फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   vhp starts preparations of massive movement

विश्व हिंदू परिषद और भाजपा की बड़ी लड़ाई की तैयारी, इस बार ये है एजेंडा

Sat, 24 Dec 2016 04:18 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Sat, 24 Dec 2016 04:18 PM IST
विज्ञापन
vhp starts preparations of massive movement
vhp - फोटो : File Photo

रोहिंग्या तथा बांग्लादेशियों के खिलाफ भाजपा और विहिप लामबंद होने लगे हैं। विहिप ने इन्हें हटाने के लिए आंदोलन की चेतावनी दी है। विहिप के अध्यक्ष लीलाकरण शर्मा का कहना है कि सरकार को इनके बारे में विस्तृत छानबीन कर इन्हें शहर से हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए।

विज्ञापन


यदि सरकार ने इसमें हीलाहवाली की तो आंदोलन किया जाएगा। लोगों को भी इस खतरे के प्रति जागरूक किया जाएगा। भाजपा भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की रणनीति तैयार करने में जुटी है।
विज्ञापन


प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा का कहना है कि विधायक दल की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी। कोशिश होगी कि विधानसभा में सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर दिलाया जाए। इस बारे में एक स्पष्ट नीति बननी चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

हजारों किमी दूर आकर बसे हैं सैकड़ो परिवार

vhp starts preparations of massive movement
रोहिंग्या समुदाय की बढ़ती तादाद बनी खतरा - फोटो : अमर उजाला
रियासत में 2008 के बाद से रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी शरणार्थियों का आना अचानक तेज हो गया। जम्मू के विभिन्न इलाकों में रहने वाले इन लोगों का कहना है कि म्यांमार में जब उन पर जुल्म बढ़ा तो जान बचाने की खातिर वे भारत चले आए। रोजगार कमाने की नीयत से जम्मू में ठौर मिला। घर की याद तो सताती है, लेकिन फिलहान वापस लौटने का कोई इरादा नहीं। 

नरवाल में रहने वाले मोहम्मद हारून ने बताया कि वह छह-सात साल पहले भारत आए। म्यांमार में उनके पिता और चाचा की हत्या कर दी गई। वे किसी तरह जान बचाकर भारत आए। कुछ दिनों तक दिल्ली रहे। फिर जम्मू चले आए। जम्मू के लोग काफी अच्छे हैं। कभी भी इन्होंने सताया नहीं। यहां काम की भी कमी नहीं है।

जाहिद का कहना है कि वह 2009 में यहां आया। पहले राजस्थान में रहा, लेकिन वहां फाकाकशी की नौबत आ गई। वहां काम करने वाले कुछ लोगों से जम्मू के बारे में पता चला तो वह परिवार के साथ यहां चले आए। म्यांमार के हालात इतने खराब हैं कि वहां लौटने के बारे में फिलहाल सोचा भी नहीं जा सकता।

यहां जब तक काम मिलेगा रहेंगे नहीं तो फिर कहीं और शरण ली जाएगी। मो. दानिश का कहना है कि वह 2012 से यहां रह रहा है। उसके कुछ परिचित पहले से रह रहे थे। इसकी जानकारी होने पर वह सीधे यहां चला आया। यहां सकून है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed