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उड़ी में गूंजी शहनाई: LoC के पास बसे चुरुंडा गांव में कभी साधारण समारोह तक सीमित थीं शादियां, अब बज रहे ढोल
Tue, 02 May 2023 09:59 AM IST
kumar गुलशन कुमार
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Tue, 02 May 2023 09:59 AM IST
सार
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र में शादियां एक साधारण समारोह तक सीमित कर दी गई थीं और सभी रस्में पाकिस्तानी सेना को जगाए बिना पूरी गोपनीयता से पूरी की जाती थीं।
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Marriage at LoC
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के उड़ी सेक्टर में एलओसी के पास बसा चुरुंडा गांव चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पाकिस्तान की ओर से की गई गोलाबारी के कारण नहीं, बल्कि शांतिपूर्वक माहौल के चलते। रविवार को हुई एक शादी कई दशकों में इस गांव में धूमधाम से मनाई जाने वाली पहली शादी बन गई। इसमें न केवल स्थानीय लोग शामिल हुए बल्कि दूर-दराज के रिश्तेदार भी शादी में पहुंचे। इस दौरान दावत का लुत्फ उठाया। बारात भी ढोल-नगाड़ों के साथ आई।
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स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र में शादियां एक साधारण समारोह तक सीमित कर दी गई थीं और सभी रस्में पाकिस्तानी सेना को जगाए बिना पूरी गोपनीयता से पूरी की जाती थीं। स्थानीय लाल हुसैन ने कहा, न तो ढोल-नगाड़े और न बड़ी दावतें होती थीं, न ही मेहमानों को शादी के लिए आमंत्रित किया जाता था क्योंकि पाकिस्तानी सैनिक गांव पर गोलीबारी का सहारा लेते थे। लेकिन पिछले दो वर्षों से माहौल में बदलाव आया है, चीजें इतनी शांतिपूर्ण हो गई हैं कि हम धूमधाम से विवाह कर रहे हैं।
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लोगों ने बताया कि दो साल पहले फायरिंग व गोलाबारी का खतरा बना रहता था। लोगों को कम ही बुलाया जाता था। दोनों देशों के बीच युद्ध विराम के बाद सीमा पर रहने वाले लोग शांतिपूर्वक जीवन जी रहे हैं। मैं अपनी बहन की शादी धूमधाम से कर रहा हूं और मेहमानों को दावत पर बुला पा रहा हूं।
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शादी में आए मेहमान भी खुश नजर आए। एक अतिथि ओवैस अहमद ने कहा, मैंने चुरुंडा का नाम बहुत सुना था और यहां आने का मन था, लेकिन चुनौती के कारण यहां नहीं आ पा रहा था। अल्लाह से दुआ करता हूं कि दोनों देशों के रिश्ते अच्छे रहें, ताकि यहां के बच्चे और लोग इसी तरह से खुशी मनाएं।
गौरतलब है कि भारतीय सेना क्षेत्र के लिए बड़ी विकास परियोजनाओं की योजना बना रही है, क्योंकि नियंत्रण रेखा पर भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच युद्धविराम चल रहा है। जबकि सेना ने कमान पोस्ट पर अमन सेतु को पहले ही एक पर्यटक केंद्र में बदल दिया है, सीमावर्ती गांवों को भी संभावित पर्यटन स्थलों की सूची में जोड़ा गया है। एक अधिकारी ने कहा, चुरुंडा गांव हाजीपीर दर्रे के ठीक नीचे जीरो लाइन पर है और पुंछ से सिर्फ 20 किलोमीटर दूर है। यदि क्षेत्र शांतिपूर्ण होता, तो हम एक सड़क लिंक का संचालन कर सकते थे जैसा कि 1947 से पहले हुआ करता था। उन्होंने कहा कि लेकिन, कम से कम इस शादी ने लोगों को उम्मीद की एक किरण दिखी है, कि अगर शांति बनी रही तो उनका जीवन भी देश के किसी अन्य क्षेत्र के लोगों की तरह हो सकता है।