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Jammu News: जम्मू-कश्मीर में राहत एवं पुनर्वास के लिए विधायक ने मांगा विशेष पैकेज
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उधमपुर। उधमपुर पूर्व के अपने निर्वाचन क्षेत्र में बारिश प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावित परिवारो
- फोटो : लालबाग पार्क में गणेश महोत्सव के पंडाल से पानी बाहर निकालते समिति के पदाधिकारी।
-रणबीर सिंह पठानिया ने व्यापक स्तर पर हो रहे खनन को बताया तबाही बढ़ाने का कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मौसम में सुधार होने पर अपने उधमपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के रठियान (डीपीएस के पास), चन्नी मोड़, सत्तेनी, सौंथा, कशीराह, क्रोवा, कावा, जगानू और रिट्टी इत्यादि क्षेत्रों का विधायक रणबीर सिंह पठानिया ने वीरवार को दौरा कर नुकसान का जायजा लिया। उन्हाेंने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और तत्काल राहत कार्यों के निर्देश दिए।
पठानिया ने इस बात पर ज़ोर दिया कि व्यापक तबाही सिर्फ़ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि अनियमित और अवैध खनन के कारण और भी बढ़ गई है। उन्होंने केंद्र सरकार से 2014 की श्रीनगर बाढ़ की तर्ज़ पर जम्मू और कश्मीर को पूरी तरह से उबारने में मदद के लिए एक विशेष केंद्रीय पैकेज की घोषणा करने का आग्रह किया।
उन्होंने गंभीर चिंता जताई कि जल निस्पंदन संयंत्रों, पंपिंग स्टेशनों, पुलों, सड़कों और वन क्षेत्रों के बेहद क़रीब अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे नदी तल अस्थिर हो रहे हैं, मिट्टी का कटाव हो रहा है और सुरक्षात्मक तटबंध कमज़ोर हो रहे हैं। इन अवैज्ञानिक गतिविधियों ने बाढ़ के प्रभाव को बढ़ा दिया है, जिससे एक प्राकृतिक आपदा कहीं अधिक गंभीर संकट में बदल गई है।
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उन्होंने कहा, खनन से उत्पन्न पर्यावरणीय व्यवधान के कारण उधमपुर में तबाही जम्मू-कश्मीर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में कई गुना ज़्यादा है।
वहीं स्थानीय लोगों के साथ बातचीत के दौरान, पठानिया ने कहा कि परिवारों, किसानों और छोटे व्यापारियों को हुए अधिकांश नुकसान एसडीआरएफ मानदंडों के तहत मुआवज़े के योग्य नहीं हैं, और राज्य सरकार द्वारा घोषित राशि को उन्होंने सागर में एक बूँद के समान बताया।
उन्होंने मोदी सरकार से 2014 की श्रीनगर बाढ़ की तर्ज पर एक विशेष पैकेज की घोषणा करने का आग्रह किया, जिसमें व्यापक राहत, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की बहाली, आर्थिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने और सामान्य स्थिति बहाल करने और जम्मू-कश्मीर को और अधिक लचीला बनाने के लिए दीर्घकालिक बाढ़-निवारण उपायों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को राहत वितरण की दैनिक निगरानी सुनिश्चित करते हुए आश्रय, राशन, पेयजल, दवाइयाँ और अस्थायी संपर्क प्रदान करने का भी निर्देश दिया।
इसके अतिरिक्त पठानिया ने सड़कों, पुलों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, सिंचाई नहरों और सार्वजनिक उपयोगिताओं को मज़बूत करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया और इस बात पर ज़ोर दिया कि बाढ़ प्रबंधन और आपदा तैयारी वार्षिक बजट का एक अभिन्न अंग होनी चाहिए, जिसमें तटबंधों, गाद निकालने, सुरक्षात्मक दीवारों और मज़बूत बुनियादी ढाँचे के लिए धन आवंटित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह आपदा कठिन सबक देती है जिसे भविष्य में आपदाओं को रोकने के लिए तुरंत सीखा और लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से केवल प्रतिक्रियात्मक राहत उपायों के बजाय एक सक्रिय, दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
इसके साथ ही उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि मोदी सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और इस बात पर ज़ोर दिया कि पुनर्वास के साथ-साथ सुरक्षा, रोकथाम और दीर्घकालिक लचीलेपन के उपाय भी किए जाने चाहिए।
