाले की हो, हमारी तरफ से भी भावनात्मक लगाव चाहकर भी नहीं बन पाता। जिस वजह से दोनों के बीच की खाई गहरी होती जाती है। ऐसे में दिलों के तार हमेशा के लिए अनछुए रह जाते हैं और कई रिश्तों के टूटने की वजह यही कारण बनते हैं।
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जल्दबाजी नहीं, सावधानी
पहली बात कि शादी का फैसला कभी आनन-फानन में नहीं लेना चाहिए। मान लीजिए आप जल्दबाजी में शादी कर भी रहीं हैं, तब भी कोशिश कीजिए कि आप अपने होने वाले साथी से बात करें। संकेत अगर नकारात्मक मिले तो पीछे हटना बेहतर है।
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दोनों को चाहिए वक्त
जब शादी में जल्दबाजी की है तो शादी के बाद थोड़ा वक्त दीजिए खुद को और सामने वाले को ताकि दोनों एक-दूसरे को समझ पाएं। आप ये ना सोचें कि दूसरे जोड़ों की तरह अगले दिन ही सब कुछ परीकथा जैसा हो जाएगा।
सम्मान दें, मगर आत्मसम्मान जरूरी
भले ही आप सामने वाले से प्यार न करें, उसको स्पेशल महसूस न कराएं, लेकिन उसके सम्मान में कटौती बिल्कुल भी न करें। आपका यही सम्मान आप दोनों के बीच प्यार लाएगा। लेकिन अपने आत्मसम्मान को खत्म न होने दें। अगर वह ऐसा कुछ करते या बोलते हैं तो तुरंत उन्हें रोकें।
शिकायतें बंद करें
रिश्ते में सब कुछ ठीक न हो फिर भी बहस, लड़ाई और रोना-चीखना शुरू न कर दें। क्योंकि इससे न केवल चीजें बदतर होंगी, बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ेगा। इन सबकी बजाय शांति और गंभीरता से रास्ता निकालें। इससे आप बेहतर निर्णय तक पहुंच पाएंगी।
दुर्घटना से दूरी भली
सब कुछ खत्म हो जाए, लेकिन खुद का जिंदा रहना हर हाल में जरूरी है। जब लगे कि रिश्ते में अब सुधार की गुंजाइश खत्म हो गई है तो किसी गलत कदम की बजाय आपसी बातचीत से पीछे हटना बेहतर है।
विवेकपूर्ण फैसले
शोभना
फैमिली रिलेशनशिप काउंसलर
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। हर व्यक्ति, भले ही वह स्त्री हो या पुरुष उसको अनेक भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं और इसके लिए महत्वाकांक्षाओं के कारण मनोभावों की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। भावनाओं को विवेक पर हावी न होने दें। विवेकपूर्ण फैसले और संतुलित दृष्टिकोण ही जीवन जीने की कला है और इसी से रिश्ते भी निभाए जा सकते हैं।
आप एक-दूसरें से बात करें तो हो सकता है कि उसके मन में कुछ ऐसा हो जिसका जानना आपके लिए भी जरूरी हो। अगर आप दोनों के बीच नहीं बन रही है तो पहले कुछ दिन के थोड़ी दूरी बनाएं। हो सकता है आप दोनों को दूर रहकर एक-दूसरे की कीमत महसूस हो और अगर इसके बाद भी चीजें जस की तस बनी रहें तो पूरा जीवन खत्म करने से बेहतर है हमेशा के लिए एक-दूसरे से दूरी बना लें।