जम्मू-कश्मीर में नहीं हैं गोली लगने से संदिग्ध मौत के मामलों की विसरा जांच के इंतजाम
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मौत के कारणों की तह तक पहुंचने के लिए जम्मू-कश्मीर के कई मामलों के विसरा नमूने दूसरे राज्यों की लैब में बंद पड़े हैं। यह मामले गोली लगने से हुई संदिग्ध मौतों के हैं। प्रदेश में फोरेंसिंग साइंस लैब में इस श्रेणी के मामलों की जांच की सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे करीब 50 मामले हैं जो चंडीगढ़ समेत देश की अन्य प्रमुख फोरेंसिंक लैब में जांच निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।
गोली लगने से होने वाली संदिग्ध मौत में जांच एजेंसी के सामने मौत के कारणों से लेकर हत्या के संदेह को पुष्ट करने की चुनौती होती है। इसी तहकीकात के लिए मृतक का विसरा लिया जाता है। जम्मू-कश्मीर से 50 के करीब विसरा दूसरे राज्यों की लैब में पड़े हैं।
जम्मू में इंस्पेक्टर की पत्नी, बाड़ी ब्राह्मणा में महिला सैन्य अधिकारी की मौत भी इसी तरह से हुई है। गोली किसी ने चलाई या फिर मामला खुदकुशी का था। इन सवालों का जवाब विसरा जांच से ही मिलना है।
बहुचर्चित नेहा भसीन मामले की जांच अब तक लंबित
बहुचर्चित नेहा भसीन और सैन्य अधिकारी अनीता कुमारी की मौत मामले की जांच अब तक लंबित पड़ी हुई है। इनकी जांच के लिए एसआईटी तक बनाई गईं। लेकिन जांच पूरी नहीं हो पाई है। पुलिस की तरफ से भी जांच के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया गया है।
यहां तक कि इन मामलों में लाई डिटेक्ट टेस्ट भी राज्य से बाहर जाकर करवाना पड़ा था। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के घर पर युवक की मौत मामले के विसरा जांच की रिपोर्ट भी कई महीनों के बाद आई है।