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ड्रोन हमले से आपदा तक, हर मोर्चे पर तैयारी: गोलाबारी हो या पहाड़ों पर तबाही, हर संकट में ढाल बनेंगे वॉलंटियर

Sat, 24 Oct 2026 12:46 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Sat, 24 Oct 2026 12:46 PM IST
सार

सेना सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की टीम तैयार कर रही है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों को प्राकृतिक आपदाओं, गोलाबारी, ड्रोन हमलों और साइबर खतरों से निपटने के तरीके सिखाए गए।
 

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Whether it is shelling or devastation in the mountains, volunteers will serve as a shield on every front.
राजोरी जिले के सरोल स्थित कोर बैटल स्कूल में सिविल डिफेंस का प्रशिक्षण लेते वाॅलंटियर। - फोटो : सेना

विस्तार

सीमावर्ती क्षेत्रों में गोलाबारी के दौरान नागरिकों की सुरक्षा का सवाल हो या पहाड़ी इलाकों में आपदा और भूस्खलन के बाद राहत कार्य, वाॅलंटियर हर मोर्चे पर ढाल बनकर डटे रहेंगे।

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इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सेना जम्मू-कश्मीर के ऐसे क्षेत्रों के न सिर्फ आम लोगों बल्कि राज्य आपदा मोचन बल को भी तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर फ्रंट लाइन प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की एक फौज तैयार करना है।
सेना ने जम्मू, सांबा, अखनूर, सुंदरबनी, नौशेरा और राजोरी जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों के अलावा पहाड़ी जिले डोडा के प्रतिभागियों को आपात स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया। राजोरी जिले के सरोल स्थित कोर बैटल स्कूल में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं से निपटने पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों को भी शामिल किया गया। उन्हें ड्रोन, हवाई हमलों, सूचना युद्ध और साइबर खतरों के बारे में प्रशिक्षित किया गया।

हनीट्रैप और साइबर अटैक पर फोकस
सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को हैनीट्रैप में फंसाने की पाकिस्तान लगातार साजिश करता है। ऐसे में युवाओं को साइबर खतरों को पहचाने और निपटने में दक्ष बनाया गया। सेना इस तरह का प्रशिक्षण अब जम्मू-कश्मीर के अन्य सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को भी देगी, ताकि आपदा के समय फ्रंट लाइन में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की फौज हो।

स्थानीय स्तर पर मदद पहुंचाने में मिलेगी सहायता
सशक्त नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र की थीम पर आयोजित ट्रेन विद योर आर्मी अभियान के तहत सेना की व्हाइट नाइट कोर ने उत्तरी कमान के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बदलते खतरों से निपटने के लिए तैयार किया है। इसका उद्देश्य नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और आपात स्थितियों में नागरिकों तथा सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना है। प्रशिक्षण प्राप्त स्वयंसेवक संकट के समय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग कर सकेंगे।

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