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World Environment Day 2021: विकास के नाम पर काटा जाता है हर एक पेड़, पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं
Sat, 05 Jun 2021 10:25 AM IST
प्रशांत कुमार
संजीव दुबे, जम्मू
संजीव दुबे, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 05 Jun 2021 10:25 AM IST
सार
पर्यावरण और विकास दोनों साथ-साथ होने चाहिए। हर एक पेड़ विकास के नाम पर काटा जाता है, लेकिन उसके बदले में दो लगाए जाने चाहिए। तालाब व बावलियों का संरक्षण होना चाहिए।
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विश्व पर्यावरण दिवस 2021
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में विकास के नाम पर पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंचा है। जम्मू संभाग की ही बात करें तो दस से बीस साल पहले जिन पहाड़ों पर हरे भरे पेड़ होते थे, वहां अब वीरानी छाई है। अनदेखी के चलते तालाब व बावलियां नाम मात्र की रह गई हैं। इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है।
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जम्मू-कश्मीर के जाने माने पर्यावरणविद्ध ओपी शर्मा का कहना है कि पारिस्थितिकी और पर्यावरण की जहां तक बात है तो वैदिक काल में लोग पर्यावरण को अपने परिवार का हिस्सा मानते थे। पेड़ उगाते थे। गाय रखते थे। अन्य जानवरों को भी पालते थे। तालाब व बावलियों का संरक्षण होता था, लेकिन अब की बात करें तो विकास के नाम पर सड़के बनती हैं। ठेकेदार केवल सड़क बनाने पर फोकस करते हैं। पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया जाता।
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उनका कहना है कि दस से पंद्रह साल पहले मानसर के पहाड़ हरे भरे थे लेकिन अब नंगे दिखते हैं, लेकिन मानसर झील से लोगों की आस्था है। इसलिए वहां सब ठीक है। इसी आस्था को पेड़ों व जंगलों को बचाने में भी सामूहिक जिम्मेदारी के साथ हर परिवार को निभाना चाहिए।
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सांबा व कठुआ जिलों में ही 2000 के करीब तालाब थे, लेकिन अब उनकी स्थिति क्या है, ज्यादा बताने की जरूरत नहीं। जम्मू श्रीनगर नेशनल हाईवे चौड़ीकरण से नंदनी के पास रानी बावली जोकि हर किसी का ध्यान आकर्षित करने के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा भी दे सकती थी, उसकी उपेक्षा हो गई। खोखले विकास से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।
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