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Jammu News: बरसात का मौसम शुरू, बिजली लाइनमैन बिना सुरक्षा किट के कर रहे काम, करंट लगने का डर
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-1995 से लेकर अब तक 94 लाइनमैनों की मौत हो चुकी, 180 से ज्यादा हो चुके हैं घायल
- किट के लिए दो करोड़ का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन मंजूरी नहीं मिल पाई
-हर बरसात में बिजली कारपोरेशन के अधिकारी आश्वासन देते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बरसात का मौसम शुरू हो गया है, लेकिन बिजली लाइनमैनों को अभी सुरक्षा किट नहीं मिल पाई है। ऐसे में बारिश के दौरान बिजली लाइनों की मरम्मत करते समय करंट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
बता दें, हर साल तीन-चार लाइनमैन करंट की चपेट में आकर जान गंवाते हैं या झुलस जाते जाते हैं। हर बार हादसे के बाद बिजली कारपोरेशन की ओर से सुरक्षा किट देने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाता। आंकड़ों पर गौर करें तो 1995 से लेकर अब तक 94 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 180 कर्मचारी घायल हो चुके हैं।
बारिश के मौसम में भी लाइनमैनों को बिना उपकरण के तारों को जोड़ना पड़ता है। ऐसे में लाइनमैनों को जूते, दस्ताने, हेल्मेट, जैकेट सहित अन्य सुरक्षा उपकरण की जरूरत होती है। अगर ये चीजें हों तो हादसे से बचा जा सकता है। इसके लिए अगस्त 2023 में दो करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन इसे सचिवालय से मंजूरी नहीं मिली है।
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बीते साल रेजीडेंसी रोड में एक गली में तीन घोड़ों और एक व्यक्ति को करंट लग गया था। इसके अलावा गांधी नगर में ट्रांसफार्मर के पास रेहड़ी लगाने वाला भी करंट की चपेट में आया था। पनामा चौक में ट्रांसफार्मर में फाल्ट ठीक कर रहे कर्मचारी की करंट लगने से मौत हो गई थी। अभी तक सैकड़ों फाइलें मुआवजा राशि की स्वीकृति के लिए धूंल फांक रही हैं।
एक लाइनमैन के हवाले दो से तीन फीडर
जिले में 400 फीडरों को 150 लाइनमैन देख रहे हैं। यानी एक लाइनमैन के पास दो से तीन फीडरों का कार्यभार है। ऐसे में एक ही लाइनमैन को जल्दबाजी में काम करना पड़ता है। इस कारण भी हादसे ज्यादा होते हैं।
कोट
कर्मचारी 24 घंटे जान जोखिम में डालकर सेवाएं देते हैं। सुरक्षा किट मिलना जरूरी है। हर साल मौतें होती हैं। अस्थायी कर्मचारियों के लिए मुआवजे का प्रावधान किया जाना चाहिए।
- सचिन टिक्कू, संयोजक, जेएंडके पावर इंप्लाइज एंड इंजीनियर कोआर्डीनेशन कमेटी
कर्मचारियों की मौत होने पर मुआवजा देने के मामले लंबित हैं। कर्मचारियों को मुआवजा राशि मिलनी चाहिए। साथ ही सुरक्षा किट मुहैया हो। बारिश में करंट लगने के मामले ज्यादा आते हैं।
- अखिलेश कुमार, अध्यक्ष, पीडीडी डेली नीड वेजर कर्मचारी यूनियन
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कोट
किट मुहैया करवाने के लिए मसला उच्च अधिकारियों के ध्यान में है। जैसे ही अनुमति मिलेगी किट मुहैया करवा दी जाएगी। पहले कुछ किट मुहैया भी करवाए गए हैं।
- मनहर गुप्ता, मुख्य अभियंता, बिजली कारपोरेशन
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- किट के लिए दो करोड़ का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन मंजूरी नहीं मिल पाई
-हर बरसात में बिजली कारपोरेशन के अधिकारी आश्वासन देते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बरसात का मौसम शुरू हो गया है, लेकिन बिजली लाइनमैनों को अभी सुरक्षा किट नहीं मिल पाई है। ऐसे में बारिश के दौरान बिजली लाइनों की मरम्मत करते समय करंट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
बता दें, हर साल तीन-चार लाइनमैन करंट की चपेट में आकर जान गंवाते हैं या झुलस जाते जाते हैं। हर बार हादसे के बाद बिजली कारपोरेशन की ओर से सुरक्षा किट देने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाता। आंकड़ों पर गौर करें तो 1995 से लेकर अब तक 94 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 180 कर्मचारी घायल हो चुके हैं।
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बारिश के मौसम में भी लाइनमैनों को बिना उपकरण के तारों को जोड़ना पड़ता है। ऐसे में लाइनमैनों को जूते, दस्ताने, हेल्मेट, जैकेट सहित अन्य सुरक्षा उपकरण की जरूरत होती है। अगर ये चीजें हों तो हादसे से बचा जा सकता है। इसके लिए अगस्त 2023 में दो करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन इसे सचिवालय से मंजूरी नहीं मिली है।
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बीते साल रेजीडेंसी रोड में एक गली में तीन घोड़ों और एक व्यक्ति को करंट लग गया था। इसके अलावा गांधी नगर में ट्रांसफार्मर के पास रेहड़ी लगाने वाला भी करंट की चपेट में आया था। पनामा चौक में ट्रांसफार्मर में फाल्ट ठीक कर रहे कर्मचारी की करंट लगने से मौत हो गई थी। अभी तक सैकड़ों फाइलें मुआवजा राशि की स्वीकृति के लिए धूंल फांक रही हैं।
एक लाइनमैन के हवाले दो से तीन फीडर
जिले में 400 फीडरों को 150 लाइनमैन देख रहे हैं। यानी एक लाइनमैन के पास दो से तीन फीडरों का कार्यभार है। ऐसे में एक ही लाइनमैन को जल्दबाजी में काम करना पड़ता है। इस कारण भी हादसे ज्यादा होते हैं।
कोट
कर्मचारी 24 घंटे जान जोखिम में डालकर सेवाएं देते हैं। सुरक्षा किट मिलना जरूरी है। हर साल मौतें होती हैं। अस्थायी कर्मचारियों के लिए मुआवजे का प्रावधान किया जाना चाहिए।
- सचिन टिक्कू, संयोजक, जेएंडके पावर इंप्लाइज एंड इंजीनियर कोआर्डीनेशन कमेटी
कर्मचारियों की मौत होने पर मुआवजा देने के मामले लंबित हैं। कर्मचारियों को मुआवजा राशि मिलनी चाहिए। साथ ही सुरक्षा किट मुहैया हो। बारिश में करंट लगने के मामले ज्यादा आते हैं।
- अखिलेश कुमार, अध्यक्ष, पीडीडी डेली नीड वेजर कर्मचारी यूनियन
कोट
किट मुहैया करवाने के लिए मसला उच्च अधिकारियों के ध्यान में है। जैसे ही अनुमति मिलेगी किट मुहैया करवा दी जाएगी। पहले कुछ किट मुहैया भी करवाए गए हैं।
- मनहर गुप्ता, मुख्य अभियंता, बिजली कारपोरेशन