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Siachen Day: सियाचिन दिवस पर शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि की अर्पित, वीर नारियों को किया सम्मानित
Fri, 14 Apr 2023 12:19 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 14 Apr 2023 12:19 PM IST
सार
सियाचिन ग्लेशियर पर भारतीय सेना के जवान उच्च स्तर की परिचालन तैयारियों के साथ तैनात हैं। सियाचिन ग्लेशियर पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा साझा करने वाली काराकोरम पर्वतमाला में लगभग 76 किलोमीटर तक फैला हुआ है।
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Siachin Day
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सियाचिन दिवस हर साल 13 अप्रैल को मनाया जाता है। सियाचिन विश्व का सबसे ऊंचा और ठंडा रणक्षेत्र है। पिछले 39 सालों से भारतीय सेना के वीर सैनिक देश की सुरक्षा के लिए यहां तैनात हैं। ऑपरेशन मेघदूत के अंतर्गत भारतीय सेना के साहस कि याद में सियाचिन दिवस मनाया जाता है।
सियाचिन वॉरियर्स ने शुक्रवार को 39वें सियाचिन दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया। सियाचिन ब्रिगेड के कमांडर ने फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के जीओसी की ओर से पुष्पांजलि अर्पित की। सियाचिन युद्ध स्मारक, बेस कैंप में शहीद सैनिकों को याद करते हुए श्रद्धांजली अर्पित की। कार्यक्रम के बाद सियाचिन ग्लेशियर पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले दिग्गजों, वीर नारियों और नागरिक सुरक्षा कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।
खराब मौसम की स्थिति और इलाके के कारण सियाचिन ग्लेशियर को सबसे चुनौतीपूर्ण युद्धक्षेत्र माना जाता है। यहां शून्य से भी नीचे तापमान और हिमस्खलन के बीच वीर सैनिक देश की सुरक्षा में डटे रहते हैं। 1984 में ऑपरेशन मेघदूत की शुरुआत के बाद से 39 वर्षों में 11 हजार से अधिक सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह ऑपरेशन साल्टोरो रिज के साथ भारतीय सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए शुरू किया गया था। भारतीय सेना यहां ग्लेशियर के प्रमुख दर्रों और चोटियों की रखवाली कर रही है।
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सियाचिन ग्लेशियर पर भारतीय सेना के जवान उच्च स्तर की परिचालन तैयारियों के साथ तैनात हैं। सियाचिन ग्लेशियर पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा साझा करने वाली काराकोरम पर्वतमाला में लगभग 76 किलोमीटर तक फैला हुआ है। सियाचिन वॉरियर्स देश की रक्षा के लिए तत्पर है और सभी बाधाओं के खिलाफ संकल्प लेने के लिए तैयार हैं। देश इन वीरों का सदैव ऋणी रहेगा।
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सियाचिन वॉरियर्स ने शुक्रवार को 39वें सियाचिन दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया। सियाचिन ब्रिगेड के कमांडर ने फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के जीओसी की ओर से पुष्पांजलि अर्पित की। सियाचिन युद्ध स्मारक, बेस कैंप में शहीद सैनिकों को याद करते हुए श्रद्धांजली अर्पित की। कार्यक्रम के बाद सियाचिन ग्लेशियर पर सर्वोच्च बलिदान देने वाले दिग्गजों, वीर नारियों और नागरिक सुरक्षा कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।
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खराब मौसम की स्थिति और इलाके के कारण सियाचिन ग्लेशियर को सबसे चुनौतीपूर्ण युद्धक्षेत्र माना जाता है। यहां शून्य से भी नीचे तापमान और हिमस्खलन के बीच वीर सैनिक देश की सुरक्षा में डटे रहते हैं। 1984 में ऑपरेशन मेघदूत की शुरुआत के बाद से 39 वर्षों में 11 हजार से अधिक सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह ऑपरेशन साल्टोरो रिज के साथ भारतीय सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए शुरू किया गया था। भारतीय सेना यहां ग्लेशियर के प्रमुख दर्रों और चोटियों की रखवाली कर रही है।
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सियाचिन ग्लेशियर पर भारतीय सेना के जवान उच्च स्तर की परिचालन तैयारियों के साथ तैनात हैं। सियाचिन ग्लेशियर पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा साझा करने वाली काराकोरम पर्वतमाला में लगभग 76 किलोमीटर तक फैला हुआ है। सियाचिन वॉरियर्स देश की रक्षा के लिए तत्पर है और सभी बाधाओं के खिलाफ संकल्प लेने के लिए तैयार हैं। देश इन वीरों का सदैव ऋणी रहेगा।