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तो घाटी को तबाह कर देता झेलम का तांडव

Sun, 21 Sep 2014 02:11 AM IST
Updated Sun, 21 Sep 2014 02:11 AM IST
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then jhelum disaster could have been massive

पीएचई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री शाम लाल शर्मा का कहना है कि चिनाब, तवी और झेलम नदियों में बाढ़ नियंत्रण के प्रबंध के लिए केंद्र सरकार को तीन प्रोजेक्ट सौंपे गए हैं।

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इनमें झेलम नदी से संबंधित प्रोजेक्ट पर 2200 करोड़ रुपये की लागत प्रस्तावित है। इसके अलावा चिनाब नदी के लिए 2600 और तवी नदी के लिए 1900 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट भी केंद्र सरकार के विचाराधीन हैं।

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बुल्लर और डल झील ने बचाया कश्मीर

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अगर बुल्लर और डल झील में बाढ़ के पानी को समाने की क्षमता नहीं होती, तो झेलम में बाढ़ का तांडव अधिक समय तक रहता। बाढ़ से पूर्व कश्मीर में रहे ड्राई सीजन ने भी इन दोनों झीलों की इनटेक क्षमता बढ़ा दी थी।

बाढ़ के दौरान बुल्लर झील में झेलम का पानी डाले जाने से इसका जलस्तर डेढ़ मीटर बढ़ा। इसी प्रकार डल झील के जलस्तर में भी करीब एक मीटर बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

लिहाजा ये दोनों झीलें भी कश्मीर को अधिक बर्बादी से बचाने में कारगर साबित हुईं।

दूसरे फ्लड चैनलों के चलते बढ़ा झेलम में पानी

then jhelum disaster could have been massive

चौंकाने वाला तथ्य यह है कि झेलम में बाढ़ के समय पानी की मात्रा एक लाख बीस हजार क्यूसेक रिकार्ड की गई। असल में इस नदी में अधिकतम पानी बहने की क्षमता 45 हजार क्यूसेक, इससे सटे फ्लड चैनलों को मिलाकर है।

राज्य के पीएचई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री शाम लाल शर्मा ने इन आंकड़ों की तसदीक की है। राज्य बाढ़ नियंत्रण विभाग के आला अफसरों के मुताबिक झेलम में बाढ़ की दूसरी बढ़ी वजह फ्लड चैनलों और इससे सटे इलाकों में अतिक्रमण रही।

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तवी नदी में आया 4.25 लाख क्यूसेक पानी

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झेलम नदी के किनारे राजबाग, खुरसु और जवाहर नगर में बनाए गए बांध के निकट ही बड़े पैमाने पर भवन निर्माण हुआ है। खुरसु में बांध के आगे झेलम नदी की तरफ ही कुछ लोगों ने मकान बनाए हैं। इस इलाके में चार जगह से बांध बाढ़ के कारण टूटा था।

सूत्रों ने बताया कि जम्मू डिवीजन में तवी और चिनाब नदियों में बाढ़ के दौरान पानी की रिकार्ड मात्रा दर्ज की गई। चिनाब नदी में साढ़े छह लाख क्यूसेक और तवी नदी में चार लाख 25 हजार क्यूसेक पानी की मात्रा रिकार्ड की गई थी।

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