आखिर किसकी गोली से मारा गया आतंकी मोमिन
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लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कासिम उर्फ नावेद के पकड़े जाने और एक आतंकी को मार गिराने के लिए सुरक्षा बलों में क्रेडिट लेने की होड़ मची हुई है। सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ अपना-अपना दावा पेश कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार एक आतंकी को मार गिराने में बीएसएफ और सीआरपीएफ के बीच क्रेडिट लेने की होड़ लग गई है। सीआरपीएफ का दावा है कि आतंकी उनके सब इंस्पेक्टर सुरेश की गोली से मारा गया।
बस के बीच से बीएसएफ जवान बाहर नहीं निकल पाए। आतंकी बस के पीछे था और सामने से सुरेश ने गोली चलाकर उसे ढेर किया। जबकि बीएसएफ का दावा है कि बस में सवार एकमात्र हथियार बंद जवान ने आतंकी मोमिन को मार गिराया है।
समरौली के जंगलों में फिर तलाशी अभियान
सेना भी इस मामले में अपना पक्ष रख रही है। सेना अपना दावा पेश कर रही है कि आतंकी नावेद को उन्होंने जिंदा दबोचा है। उनकी टीम पहाड़ी पर जाकर आपरेशन कर रही थी।
हेलीकाप्टर से भी आतंकी की लोकेशन का पता किया गया। सेना के जवानों ने ही मौके पर पहुंचकर आतंकी को दबोच लिया। इस मामले में जम्मू कश्मीर पुलिस स्थानीय युवकों को आतंकी को पकड़ने का क्रेडिट दे रही है।
आतंकी हमले में शामिल दो आतंकियों के तीसरे साथी को देखे जाने की खबरों पर पुलिस ने समरौली के जंगलों में फिर तलाशी अभियान चलाया। तीसरे साथी की बात हमले के दिन से ही की जा रही है। कहा जा रहा है कि तीसरा व्यक्ति नावेद उस्मान उर्फ कासिम और मारे गए आतंकी मोमिन के साथ था।
वह गाइड या आतंकी हो सकता है। आसपास क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। हाईवे पर रोड ओपनिंग टीम की संख्या बढ़ा दी गई है। दोपहर बाद पुलिस को सूचना मिली कि संदिग्ध लोगों की गतिविधि देखी गई है। नरसू नाले के नजदीक जंगल में इस गतिविधि की सूचना पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया।