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ट्रांसपोट्ररो द्वारा किराये में वढोतरी की मांग को लेकर बसें व मिनी बसें सड़कों पर नहीं चली
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आरएस पुरा। उपजिले में बुधवार को यात्री वाहनों को 50 फीसदी क्षमता के साथ चलाने का आदेश जारी करने के विरोध में ऑल जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने हड़ताल रखी। इसके चलते यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बुधवार को बसें व मिनी बसें सड़कों पर नहीं उतरीं और किसी भी रूट पर बस या मिनी बस उपलब्ध न होने से आम यात्रियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
कई जगहों पर लोग पैदल ही अपने गंतव्य की ओर जाते दिखे। कहीं पर सरकारी बसों का इंतजार करते हुए। ट्रांसपोर्टरों के इस चक्का जाम के दौरान यात्रियों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसके लिए रोडवेज की बसें तो चल रही थीं, लेकिन इनकी संख्या कम होने से लोग जगह-जगह इंतजार करते देखे गए। सरकार की ओर से मंगलवार को सभी यात्री वाहनों को 50 फीसद क्षमता के साथ चलाने का निर्देश जारी किया था। एसोसिएशन ने चक्का जाम का आह्वान किया। आरएस पुरा-जम्मू बस यूनियन के प्रधान लाभ सिंह ने कहा कि सरकार चाहती है कि यात्री वाहन 50 फीसद क्षमता के साथ चलें तो इसके लिए सरकार को यात्री किराए में 50 फीसद की वृद्धि करनी होगी। इसके बिना ट्रांसपोर्टर गाड़ी नहीं चला सकते। क्योंकि मौजूदा किराए में 50 फीसद क्षमता के साथ गाड़ी चलाकर डीजल का खर्च भी पूरा नहीं होगा। ट्रांसपोर्टर्स को नुकसान उठाना पड़ेगा।
लोगाें को गंतव्य पर पहुंचने में परेशानी हुई
अखनूर। निजी बस और मेटाडोर चालकों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग के समर्थन पर हड़ताल रखी। जिस पर सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया। लोगों को गंतव्य पर पहुंचने पर बड़ी परेशानी का समाना करना पड़ा।
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बुधवार को छंब रूट की बसें और मेटाडोर यूनियन ने अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल रखी। सड़कों पर यात्री वाहन नहीं चले। वाहन चालकों की मांग है कि अगर सरकार वर्तमान समय पर 50 प्रतिशत सवारियों को बिठा कर आवाजाही का आदेश दिया है तो सरकार को 50 प्रतिशत सवारियों पर किराए की बढ़ोतरी करनी चाहिए। हड़ताल से लोगों को गंतव्य पर पहुंचने पर बड़ी परेेशानी का समाना करना पड़ा। बाजारों में लोगों की आवाजाही कम रही। लोगों का कहना है कि यात्री बसों की हड़ताल से कई परेशानियों का समाना करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि सरकार को ट्रांसपोर्टर से बातचीत करनी चाहिए।
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कई जगहों पर लोग पैदल ही अपने गंतव्य की ओर जाते दिखे। कहीं पर सरकारी बसों का इंतजार करते हुए। ट्रांसपोर्टरों के इस चक्का जाम के दौरान यात्रियों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसके लिए रोडवेज की बसें तो चल रही थीं, लेकिन इनकी संख्या कम होने से लोग जगह-जगह इंतजार करते देखे गए। सरकार की ओर से मंगलवार को सभी यात्री वाहनों को 50 फीसद क्षमता के साथ चलाने का निर्देश जारी किया था। एसोसिएशन ने चक्का जाम का आह्वान किया। आरएस पुरा-जम्मू बस यूनियन के प्रधान लाभ सिंह ने कहा कि सरकार चाहती है कि यात्री वाहन 50 फीसद क्षमता के साथ चलें तो इसके लिए सरकार को यात्री किराए में 50 फीसद की वृद्धि करनी होगी। इसके बिना ट्रांसपोर्टर गाड़ी नहीं चला सकते। क्योंकि मौजूदा किराए में 50 फीसद क्षमता के साथ गाड़ी चलाकर डीजल का खर्च भी पूरा नहीं होगा। ट्रांसपोर्टर्स को नुकसान उठाना पड़ेगा।
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लोगाें को गंतव्य पर पहुंचने में परेशानी हुई
अखनूर। निजी बस और मेटाडोर चालकों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग के समर्थन पर हड़ताल रखी। जिस पर सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया। लोगों को गंतव्य पर पहुंचने पर बड़ी परेशानी का समाना करना पड़ा।
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बुधवार को छंब रूट की बसें और मेटाडोर यूनियन ने अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल रखी। सड़कों पर यात्री वाहन नहीं चले। वाहन चालकों की मांग है कि अगर सरकार वर्तमान समय पर 50 प्रतिशत सवारियों को बिठा कर आवाजाही का आदेश दिया है तो सरकार को 50 प्रतिशत सवारियों पर किराए की बढ़ोतरी करनी चाहिए। हड़ताल से लोगों को गंतव्य पर पहुंचने पर बड़ी परेेशानी का समाना करना पड़ा। बाजारों में लोगों की आवाजाही कम रही। लोगों का कहना है कि यात्री बसों की हड़ताल से कई परेशानियों का समाना करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि सरकार को ट्रांसपोर्टर से बातचीत करनी चाहिए।