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Tribute to Zoom: सेना ने ऑपरेशन में शहीद खोजी कुत्ते जूम को दी अंतिम सलामी, मुठभेड़ के दौरान लगी थी गोलियां

Fri, 14 Oct 2022 11:35 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 14 Oct 2022 11:35 AM IST
सार

अनंतनाग के टंगपावा इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान सेना का खोजी कुत्ता जूम को दो गोली लग गई थी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसका पशु अस्पताल में इलाज चल रहा था। उसने वीरवार को दम तोड़ दिया। 

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Tribute to Zoom: Army pays final salute to sniffer dog Zoom martyred in operation
श्रीनगर में जूम को श्रद्धांजलि देते सैन्य अधिकारी - फोटो : पीआरओ

विस्तार

श्रीनगर स्थित चिनार कोर मुख्यालय में शहीद खोजी कुत्ते जूम को सैन्य अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। शुक्रवार सुबह हुए आयोजन में लेफ्टिनेंट जनरल एडीएस औजला समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए जूम की 72 घंटे के इलाज के बाद वीरवार को श्रीनगर के 54 एडवांस फील्ड वेटरनरी हॉस्पिटल (एएफवीएच) में मौत हो गई।

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वह 10 अक्तूबर को अनंतनाग के टंगपावा इलाके में आतंकियों की गोली का शिकार हुआ था। इससे पहले 30 जुलाई को उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में आतंकवादी विरोधी ऑपरेशन में असॉल्ट डॉग एक्सेल गंभीर रूप से घायल होने के बाद शहीद हो गया था। सेना ने करीब ढाई माह में अपने दो बहादुर श्वान खो दिए।
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सेना के एक अधिकारी ने बताया कि श्रीनगर में एएफवीएच में उपचाराधीन आर्मी डॉग जूम का वीरवार दोपहर करीब 12 बजे निधन हो गया। करीब 11.45 बजे तक उसकी हालत स्थिर थी, लेकिन वह अचानक से हांफने लगा और उसने दम तोड़ दिया। वीरवार को सेना की उत्तरी कमान में अपने इस बहादुर सहयोगी को श्रद्धांजलि दी गई।

उत्तरी कमान के एक उच्च सैन्य अधिकारी ने कहा, आर्मी असॉल्ट डॉग जूम ने 72 घंटे तक बहादुरी से जूझते ‘इन द लाइन ऑफ ड्यूटी’ पर अपनी जान की कुर्बानी दे दी। जूम को दक्षिण कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उस स्थान पर भेजा गया जहां आतंकी छिपे हुए थे।

उसने जब कमरे में पहुंचकर आतंकियों पर धावा बोला तो दहशतगर्दों ने उसे दो गोलियां मार दीं। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। जूम का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बुधवार को कहा था कि जूम के लिए अगले 48 घंटे बेहद अहम हैं। गंभीर रूप से घायल होने के बाद हुई सर्जरी के बाद जूम की हालत स्थिर थी। उसके टूटे हुए पिछले पैर में प्लास्टर कर दिया गया था और चेहरे की चोटों का भी इलाज किया जा रहा था।

आठ माह से सेवा में सक्रिय था

सैन्य अधिकारियों ने बताया कि जूम की आयु दो साल और एक माह थी। वह बेल्जियम की चरवाहा नस्ल का था और पिछले आठ महीनों से सेवा में सक्रिय था। उसे आतंकियों का पता लगाने और उन्हें खत्म करने के लिए प्रशिक्षित किया गया था।

शहीद एक्सेल को मिला था वीरता पुरस्कार

इससे पहले सेना ने उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के वानीगाम में 30 जुलाई को एक ऑपरेशन के दौरान दो साल के असाल्ट डॉग एक्सेल को खो दिया था। आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर 15 अगस्त को एक्सेल को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 

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