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जिस बीमारी के चलते हुई पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मौत, आखिर कितनी खतरनाक है वो? जानिए सबकुछ

Mon, 31 Aug 2020 10:26 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Mon, 31 Aug 2020 10:26 PM IST
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Former president pranab mukherjee passes away after brain blood clot surgery Know about this disease
प्रणब मुखर्जी - फोटो : PTI

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार को निधन हो गया। वह पिछले कई दिनों से बीमार थे और उनका इलाज दिल्ली कैंट स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में चल रहा था। अस्पताल की तरफ से बताया गया था कि फेफड़ों में संक्रमण की वजह से वह सेप्टिक शॉक में थे। उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती कराए जाने से पहले वह कोरोना से भी संक्रमित पाए गए थे। उनके निधन पर सरकार ने 31 अगस्त से छह सितंबर तक सात दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया है। आइए जानते हैं वह कौन सी बीमारी थी, जिसकी वजह से प्रणब मुखर्जी का निधन हुआ।

Former president pranab mukherjee passes away after brain blood clot surgery Know about this disease
प्रणब मुखर्जी - फोटो : PTI
  • हाल ही में प्रणब मुखर्जी की ब्रेन सर्जरी हुई थी। दरअसल, उनके मस्तिष्क में खून का थक्का जम गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ समय पहले वह अपने बाथरूम में फिसलकर गिर गए थे, जिसकी वजह से उनके दिमाग में ब्लड क्लॉटिंग (खून का थक्का जमना) हो गई थी। 
Former president pranab mukherjee passes away after brain blood clot surgery Know about this disease
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

क्या होती है ब्लड क्लॉटिंग? 

  • दरअसल, ब्लड क्लॉटिंग यानी खून का थक्का होने पर इंसान का खून तरल पदार्थ से एक जेल में बदलने लगता है, जो एक थक्के की तरह हो जाता है। इसे थ्रोम्बोसिस भी कहते हैं। अक्सर आपने ध्यान दिया होगा कि चोट या फिर कहीं कट लग जाने पर वहां से खून निकलने लगता है, इसी खून को रोकने का काम करता है क्लॉट। लेकिन जब ये क्लॉटिंग नसों में होने लगती है तो यह स्थिति जानलेवा हो जाती है। 
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Former president pranab mukherjee passes away after brain blood clot surgery Know about this disease
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • वैसे आमतौर पर ब्लड क्लॉटिंग से शरीर को नुकसान नहीं पहुंचता है, लेकिन जब ये एक जगह से दूसरी जगह फैलने लगता है तो खतरनाक हो जाता है। ये ब्लड क्लॉट टूटने के बाद नसों के जरिए दिल और फेफड़ों में पहुंच कर खून के प्रवाह को रोक सकता है। ऐसी हालत में व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • ब्लड क्लॉट कई तरह के होते हैं। नसों में होने वाले ब्लड क्लॉट को वेनस क्लॉट कहा जाता है। इस स्थिति में क्लॉटिंग धीरे-धीरे बढ़ती है, जो आगे चलकर जानलेवा बन जाती है। इसके अलावा आर्टेरियल क्लॉट भी होता है, जिसकी वजह से तेज दर्द और लकवा हो सकता है। इसकी वजह से दिल का दौरा भी पड़ सकता है। 
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