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Jammu News: पुराने शहर से छन्नी तक घरों में मल-मूत्र मिश्रित पानी हुआ सप्लाई, नमूने में मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया
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जीवन नगर में पाइप लाइन की लीकेज ठीक करता जल शक्ति विभाग का कर्मचारी। सौ. स्थानीय
जम्मू। शहर में सरकारी पानी पीने लायक तो दूर घरेलू कामकाज के लिए भी असुरक्षित हो रहा है। बोरिया फिल्ट्रेशन प्लांट और उसकी एसोसिएटेड वाटर टेस्टिंग लैब में नमूनों की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक पुराने शहर से लेकर छन्नी तक बिछी मुख्य पाइपलाइन में सीवरेज का गंदा पानी मिल गया है जिस कारण मल-मूत्र मिश्रित पानी घरों और किचन तक पहुंच रहा है। दूषित पानी में खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिले हैं।
बोरिया फिल्ट्रेशन प्लांट और तवी लिफ्ट पंप स्टेशन के माध्यम से नदी के दोनों हिस्सों में बसे प्रमुख इलाकों की लगभग 4.5 लाख से अधिक आबादी को पानी की सप्लाई की जाती है। पानी में खतरनाक बैक्टीरिया मिलने की रिपोर्ट सामने आते ही जल शक्ति विभाग (पीएचई) के उच्चाधिकारियों में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तुरंत प्लांट का निरीक्षण किया और पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए।
टीमों ने जब प्रभावित आवासीय इलाकों में जांच की तो पाया कि कई पुरानी पानी की पाइपलाइन सीवरेज या गंदे नालों के बिल्कुल साथ गुजर रही हैं। लीकेज के कारण नालों का गंदा पानी मिक्स हो रहा है और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया सीधे रसोई तक पहुंच रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया है। बोरिया प्लांट की लैब में पानी के केमिकल और बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट की संख्या बढ़ा दी है।
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क्लोरीनेशन की मात्रा बढ़ाई, तीन दिन तक मरम्मत की
अधिकारियों का दावा है कि जिन इलाकों से सीवरेज मिक्सिंग की शिकायतें आ रही हैं वहां तुरंत खोदाई करके लीकेज को दुरुस्त किया जा रहा है। साथ ही मुख्य वाटर बूस्टिंग स्टेशनों पर क्लोरीनेशन की मात्रा बढ़ाई जा रही है ताकि पानी में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म किया जा सके। तकनीकी टीम ने तीन दिन तक पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य किया और क्लोरीनेशन प्रक्रिया पूरी कर स्वच्छ पानी की सप्लाई को सुचारु किया है। इसके अलावा डिवीजन-2 के अंतर्गत आने वाले जीवन नगर में भी मुख्य पाइपलाइन में लीकेज की शिकायत मिली थी जहां सुबह से ही टीम कार्य में जुटी रही और शाम चार बजे के बाद समस्या दूर की गई।
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लैब टेस्ट में फेल हुए सैंपल
घरों तक पहुंचे गंदे पानी के नमूनों का जब एसोसिएटेड वाटर टेस्टिंग लैब में मल्टीपल ट्यूब फर्मेंटेशन टेस्ट किया गया तो हैरान करने वाले नतीजे दिखे। सैंपल ट्यूब में डालते ही पानी का रंग बदल गया और गैस बनने लगी। विशेषज्ञों ने प्रति 100 मिलीलीटर पानी में बैक्टीरिया की संभावित संख्या की गणना कर रिपोर्ट को तैयार किया है।
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इतना खतरनाक है बैक्टीरिया
विशेषज्ञों के अनुसार ई-कोलाई बैक्टीरिया की विशेष प्रजाति ओ-157 एच 7 जानलेवा होती है। शरीर में प्रवेश करने के बाद यह शिगा टॉक्सिन नामक खतरनाक जहर बनाती है जो सीधे आंतों की परत पर हमला करता है। शुरुआती लक्षण पेट में तेज मरोड़ उठना, दर्द होना और उल्टी आना, पानी की तरह दस्त जो बाद में खूनी दस्त का रूप ले लेता है। संक्रमण बढ़ने पर पांच से 10 प्रतिशत मामलों में मरीजों की किडनी फेल हो जाती है जिसे चिकित्सकीय भाषा में मोलिटिक यूरीमिक सिंड्रोम कहा जाता है।
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पुराने शहर के रघुनाथ बाजार, परेड, रेजिडेंसी रोड, जानीपुर, तालाब तिल्लो और अन्य क्षेत्रों से जहां भी दूषित पानी की शिकायत मिल रही है। तुरंत टीम भेजकर मरम्मत कराई जा रही है। कुछ स्थानों पर गंदे पानी की शिकायत के बाद सैंपलिंग कराई गई थी जिसकी रिपोर्ट आई है।