इस मौके पर उनके साथ राजस्व, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, लोक निर्माण विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, एसडीआरएफ, पुलिस, गैर सरकारी संगठनों और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मौसम में सुधार होने पर अपने उधमपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के रठियान (डीपीएस के पास), चन्नी मोड़, सत्तेनी, सौंथा, कशीराह, क्रोवा, कावा, जगानू और रिट्टी इत्यादि क्षेत्रों का विधायक रणबीर सिंह पठानिया ने वीरवार को दौरा कर नुकसान का जायजा लिया। उन्हाेंने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और तत्काल राहत कार्यों के निर्देश दिए।
पठानिया ने इस बात पर ज़ोर दिया कि व्यापक तबाही सिर्फ़ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि अनियमित और अवैध खनन के कारण और भी बढ़ गई है। उन्होंने केंद्र सरकार से 2014 की श्रीनगर बाढ़ की तर्ज़ पर जम्मू और कश्मीर को पूरी तरह से उबारने में मदद के लिए एक विशेष केंद्रीय पैकेज की घोषणा करने का आग्रह किया।
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उन्होंने गंभीर चिंता जताई कि जल निस्पंदन संयंत्रों, पंपिंग स्टेशनों, पुलों, सड़कों और वन क्षेत्रों के बेहद क़रीब अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे नदी तल अस्थिर हो रहे हैं, मिट्टी का कटाव हो रहा है और सुरक्षात्मक तटबंध कमज़ोर हो रहे हैं। इन अवैज्ञानिक गतिविधियों ने बाढ़ के प्रभाव को बढ़ा दिया है, जिससे एक प्राकृतिक आपदा कहीं अधिक गंभीर संकट में बदल गई है।
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उन्होंने कहा, खनन से उत्पन्न पर्यावरणीय व्यवधान के कारण उधमपुर में तबाही जम्मू-कश्मीर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में कई गुना ज़्यादा है।
वहीं स्थानीय लोगों के साथ बातचीत के दौरान, पठानिया ने कहा कि परिवारों, किसानों और छोटे व्यापारियों को हुए अधिकांश नुकसान एसडीआरएफ मानदंडों के तहत मुआवज़े के योग्य नहीं हैं, और राज्य सरकार द्वारा घोषित राशि को उन्होंने सागर में एक बूँद के समान बताया।
उन्होंने मोदी सरकार से 2014 की श्रीनगर बाढ़ की तर्ज पर एक विशेष पैकेज की घोषणा करने का आग्रह किया, जिसमें व्यापक राहत, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की बहाली, आर्थिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने और सामान्य स्थिति बहाल करने और जम्मू-कश्मीर को और अधिक लचीला बनाने के लिए दीर्घकालिक बाढ़-निवारण उपायों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को राहत वितरण की दैनिक निगरानी सुनिश्चित करते हुए आश्रय, राशन, पेयजल, दवाइयाँ और अस्थायी संपर्क प्रदान करने का भी निर्देश दिया।
इसके अतिरिक्त पठानिया ने सड़कों, पुलों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, सिंचाई नहरों और सार्वजनिक उपयोगिताओं को मज़बूत करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया और इस बात पर ज़ोर दिया कि बाढ़ प्रबंधन और आपदा तैयारी वार्षिक बजट का एक अभिन्न अंग होनी चाहिए, जिसमें तटबंधों, गाद निकालने, सुरक्षात्मक दीवारों और मज़बूत बुनियादी ढाँचे के लिए धन आवंटित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह आपदा कठिन सबक देती है जिसे भविष्य में आपदाओं को रोकने के लिए तुरंत सीखा और लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से केवल प्रतिक्रियात्मक राहत उपायों के बजाय एक सक्रिय, दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
इसके साथ ही उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि मोदी सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और इस बात पर ज़ोर दिया कि पुनर्वास के साथ-साथ सुरक्षा, रोकथाम और दीर्घकालिक लचीलेपन के उपाय भी किए जाने चाहिए।
इस मौके पर उनके साथ राजस्व, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, लोक निर्माण विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, एसडीआरएफ, पुलिस, गैर सरकारी संगठनों और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।