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कैंसर को मात देकर गांव की बेटी बन गई अंतरराष्ट्रीय चैंपियन

Sun, 08 Mar 2020 01:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा अरुण कुमार, जम्मू
अरुण कुमार, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 08 Mar 2020 01:43 AM IST
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The village's daughter became international champion by defeating cancer
शिवानी चाढ़क - फोटो : अमर उजाला

नौ साल की उम्र में कैंसर और 18 की आयु में क्लाइंबिंग जैसे चुनौतीपूर्ण खेल में अंतरराष्ट्रीय पदक। जम्मू के मुट्ठी इलाके में पली-बढ़ी शिवानी चाढ़क आज देश की सर्वश्रेष्ठ क्लाइंबर हैं। कैंसर जैसी बीमारी को मात देने वाली गांव की एक बेटी जनून और हौसले के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो दर्जन से ज्यादा पदक जीतकर एक मिसाल बन गई हैं। 

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ग्रामीण पृष्ठभूमि और साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली शिवानी उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं जो छोटी-छोटी मुश्किलों के आगे ही घुटने टेक देते हैं। अठारह वर्षीय कैंसर सर्वाइवर शिवानी चाढ़क अब टोक्यो ओलंपिक की तैयारी में जुटी हैं। इसी माह ट्रायल की कसौटी है, जिस पर शिवानी कहती हैं ‘मुझे हर हाल में यह पड़ाव पार करना है।’ अभी फिलहाल टोक्यो ओलंपिक पर नजर है। इसके बाद 2022 में एशियन गेम्स और फिर 2024 में पेरिस ओलंपिक को अपना लक्ष्य बनाया है।
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हौसले के आगे पस्त हुआ कैंसर
शिवानी का अंतरराष्ट्रीय क्लाइंबर बनने का सफर कैंसर की चुनौती से शुरू हुआ था। शिवानी ने कहा कि जब वह नौ वर्ष की थी, तो पेट में दर्द हुआ। डॉक्टर को दिखाया तो कैंसर का पता चला। परिवार ने पीजीआई चंडीगढ़ में इलाजशुरू करवाया। साल 2012 में कैंसर से जंग जीती, लेकिन कमजोर शरीर और दर्द की चुनौती बरकरार थी। इसके बावजूद सफल क्लाइंबर बनने के  सपने ने रुकने नहीं दिया।
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शिवानी बताती हैं कि कभी लड़की होने पर तंज तो कभी कैंसर के ऑपरेशन ने मुश्किलें बढ़ाईं। शिवानी ने कहा ‘स्कूल में कुछ लड़कों को राखी बांधती थी। परिवार की तरह ही इन मुंह बोले भाइयों ने मेरा हौसला बढ़ाया।’

बीमारी से बाल झड़ने पर हंसती थीं लड़कियां
कैंसर के कारण सिर के बाल झड़ गए। स्कूल में लड़कियां हंसती थीं। वह दौर काफी तनाव और दर्द भरा रहा। बीमार होने के कारण नियमित रूप से स्कूल जाना मुमकिन नहीं था। ऑपरेशन होने के बाद क्लाइंबिंग जैसे साहसिक खेलों में हिस्सेदारी की मनाही होती है लेकिन डॉक्टर से सहमति लेकर क्लाइंबिंग को जुनून बना ही लिया।

एक अंतरराष्ट्रीय, 24 राष्ट्रीय पदक जीते, सरकार से नहीं मिली मदद
शिवानी ने एशियन यूथ चैंपियनशिप में क्लाइबिंग में कांस्य पदक जीता। 2019 में हुई नेशनल चैंपियनशिप में पांच स्वर्ण और पांच सिल्वर मेडल झोली में डाले। पांच वर्षों में राष्ट्रीय स्तर के 24 पदक जीते हैं। सरकार से मदद नहीं मिली तो एक संस्था ने आर्थिक सहायता के लिए आगे आई। शिवानी कहती हैं अब बिना रुकावट अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले पाती हूं।

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