चिंताजनक स्थिति: राजभाषा बनने के एक साल बाद भी हिंदी, डोगरी, कश्मीरी में नहीं हो रहा कामकाज
अब तक उर्दू और अंग्रेजी में हो रहा प्रशासनिक कामकाज।
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में 370 हटने के बाद 2020 में आधिकारिक भाषा अधिनियम के तहत उर्दू और अंग्रेजी की तरह हिंदी, डोगरी व कश्मीरी भाषा को भी मान्यता दी गई, लेकिन प्रशासनिक कामकाज में अब तक इनका इस्तेमाल नहीं हो पाया है। राजस्व विभाग के सभी दस्तावेज अभी भी सिर्फ उर्दू और अंग्रेजी भाषा में हैं।
बीते वर्ष जब प्रदेश में बोली जाने वाली डोगरी, कश्मीरी और हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला तब यहां के युवाओं में इन भाषाओं में रोजगार की संभावनाएं जगीं। प्रदेश के लोगों को लगा कि अब इन भाषाओं का इस्तेमाल सरकारी कामकाज में होगा, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी हालात नहीं बदल पाए हैं।
भाषाओं को शासन-प्रशासन की भाषा बनाए जाने की आवश्यकता
जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा अधिनियम पारित होने के बाद अब इन भाषाओं को शासन-प्रशासन की भाषा बनाए जाने की आवश्यकता है। प्रदेश में इस दिशा में सही ढंग से काम नहीं हो रहा है। इन भाषाओं के उपयोग से सरकारी योजनाओं में जनभागीदारी बढ़ेगी। प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय की भाषा उर्दू और अंग्रेजी को ही अब तक राजभाषा के रूप अधिकार मिला हुआ है। -प्रो. डॉ. रसाल सिंह, अध्यक्ष हिंदी विभाग, केंद्रीय विवि जम्मू
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हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है, जिसे जम्मू-कश्मीर का प्रत्येक व्यक्ति बोलता, समझता और पढ़ता है। राज्य के विकास के लिए हिंदी को महत्व देना जरूरी है।- प्रो. परमेश्वरी शर्मा, हिंदी विभाग, जम्मू विवि
पंजाब की तरह यहां भी पांचों भाषाओं में राजस्व विभाग का रिकॉर्ड होना चाहिए। इससे लोगों को समझने में आसानी होगी। - प्रो. डॉ. राज कुमार, लेखक व पूर्व विभागाध्यक्ष, जेयू
कश्मीरी के प्रचार-प्रसार से कौम बची रहेगी और तहजीब भी। कश्मीरी भाषा का विकास होने से समाचार पत्र निकलेंगे। बच्चों को भी इन भाषाओं में रोजगार मिल सकेगा।- प्रो. शहीद रमजान, श्रीनगर
डोगरी में राजकाज शुरू होने से डुग्गर संस्कृति का संरक्षण होगा। युवाओं के लिए रोजगार भी बढ़ेगा। - शिव देव मन्हास, अध्यक्ष, डोगरी विभाग जम्मू विवि
रिकॉर्ड उर्दू में ही चलेगा : सचिव
भाषाओं को मान्यता मिलने का मतलब यह नहीं कि राजस्व विभाग के सभी रिकॉर्ड हिंदी, डोगरी, कश्मीरी में बदल जाएंगे। यह संभव नहीं है। रिकॉर्ड उर्दू में ही चलेगा। किसी को कार्यालय में उर्दू समझ नहीं आएगी तो उसे अनुवाद करके बताया जा सकता है। हर भाषा में रिकॉर्ड लिखने की कवायद फिलहाल शुरू नहीं की जा रही है। हिंदी और अंग्रेजी का इस्तेमाल बाकी प्रदेशों की तरह यहां भी प्रशासनिक कार्यों में किया जा रहा है। -मनोज कुमार द्विवेदी, सचिव, सामान्य प्रशासनिक विभाग