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Dengue Critical Phase: डेंगू का बुखार उतर गया? फिर भी खतरा बाकी! जानें क्रिटिकल फेस में क्या होता है
Tue, 25 Aug 2026 01:57 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 25 Aug 2026 01:57 PM IST
सार
When Dengue Become Dangerous: बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसे में डेंगू का बुखार लोगों को काफी परेशान कर रहा है। ये कब खतरनाक हो जाता है, यहां हम इसी बारे में आपको जानकारी देंगे।
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डेंगू में बुखार उतरने के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा?
- फोटो : AI
When Dengue Become Dangerous: बारिश के मौसम में डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। हर जगह डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में डेंगू से जुड़ी एक अहम बात हर मरीज और उसके परिवार को पता होनी चाहिए। ये बात है कि डेंगू में बुखार का उतरना हमेशा खतरा टलने का संकेत नहीं होता।
डेंगू में बुखार उतरने के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा?
- फोटो : AI
डेंगू में बुखार उतरने के बाद खतरा क्यों बढ़ जाता है?
डेंगू में बीमारी का एक महत्वपूर्ण चरण वह होता है जब तेज बुखार कम होने लगता है। इसी समय कुछ मरीजों में क्रिटिकल फेज शुरू हो सकता है। इस दौरान शरीर की रक्त वाहिकाओं से प्लाज्मा लीक होने की समस्या हो सकती है, जिससे शरीर में खून का प्रभावी वॉल्यूम कम हो सकता है और ब्लड प्रेशर गिरने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए तापमान सामान्य होने को डेंगू से पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं मानना चाहिए। बुखार उतरने के बाद अगले 24 से 48 घंटे भी मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
डेंगू में बीमारी का एक महत्वपूर्ण चरण वह होता है जब तेज बुखार कम होने लगता है। इसी समय कुछ मरीजों में क्रिटिकल फेज शुरू हो सकता है। इस दौरान शरीर की रक्त वाहिकाओं से प्लाज्मा लीक होने की समस्या हो सकती है, जिससे शरीर में खून का प्रभावी वॉल्यूम कम हो सकता है और ब्लड प्रेशर गिरने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए तापमान सामान्य होने को डेंगू से पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं मानना चाहिए। बुखार उतरने के बाद अगले 24 से 48 घंटे भी मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
डेंगू में बुखार उतरने के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा?
- फोटो : Freepik.com
बुखार उतरने के बाद इन लक्षणों पर रखें नजर
इनमें से कोई भी गंभीर लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।
- पेट में तेज या लगातार दर्द
- बार-बार उल्टी
- नाक या मसूड़ों से खून आना
- उल्टी या मल में खून दिखाई देना
- सांस लेने में परेशानी
- बहुत ज्यादा कमजोरी या बेचैनी
- चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना
- हाथ-पैर ठंडे पड़ना
- पेशाब कम होना
- अत्यधिक नींद या असामान्य सुस्ती
इनमें से कोई भी गंभीर लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।
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डेंगू में बुखार उतरने के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा?
- फोटो : AI
डेंगू में प्लेटलेट्स क्यों गिरते हैं?
डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या कम होना आम बात है। हालांकि, सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने से ही यह तय नहीं किया जा सकता कि मरीज की हालत कितनी गंभीर है। डॉक्टर मरीज के लक्षण, ब्लड प्रेशर, ब्लीडिंग, हेमाटोक्रिट और शरीर में तरल पदार्थ की स्थिति समेत कई चीजों को देखकर स्थिति का आकलन करते हैं।
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डेंगू में बुखार उतरने के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा?
- फोटो : Freepik.com
डेंगू में क्या सावधानी बरतें?
मरीज को पर्याप्त आराम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार तरल पदार्थ लेना चाहिए। बुखार और दर्द के लिए दवा डॉक्टर की सलाह से ही लें। डेंगू में बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द की दवाएं नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इनसे ब्लीडिंग का जोखिम बढ़ सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि बुखार उतरने के बाद मरीज को लापरवाही नहीं करनी चाहिए। इसी समय शरीर में होने वाले बदलावों पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।