बारिश ने तबाह की दो सीजन की फसल

Sandeep Tomar Updated Tue, 07 Apr 2015 10:56 PM IST
unseasonal rain destroyed crop in jammu
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लगातार फसलों के दो सीजनों की तबाही झेल चुके  किसानों के लिए तीसरे सीजन में भी राहत मिलती नहीं दिख रही। एक महीने के बाद खरीफ सीजन में फसलें लगाई जानी हैं, लेकिन इसकी तैयारियां न के बराबर हैं। खरीफ सीजन में मुख्य रूप से धान, मक्की और दलहन लगाई जाती है।
पहाड़ी इलाकों में अगले महीने ही बुआई शुरू होनी है, लेकिन अभी तक किसानों के पास बीज नहीं पहुंचा। नहरों की हालत भी ऐसी नहीं कि खरीफ सीजन में फसलों के अंतिम छोर तक पानी पहुंच पाए। जम्मू संभाग में दो लाख हेक्टेयर पर धान, डेढ़ लाख हेक्टेयर पर मक्की और 60 हजार हेक्टेयर पर मूंग, माश लगती है। पहाड़ी इलाकों में मक्की और समतल इलाकों में धान लगेगी।

पहाड़ी इलाकों में मई महीने में मक्की की बुआई होनी है। इसके लिए किसानों के पास अभी तक बीज नहीं पहुंचा। जम्मू के समतल इलाकों के लिए भी धान का बीज नहीं पहुंचा। जम्मू संभाग में कृषि के लिए किसान नहरों पर निर्भर हैं। पिछले सात महीनों में हुई बारिश की वजह से नहरों की हालत खराब हो गई। कई जगहों से नहरें टूट चुकी हैं।

मौसम सबसे बड़ा दुश्मन
पिछले सात महीने में बेमौसम बारिश ने किसानों को परेशान करके रखा हुआ है। किसान काउंसिल के प्रधान तेजिंदर सिंह का कहना है कि पिछली दो फसलें तबाह हो चुकी हैं। अब मौसम से डर लग रहा है। कोई गारंटी नहीं कि खरीफ सीजन में मौसम विलेन न बने।
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पिछले दो सीजन भी तबाह

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