बारिश ने तबाह की दो सीजन की फसल
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लगातार फसलों के दो सीजनों की तबाही झेल चुके किसानों के लिए तीसरे सीजन में भी राहत मिलती नहीं दिख रही। एक महीने के बाद खरीफ सीजन में फसलें लगाई जानी हैं, लेकिन इसकी तैयारियां न के बराबर हैं। खरीफ सीजन में मुख्य रूप से धान, मक्की और दलहन लगाई जाती है।
पहाड़ी इलाकों में अगले महीने ही बुआई शुरू होनी है, लेकिन अभी तक किसानों के पास बीज नहीं पहुंचा। नहरों की हालत भी ऐसी नहीं कि खरीफ सीजन में फसलों के अंतिम छोर तक पानी पहुंच पाए। जम्मू संभाग में दो लाख हेक्टेयर पर धान, डेढ़ लाख हेक्टेयर पर मक्की और 60 हजार हेक्टेयर पर मूंग, माश लगती है। पहाड़ी इलाकों में मक्की और समतल इलाकों में धान लगेगी।
पहाड़ी इलाकों में मई महीने में मक्की की बुआई होनी है। इसके लिए किसानों के पास अभी तक बीज नहीं पहुंचा। जम्मू के समतल इलाकों के लिए भी धान का बीज नहीं पहुंचा। जम्मू संभाग में कृषि के लिए किसान नहरों पर निर्भर हैं। पिछले सात महीनों में हुई बारिश की वजह से नहरों की हालत खराब हो गई। कई जगहों से नहरें टूट चुकी हैं।
मौसम सबसे बड़ा दुश्मन
पिछले सात महीने में बेमौसम बारिश ने किसानों को परेशान करके रखा हुआ है। किसान काउंसिल के प्रधान तेजिंदर सिंह का कहना है कि पिछली दो फसलें तबाह हो चुकी हैं। अब मौसम से डर लग रहा है। कोई गारंटी नहीं कि खरीफ सीजन में मौसम विलेन न बने।
पिछले दो सीजन भी तबाह
2014 सितंबर में आई बाढ़ के कारण खरीफ सीजन में मक्की और धान की अढ़ाई लाख हेक्टेयर पर लगी फसल तबाह हो गई। इसके बाद मार्च और अप्रैल में हुई बारिश की वजह से जम्मू संभाग के समतल इलाके में लगी डेढ़ लाख हेक्टेयर गेहूं की फसल तबाह हो गई। पहाड़ी इलाकों में भी यही हाल है।
न मुआवजा न आगे की तैयारी
पिछली दो फसलों के हुए नुकसान में किसानों को मुआवजा नहीं मिला। खरीफ सीजन के नुकसान की रिपोर्ट बनी, लेकिन इसके लिए केंद्र की ओर से फंड नहीं मिला। रबी फसल का नुकसान हुआ, इसकी अभी तक रिपोर्ट नहीं बनी। खरीफ सीजन की फसल के लिए कोई बीमा योजना नहीं है।
खरीफ सीजन के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। किसानों को वक्त पर बीज दिया जाएगा। सिंचाई विभाग को टूटी नहरें दुरुस्त करने को बोला है। एक-दो दिन में रबी सीजन के नुकसान की रिपोर्ट तैयार होगी, किसानों को जल्द मुआवजा मिलेगा।
कृषि मंत्री, गुलाम नबी लोन