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Jammu: कहीं मलबे में तब्दील हुए मंदिर... कहीं तवी नदी ने बहा दी जिंदगी की कमाई; भूस्खलन और बाढ़ ने मचाई तबाही

Sat, 30 Aug 2025 04:16 PM IST
निकिता गुप्ता अंकित कुमार मिश्र अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू
अंकित कुमार मिश्र अमर उजाला, नेटवर्क जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Sat, 30 Aug 2025 04:16 PM IST
सार

जम्मू के पीरखो और बेलीचराना में भूस्खलन और तवी नदी के उफान से मंदिरों और घरों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे स्थानीय लोग परेशान हैं। मलबा हटाने और राहत कार्य में एक महीने का समय लग सकता है, और प्रशासनिक मदद की कमी से लोग दुखी हैं।
 

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Where there used to be a queue of devotees, now there is only debris
जम्मू भूस्खलन - फोटो : अभिषेक बड़ू

विस्तार

मंदिरों के शहर जम्मू में जहां रोज सुबह घंटे-घड़ियाल गूंजते और भक्तों की लंबी कतारें लगती थीं। वहां इन दिनों सिर्फ मलबा ही मलबा है। मंदिर प्रबंधन, स्थानीय लोग और भक्त बारी-बारी से इसकी सफाई करने में जुटे हैं। सभी एकसाथ भी जुट जाएं तो मलबे को हटाने में कम से कम एक माह लग जाएगा।

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जम्मू भूस्खलन - फोटो : अभिषेक बड़ू

वहीं शहर के रिहायशी इलाके बेलीचराना में भी लोग आंखों में आंसू लिए वक्त गुजार रहे हैं। चार दिन बाद भी उनकी मुश्किलें कम होने का काम नहीं ले रही हैं। मंदिर के महंत स्वामी महादेव सरस्वती ने बताया कि मलबा हटाने के लिए मंदिर की ओर से करीब 50 से अधिक लोगों को लगाया गया है लेकिन तीन दिन में केवल अभी प्रवेश द्वार ही साफ हुआ है। पूर्ण रूप से साफ होने में एक माह लग सकता है।इस कार्य को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन भी अपना अहम भूमिका निभा रहा है। मंदिर के सेवादार प्रवीण कुमार का कहना है कि जहां माथा टेकने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगती थी वहीं अब इन दिनों हाल ही में हुए तबाही का दृश्य देखने के लिए लोग आते हैं।

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जम्मू भूस्खलन - फोटो : अभिषेक बड़ू

इनसेटगाेशाला व पार्किंग में खड़ी गड़ियों को नुकसान
पीरखो मंदिर के महंत राजिंदर नाथ ने बताया कि मंदिर के मुख्य द्वार पर भारी भूस्खलन होने से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया था। इससे पार्किंग स्थल में खड़ी कई गड़ियां मलबे में दबकर ध्वस्त हो गईं। वहीं इस मलबे को हटाने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार पिछले तीन दिनों से प्रयास किया जा रहा है। कड़ी मशक्कत के बाद शुक्रवार को मंदिर के मुख्य द्वार तक श्रद्धालुओं का आवागमन बहाल किया गया लेकिन अभी पार्किंग में खड़ी गाड़ियों को मलबे से निकालने का काम जारी है। इस आपदा में गोशाला की एक गाय और एक बकरी मलबे में दबकर मर गई। 

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जम्मू भूस्खलन - फोटो : अभिषेक बड़ू

तवी की उफान से ढह गया मंदिर का हिस्सा
विक्रम चौक स्थित महाकाल शक्ति पीठ के महंत भरतदास ने बताया कि तवी नदी में उफान आने से मंदिर ही नहीं बल्कि मंदिर के समीप स्थित आरती घाट भी पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। इसको लेकर अभी तक कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई।

इससे मंदिर में रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं के अंदर डर बना रहता है।श्रीराम मंदिर आश्रम के महंत केशव दास ने बताया कि तवी की तबाही से मंदिर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे मंदिर के अंदर रखा सारा सामान मलबे में तब्दील होकर नष्ट हो गया। चार दिन हुए पर मुश्किलें मानो बढ़ती जा रही हैं पीरखो के स्थानीय निवासी मानिक चंद का कहना है कि बीते चार दिन से लगे हैं। सुबह होते ही मलबा हटाने का काम शुरू कर देते हैं। वहीं चेतन का कहना है कि मुश्किलें घटने के बजाय बढ़ती दिख रही हैं। 

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जम्मू भूस्खलन - फोटो : अभिषेक बड़ू

बाढ़ के एक झटके में बह गई जिंदगी भर की कमाई 
शहर के बेलीचराना में रहने वाले लोगों को तवी नदी के उफान से मिले जख्म अभी भी हरे हैं, मौजूदा हालात यह है कि इन लोगों का मकान, दुकान और जिंदगी भर की जमा पूंजी तवी में बह चुकी है। अब इन्हें नए सिरे से दोबारा जिंदगी शुरुआत करनी है।

ऐसे में इन लोगों का कहना है कि यहां पर हम लोगों की सुध लेने के लिए कोई नही आता है और जो आलाकमान आते भी हैं वो केवल ब्रिज से होकर लौट जाते हैं। इससे पिछले तीन दिनों से हम सभी लोगों काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मशकूर अहमद ने बताया कि तवी के इस विकराल रुप को हमने पहली बार देखा। पानी का बहाव इतना तेज था कि हमारा मकान इसमें बह गया। इससे काफी परेशानी हो रही है।

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जम्मू भूस्खलन - फोटो : अभिषेक बड़ू

रोती बिलखती हुई सलीमा ने बताया कि इस तबाही से हमारे पति और बेटों ने मिलकर तवी के किनारे तीन मकान बनाए थे और तवी की तबाही ने एक ही झटके में हमारे पति व बेटे के जिदंगी भर की कमाई अपने साथ बहा ले गई और मौजूदा हालात यह है कि इस मलबे के नीचे दबे कुछ जरुरी सामानों को ढूंढना पड़ रहा है। करीब 48 वर्षीय गुलाम रसूल का कहना है कि हम लोगों की सुध लेने के लिए यहां पर न कोई अभी तक कोई प्रशासनिक अधिकारी आए और न ही कोई नेता या मंत्री। हालात बदतर हो गए हैं। काफी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।

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