{"_id":"d8dba6ee51ffcaea7c7cc6c21d139f90","slug":"unemployment-is-a-big-challenge-for-fm-drabu-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह लाख की फौज, द्राबू के लिए चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह लाख की फौज, द्राबू के लिए चुनौती
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 17 Mar 2015 01:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक ओर बाढ़ से हुए नुकसान और दूसरी ओर बीमार उद्योग। इन सबके बीच जब अर्थशास्त्री और वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू अपना मेडन बजट पेश करेंगे, तो उनके सामने बेरोजगार युवकों की फौज चुनौती के सामान होगी। वर्तमान में रियासत में छह लाख युवा पंजीकृत बेरोजगार हैं। रियासत के उद्योगों में इन युवाओं को समायोजित करने की क्षमता नहीं है। बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसीडेंट अनिल सूरी कहते हैं कि रियासत में नए उद्योग आ नहीं रहे।
विज्ञापन
पुराने उद्योगों के उत्थान के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे। ऐसे में इन उद्योगों में बेरोजगारों को समायोजित कैसे किया जा सकता है। वित्त मंत्री से उद्योगों को काफी उम्मीदें हैं। यदि वित्त मंत्री बजट में उद्योगों के लिए कुछ खास इन्सेंटिव का प्रावधान करते हैं तो उद्योगों को नई जान मिलेगी। इसके अलावा बाहरी राज्यों से भी उद्योग रियासत में कदम रखेंगे।
विज्ञापन
कश्मीर सिविल सोसाइटी के सदस्य शकील कलंदर कहते हैं कि कश्मीर में बेरोजगार युवकों को समायोजित करना ज्यादा मुश्किल है। यहां बाढ़ आपदा के बाद इंडस्ट्रियल एरिया पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। इससे बड़ी संख्या में युवक बेरोजगार हुए हैं। जब तक उद्योगों को नई जान नहीं मिलती, युवाओं को रोजगार मिलना मुश्किल है। इसके अलावा पर्यटन क्षेत्र को भी बाढ़ का भारी नुकसान पहुंचा है।
विज्ञापन
वहां भी अभी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार नहीं मिल सकता है। यही कारण है कि कश्मीर का युवा वर्ग अन्य राज्यों का रुख करने को मजबूर है। कलंदर कहते हैं कि वित्त मंत्री द्राबू समझदार हैं और उम्मीद है कि वह अपने पहले बजट में बेरोजगारी दूर करने के लिए कुछ खास कदम उठाएंगे।