भारत में कोविड-19 की देसी वैक्सीन Covaxin के ह्यूमन ट्रायल के दूसरे चरण की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS) और एसयूएम अस्पताल में ट्रायल के प्रिंसिपल इनवेस्टिगेटर डॉ. ई वेंकट राव ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी है। डॉ. ई वेंकट राव ने बताया कि ट्रायल का पहला चरण अभी जारी ही है, लेकिन हम जल्द ही दूसरा चरण शुरू करने की योजना बना रहे हैं।” मालूम हो कि हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने आईसीएमआर के सहयोग से यह वैक्सीन तैयार की है। इस वैक्सीन से देश को बड़ी उम्मीदें हैं।
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भारत की देसी वैक्सीन पर खुशखबरी, दूसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल की तैयारी शुरू, जानें अपडेट
Mon, 31 Aug 2020 08:39 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Mon, 31 Aug 2020 08:39 PM IST
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Covaxin Update
- फोटो : ICMR/Amar Ujala
Covaxin वैक्सीन
- फोटो : ट्विटर
- मालूम हो कि आईएमएस और एसयूएम अस्पताल देश के उन 12 स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल हैं जिन्हें आईसीएमआर ने कोवैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के लिए चयनित किया है। डॉ. राव ने कहा कि वैक्सीन के ट्रायल के लिए वॉलेंटियर्स से ब्लड सैंपल ले लिए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि एंटीबॉडी के संदर्भ में वैक्सीन कितनी असरदार है। उन्होंने बताया कि पहले चरण के ह्यूमन ट्रायल के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं और वैक्सीन का किसी तरह का साइड इफेक्ट नहीं देखा गया है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- डॉ. राव ने बताया कि ट्रायल के दौरान तीन से सात दिन पहले चले स्क्रीनिंग प्रोसेस में चुन गए हर एक वॉलेंटियर को वैक्सीन की दो खुराक दी गई थी। पहली खुराक डे जीरो यानी शुरू में दी गई और ब्लड सैंपल लिए गए और फिर 14 दिन के बाद वॉलेंटियर्स को दूसरी खुराक दी गई थी। इसके बाद भी ब्लड सैंपल लिया गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- उन्होंने बताया कि वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के दौरान कुछ दिनों के अंतराल पर अलग-अलग ब्लड सैंपल लिए जाते हैं ताकि वायरस से सुरक्षा की अवधि का अंदाजा लगाया जा सके। यानी कि वैक्सीन की डोज देने के कितने दिन के अंदर व्यक्ति बीमारी के प्रति सुरक्षित हो जाता है।
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Covaxin वैक्सीन
- फोटो : ट्विटर
कैसे बनाई गई है Covaxin?
- आईसीएमआर और भारत बायोटेक की Covaxin एक 'इनएक्टिवेटेड' वैक्सीन है। इसे कोरोना वायरस के उन पार्टिकल्स से तैयार किया गया है, जिन्हें निष्क्रिय कर दिया गया था या मार दिया गया था ताकि वे संक्रमित नहीं कर पाएं। इस वैक्सीन की डोज से शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बनती हैं और हमारा शरीर कोरोना वायरस से मुकाबला करने के काबिल हो जाता है।