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Jammu News: शहर में 51 हजार आवारा कुत्ते, पीछा छुड़ाना मुश्किल
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 51 हजार से अधिक इनकी संख्या आम लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है। रात में यह काटने के लिए दौड़ते हैं तो जान पर बन आती है। कानून इतने सख्त हैं कि इनके प्रति कोई भी कार्रवाई करने से बचता है। नगर निगम के पास इनकी आबादी नियंत्रित करने की जिम्मेदारी है। शहर में इनकी नसबंदी व रखने के लिए दो शेल्टर होम संचालित किए जा रहे हैं।
जम्मू नगर निगम रोजाना करीब 50 कुत्तों की नसबंदी कर रहा है। आवारा कुत्तों को पकड़ना आसान नहीं होता। इनके स्वभाव व जगह का चुनाव पकड़ने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। उस पर डॉग लवर भी नगर निगम की कार्रवाई का विरोध करने उतर आते हैं। ऐसे में उनको विश्वास में लेकर ही टीम कोई कार्रवाई करती है। वर्ष में दो बार इनका प्रजनन होता है, ऐसे में जितनी नसबंदी होती है उससे कहीं अधिक इनकी आबादी दोबारा अस्तित्व में आ जाती है। शहर में 51
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डा. गौरव चौधरी ने बताया कि 2023 के आंकड़े के अनुसार शहर में 51 हजार आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 36 हजार कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। इनमें घरों पर पाले जाने वाले कुत्तों की संख्या लगभग पांच हजार है। लोगों को लगातार नगर निगम अपने कुत्तों का रजिस्ट्रेशन, वैक्सीनेशन कराए जाने के लिए जागरूक करता है। चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखे जाने संबंधी जो आदेश दिए गए हैं। वह सिर्फ दिल्ली एमसीडी क्षेत्र के लिए हैं। यह आदेश जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होता है।
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शेल्टर होम की यह है क्षमता
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डाॅ. गौरव चौधरी ने बताया कि आवारा कुत्तों के लिए दो शेल्टर होम रूपनगर व चाैआदी में बनाए गए हैं। जहां पर 40 से 50 कुत्तों के रहने की व्यवस्था की गई है। आवारा कुत्तों के लिए काम कर रहीं पशु प्रेमी देवेंदर कौन मदान ने कहा कि अब आवारा कुत्तों से शहर में कोई खतरा नहीं है। रेबीज के केस भी कम आ रहे हैं। लोगों को इनसे किसी प्रकार से घबराने की जरूरत नहीं है।
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जम्मू। शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 51 हजार से अधिक इनकी संख्या आम लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है। रात में यह काटने के लिए दौड़ते हैं तो जान पर बन आती है। कानून इतने सख्त हैं कि इनके प्रति कोई भी कार्रवाई करने से बचता है। नगर निगम के पास इनकी आबादी नियंत्रित करने की जिम्मेदारी है। शहर में इनकी नसबंदी व रखने के लिए दो शेल्टर होम संचालित किए जा रहे हैं।
जम्मू नगर निगम रोजाना करीब 50 कुत्तों की नसबंदी कर रहा है। आवारा कुत्तों को पकड़ना आसान नहीं होता। इनके स्वभाव व जगह का चुनाव पकड़ने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। उस पर डॉग लवर भी नगर निगम की कार्रवाई का विरोध करने उतर आते हैं। ऐसे में उनको विश्वास में लेकर ही टीम कोई कार्रवाई करती है। वर्ष में दो बार इनका प्रजनन होता है, ऐसे में जितनी नसबंदी होती है उससे कहीं अधिक इनकी आबादी दोबारा अस्तित्व में आ जाती है। शहर में 51
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नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डा. गौरव चौधरी ने बताया कि 2023 के आंकड़े के अनुसार शहर में 51 हजार आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 36 हजार कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। इनमें घरों पर पाले जाने वाले कुत्तों की संख्या लगभग पांच हजार है। लोगों को लगातार नगर निगम अपने कुत्तों का रजिस्ट्रेशन, वैक्सीनेशन कराए जाने के लिए जागरूक करता है। चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखे जाने संबंधी जो आदेश दिए गए हैं। वह सिर्फ दिल्ली एमसीडी क्षेत्र के लिए हैं। यह आदेश जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होता है।
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शेल्टर होम की यह है क्षमता
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डाॅ. गौरव चौधरी ने बताया कि आवारा कुत्तों के लिए दो शेल्टर होम रूपनगर व चाैआदी में बनाए गए हैं। जहां पर 40 से 50 कुत्तों के रहने की व्यवस्था की गई है। आवारा कुत्तों के लिए काम कर रहीं पशु प्रेमी देवेंदर कौन मदान ने कहा कि अब आवारा कुत्तों से शहर में कोई खतरा नहीं है। रेबीज के केस भी कम आ रहे हैं। लोगों को इनसे किसी प्रकार से घबराने की जरूरत नहीं है।