इंजीनियर तेजिंदर सिंह, एक्सईएन, डिविजन-एक
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छन्नी और गुज्जर नगर में दूषित पानी की शिकायत मिली थी। लैब टेस्ट में नमूने फेल पाए गए। लीकेज को दुरुस्त करा दिया गया है और अब स्वच्छ पानी की सप्लाई हो रही है। जहां भी लीकेज मिलेगी, तुरंत मरम्मत होगी।
इंजीनियर संजीव गुप्ता, एक्सईएन डिविजन-दो
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बोरिया फिल्ट्रेशन प्लांट और तवी लिफ्ट पंप स्टेशन के माध्यम से नदी के दोनों हिस्सों में बसे प्रमुख इलाकों की लगभग 4.5 लाख से अधिक आबादी को पानी की सप्लाई की जाती है। पानी में खतरनाक बैक्टीरिया मिलने की रिपोर्ट सामने आते ही जल शक्ति विभाग (पीएचई) के उच्चाधिकारियों में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तुरंत प्लांट का निरीक्षण किया और पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए।
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टीमों ने जब प्रभावित आवासीय इलाकों में जांच की तो पाया कि कई पुरानी पानी की पाइपलाइन सीवरेज या गंदे नालों के बिल्कुल साथ गुजर रही हैं। लीकेज के कारण नालों का गंदा पानी मिक्स हो रहा है और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया सीधे रसोई तक पहुंच रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया है। बोरिया प्लांट की लैब में पानी के केमिकल और बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्ट की संख्या बढ़ा दी है।
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क्लोरीनेशन की मात्रा बढ़ाई, तीन दिन तक मरम्मत की
अधिकारियों का दावा है कि जिन इलाकों से सीवरेज मिक्सिंग की शिकायतें आ रही हैं वहां तुरंत खोदाई करके लीकेज को दुरुस्त किया जा रहा है। साथ ही मुख्य वाटर बूस्टिंग स्टेशनों पर क्लोरीनेशन की मात्रा बढ़ाई जा रही है ताकि पानी में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म किया जा सके। तकनीकी टीम ने तीन दिन तक पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य किया और क्लोरीनेशन प्रक्रिया पूरी कर स्वच्छ पानी की सप्लाई को सुचारु किया है। इसके अलावा डिवीजन-2 के अंतर्गत आने वाले जीवन नगर में भी मुख्य पाइपलाइन में लीकेज की शिकायत मिली थी जहां सुबह से ही टीम कार्य में जुटी रही और शाम चार बजे के बाद समस्या दूर की गई।
लैब टेस्ट में फेल हुए सैंपल
घरों तक पहुंचे गंदे पानी के नमूनों का जब एसोसिएटेड वाटर टेस्टिंग लैब में मल्टीपल ट्यूब फर्मेंटेशन टेस्ट किया गया तो हैरान करने वाले नतीजे दिखे। सैंपल ट्यूब में डालते ही पानी का रंग बदल गया और गैस बनने लगी। विशेषज्ञों ने प्रति 100 मिलीलीटर पानी में बैक्टीरिया की संभावित संख्या की गणना कर रिपोर्ट को तैयार किया है।
इतना खतरनाक है बैक्टीरिया
विशेषज्ञों के अनुसार ई-कोलाई बैक्टीरिया की विशेष प्रजाति ओ-157 एच 7 जानलेवा होती है। शरीर में प्रवेश करने के बाद यह शिगा टॉक्सिन नामक खतरनाक जहर बनाती है जो सीधे आंतों की परत पर हमला करता है। शुरुआती लक्षण पेट में तेज मरोड़ उठना, दर्द होना और उल्टी आना, पानी की तरह दस्त जो बाद में खूनी दस्त का रूप ले लेता है। संक्रमण बढ़ने पर पांच से 10 प्रतिशत मामलों में मरीजों की किडनी फेल हो जाती है जिसे चिकित्सकीय भाषा में मोलिटिक यूरीमिक सिंड्रोम कहा जाता है।
पुराने शहर के रघुनाथ बाजार, परेड, रेजिडेंसी रोड, जानीपुर, तालाब तिल्लो और अन्य क्षेत्रों से जहां भी दूषित पानी की शिकायत मिल रही है। तुरंत टीम भेजकर मरम्मत कराई जा रही है। कुछ स्थानों पर गंदे पानी की शिकायत के बाद सैंपलिंग कराई गई थी जिसकी रिपोर्ट आई है।
इंजीनियर तेजिंदर सिंह, एक्सईएन, डिविजन-एक
छन्नी और गुज्जर नगर में दूषित पानी की शिकायत मिली थी। लैब टेस्ट में नमूने फेल पाए गए। लीकेज को दुरुस्त करा दिया गया है और अब स्वच्छ पानी की सप्लाई हो रही है। जहां भी लीकेज मिलेगी, तुरंत मरम्मत होगी।
इंजीनियर संजीव गुप्ता, एक्सईएन डिविजन-दो